Monday, 20 April 2026

रक्षा प्रौद्योगिकी

मुंबई में आयोजित हुआ 'नौसेना अलंकरण समारोह-2026'

समारोह के मुख्य बिंदु और वीरता पुरस्कार

  • नौसेना प्रमुख (CNS) एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने 1 अप्रैल 2026 को मुंबई में आयोजित 'नौसेना अलंकरण समारोह' में नौसेना कर्मियों को सम्मानित किया।
  • यह अलंकरण समारोह भारत के राष्ट्रपति की ओर से नौसेना कर्मियों और इकाइयों को उनकी बहादुरी, नेतृत्व और विशिष्ट सेवा को मान्यता देने के लिए आयोजित किया गया।
  • प्रदान किए व्यक्तिगत पुरस्कारों में 2 युद्ध सेवा पदक, 12 नौसेना पदक (वीरता), 8 नौसेना पदक (कर्तव्य के प्रति समर्पण) और 18 विशिष्ट सेवा पदक शामिल थे।

विशेष मेमोरियल पदक और ट्रॉफियां

  • स्वर्गीय दीपक कुमार (पीओ ईएमआई) को मरणोपरांत 'सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक' से सम्मानित किया गया, जिसे समारोह में उनकी पत्नी ने ग्रहण किया।
  • उड़ान सुरक्षा (Flight Safety) को बढ़ावा देने के उत्कृष्ट कार्य के लिए 'कैप्टन रवि धीर मेमोरियल स्वर्ण पदक' प्रदान किया गया।
  • नौसेना में उत्कृष्ट अनुसंधान (Research) कार्य के लिए 'लेफ्टिनेंट वी.के. जैन मेमोरियल पदक' दिया गया।
  • पर्यावरण के अनुकूल कार्यों को बढ़ावा देने के लिए, औद्योगिक और गैर-औद्योगिक श्रेणियों में 'सर्वश्रेष्ठ हरित अभ्यास' (Best Green Practices) हेतु 'सीएनएस रोलिंग ट्रॉफी' भी प्रदान की गई।
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DEOrbit Exam Note: भारतीय नौसेना (Indian Navy) विशेष तथ्य: भारतीय नौसेना का आदर्श वाक्य 'शं नो वरुणः' (जल के देवता वरुण हमारे लिए मंगलकारी हों) है। भारत में प्रतिवर्ष 4 दिसंबर को नौसेना दिवस मनाया जाता है, जो 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान कराची बंदरगाह पर किए गए 'ऑपरेशन ट्राइडेंट' (Operation Trident) की सफलता का प्रतीक है। नौसेना की तीन मुख्य कमानें हैं: पश्चिमी नौसेना कमान (मुख्यालय - मुंबई), पूर्वी नौसेना कमान (मुख्यालय - विशाखापत्तनम), और दक्षिणी नौसेना कमान (मुख्यालय - कोच्चि, जो कि एक प्रशिक्षण कमान है)।

वायु सेना प्रशिक्षण कमान, बेंगलुरु में त्रि-सेवा संगोष्ठी 'रण संवाद' का आयोजन

'रण संवाद' 2026: तिथि, स्थान और मुख्य विषय (Theme)

  • भारतीय रक्षा बलों की भविष्य की युद्ध रणनीतियों को आकार देने के लिए 9-10 अप्रैल, 2026 को एक महत्वपूर्ण त्रि-सेवा संगोष्ठी (Tri-service symposium) 'रण संवाद' का आयोजन किया गया।
  • इस प्रतिष्ठित रक्षा संगोष्ठी का आयोजन वायु सेना प्रशिक्षण कमान (Air Force Training Command), बेंगलुरु में किया जा रहा है, जो युद्ध के उभरते प्रतिमानों पर निरंतर और सुनियोजित संवाद की शुरुआत का प्रतीक है।
  • