Monday, 20 April 2026

अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी

नासा के 'आर्टेमिस-2' मिशन ने भरी उड़ान, 54 साल बाद इंसान जाएगा चांद के करीब

मिशन के उद्देश्य और 'ओरायन' (Orion) अंतरिक्ष यान

  • अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने अपने ऐतिहासिक मानवयुक्त 'आर्टेमिस-2' (Artemis II) मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है।
  • इस मिशन के तहत 4 अंतरिक्ष यात्रियों (3 अमेरिकी और 1 कनाडाई) को 'ओरायन' (Orion) अंतरिक्ष यान के जरिए चंद्रमा की कक्षा में भेजा गया है।
  • अपोलो-17 (वर्ष 1972) के बाद, यानी 54 साल बाद यह पहली बार है जब इंसान चंद्रमा के इतने करीब जा रहा है।
  • यह मिशन 10 दिनों तक चलेगा, जिसमें अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरेंगे, बल्कि उसकी कक्षा का चक्कर लगाकर पृथ्वी पर सुरक्षित वापस लौटेंगे।

नया रिकॉर्ड: चांद से 7,000 किलोमीटर आगे जाएगा इंसान

  • इस मिशन की सबसे खास बात यह है कि ओरायन कैप्सूल चंद्रमा के सुदूर हिस्से (Far side of the moon) से 7,000 किलोमीटर आगे तक की यात्रा करेगा।
  • इंसानी अंतरिक्ष उड़ान के इतिहास में यह अब तक की सबसे अधिक दूरी होगी, जहाँ तक कोई मानव पहुँचा है।
  • इस मिशन का मुख्य उद्देश्य दुनिया के सबसे शक्तिशाली 'स्पेस लॉन्च सिस्टम' (SLS) रॉकेट और ओरायन यान के लाइफ सपोर्ट सिस्टम का परीक्षण करना है, ताकि भविष्य के आर्टेमिस-3 (चांद पर लैंडिंग) अभियान का रास्ता साफ हो सके।
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DEOrbit Exam Note: आर्टेमिस मिशन (Artemis Program): नासा का आर्टेमिस कार्यक्रम चंद्रमा पर इंसानों की स्थायी उपस्थिति दर्ज करने और वहां बेस कैंप बनाने का एक प्रयास है। इसके 3 मुख्य चरण हैं: आर्टेमिस-1 (2022 में सफल, मानवरहित परीक्षण), आर्टेमिस-2 (मानवयुक्त कक्षीय उड़ान), और आर्टेमिस-3 (चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहली महिला और अश्वेत व्यक्ति को उतारना)। चंद्रमा की देवी 'आर्टेमिस' ग्रीक पौराणिक कथाओं में अपोलो की जुड़वां बहन हैं।

बेंगलुरु में 'अंतरिक्ष यान मिशन संचालन' पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (SMOPS-2026)

सम्मेलन का आयोजन, थीम और आयोजक

  • अंतरिक्ष यान मिशन संचालन पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे संस्करण 'एसएमओपीएस-2026' (SMOPS-2026) का आयोजन 8 से 10 अप्रैल, 2026 के दौरान बेंगलुरु, भारत में किया जा रहा है।
  • इस वर्ष सम्मेलन की थीम: "स्मार्ट और सतत अंतरिक्ष मिशन प्रबंधन के लिए अभिनव संचालन - अगली पीढ़ी" (Innovative Operations for Smart and Sustainable Space Mission Management - Next Generation) रखी गई है।
  • इसका आयोजन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO), एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (ASI) और इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ एस्ट्रोनॉटिक्स (IAA) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है।
  • सम्मेलन का उद्घाटन 8 अप्रैल को इसरो के पूर्व अध्यक्ष श्री ए. एस. किरण कुमार ने किया।

मुख्य विषय और वैश्विक अंतरिक्ष एजेंसियों की भागीदारी

  • इस सम्मेलन में आधुनिक अंतरिक्ष मिशनों की चुनौतियों पर चर्चा की गई, जिनमें मुख्य रूप से मिशन संचालन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग (ML) का उपयोग, मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन, स्पेस रोबोटिक्स और अंतरिक्ष में बढ़ते ट्रैफिक जाम का प्रबंधन शामिल है।
  • यह सम्मेलन एक वैश्विक मंच बन गया है, जिसमें नासा (NASA - अमेरिका), जाक्सा (JAXA - जापान), ईएसए (ESA - यूरोप), सीएनईएस (CNES - फ्रांस) और रोस्कोस्मोस (रूस) सहित दुनिया की शीर्ष अंतरिक्ष एजेंसियों के विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
  • सम्मेलन में भारत की ऐतिहासिक उपलब्धियों जैसे मंगलयान मिशन, चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग और आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान की स्थापना का विशेष रूप से उल्लेख किया गया।
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DEOrbit Exam Note: ISTRAC (इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क): न्यूज़ में ISTRAC का ज़िक्र है, जिसका मुख्यालय बेंगलुरु में स्थित है। यह भारत के सभी पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों और गहरे अंतरिक्ष मिशनों (जैसे चंद्रयान, मंगलयान और आदित्य-L1) की ट्रैकिंग, नियंत्रण और संचार (Command) का कार्य करता है। आदित्य-L1 भारत का पहला सौर मिशन है, जिसे सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के 'लैग्रेंज बिंदु 1' (L1) के चारों ओर एक प्रभामंडल कक्षा (Halo orbit) में स्थापित किया गया है। L1 बिंदु पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किलोमीटर दूर है, जहाँ से सूर्य पर बिना किसी ग्रहण (Eclipse) के लगातार नजर रखी जा सकती है।

इसरो का नया मिशन 'MITRA' (मित्र)

लद्दाख में मानव व्यवहार और 'एनालॉग टेस्टिंग'

  • MITRA (मित्र) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का एक नया मिशन है।
  • इसका पूरा नाम: Mapping of Interoperable Traits and Response Assessment है।
  • इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह जाँचना है कि अंतरिक्ष यात्री अत्यंत मुश्किल और एकांत हालात में एक टीम के रूप में कैसे काम करते हैं और निर्णय लेते हैं।
  • हाल ही में इसरो ने इसे लेह (लद्दाख) में करीब 3,500 मीटर की ऊंचाई पर शुरू किया है, जहाँ कृत्रिम रूप से 'अंतरिक्ष जैसी परिस्थितियां' (Analog Habitat) बनाई गई हैं।
  • यह अध्ययन आगामी मानव अंतरिक्ष मिशन (गगनयान) की तैयारियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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DEOrbit Exam Note: अंतरिक्ष मिशन से पहले पृथ्वी पर ही अंतरिक्ष जैसे एकांत और कठोर वातावरण का निर्माण करके क्रू (Crew) की मानसिक और शारीरिक जांच करने की प्रक्रिया को 'एनालॉग स्पेस मिशन' (Analog Space Mission) कहा जाता है। लेह-लद्दाख का ठंडा, शुष्क और कम ऑक्सीजन वाला वातावरण इसके लिए एकदम उपयुक्त है।

IIT कानपुर और स्टैनफोर्ड का नया 'UAV-सैटेलाइट' सिस्टम

नई हाइब्रिड तकनीक की क्षमताएं

  • भारत के आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) और अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (Stanford University) के शोधकर्ताओं ने मिलकर स्पेस टेक्नोलॉजी में एक क्रांतिकारी 'एयरोडायनामिक डिजाइन' विकसित किया है।
  • यह नई तकनीक एक हाइब्रिड प्रणाली है जो अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV - ड्रोन) और सैटेलाइट (उपग्रह) दोनों के रूप में एक साथ काम करने में सक्षम है।
  • इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 'लो-ऑल्टिट्यूड' (कम ऊंचाई) पर उड़ सकता है, जिससे यह दुश्मन देशों के रडार (Radar) की पकड़ में नहीं आता है।
  • यह तकनीक भारत के रक्षा और जासूसी (Surveillance) क्षेत्र में गेम-चेंजर साबित हो सकती है, जिससे सीमा पर घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों पर सटीक नजर रखी जा सकेगी।
  • रक्षा क्षेत्र के अलावा इसका उपयोग कृषि की निगरानी (Agricultural Monitoring) और मौसम की सटीक भविष्यवाणी के लिए भी किया जाएगा।
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DEOrbit Exam Note: UAV (Unmanned Aerial Vehicle): इन्हें आम भाषा में 'ड्रोन' कहा जाता है। भारत के प्रमुख स्वदेशी UAV 'रुस्तम' (Rustom), 'तपस' (TAPAS) और 'नेत्र' (Netra) हैं, जिन्हें रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित किया गया है। भारत ने हाल ही में अमेरिका से उन्नत 'MQ-9B प्रीडेटर ड्रोन' खरीदने का समझौता भी किया है।

गगनयान मिशन का दूसरा 'इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट' सफल

इसरो ने श्रीहरिकोटा से किया परीक्षण, 2027 में मानव मिशन लॉन्च का लक्ष्य

  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने श्रीहरिकोटा से अपने महत्वाकांक्षी 'गगनयान मिशन' के लिए दूसरा सफल 'इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट' पूरा कर लिया है।
  • इस महत्वपूर्ण परीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि अंतरिक्ष से लौटते समय 'क्रू मॉड्यूल' (Crew Module) पैराशूट के जरिए सुरक्षित रूप से जमीन पर उतर सके।
  • भारत के इस पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन को अब वर्ष 2027 में लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • मुख्य मानव मिशन से पहले, इसरो अंतरिक्ष में तीन 'अनक्रूड' (बिना चालक वाले) परीक्षण मिशन भेजेगा।

पेटेंट और स्पेस मिशन अपडेट

मुख्य बिंदु

  • पेटेंट: वर्ष 2025-26 में भारत के पेटेंट आवेदन 30.2% बढ़कर 1,43,729 हो गए हैं।
  • भारत अब दुनिया का छठा सबसे ज्यादा पेटेंट फाइल करने वाला देश बन गया है।
  • स्पेस (ISRO): कर्नाटक पोस्टल सर्कल ने बेंगलुरु में इसरो (ISRO) को सम्मानित करने हेतु स्मारक डाक टिकट जारी किए हैं।
  • इन डाक टिकटों का डिजाइन 1975 के 'आर्यभट्ट' उपग्रह से लेकर आगामी 'गगनयान' मिशन तक की अंतरिक्ष यात्रा को दर्शाता है।

शक्तिशाली कॉस्मिक सिग्नल की खोज

वैज्ञानिक उपलब्धि

  • वैज्ञानिकों ने सुदूर अंतरिक्ष से आने वाला एक अत्यंत शक्तिशाली कॉस्मिक सिग्नल खोजा है, जिसे 'हाइड्रॉक्सिल मेगामेजर' कहा गया है।
  • यह सिग्नल लगभग 8 अरब प्रकाश-वर्ष दूर टकराती हुई आकाशगंगाओं से आया है, जिसे दक्षिण अफ्रीका के MeerKAT टेलीस्कोप से देखा गया।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स: हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन की हालिया हार को उनके 'इलिबरल डेमोक्रेसी' मॉडल का अंत माना जा रहा है। वहीं, भारत में वोट देने और चुनाव लड़ने के अधिकार को सुप्रीम कोर्ट ने 'मौलिक अधिकार' के बजाय 'वैधानिक अधिकार' (Statutory Right) की श्रेणी में रखा है।

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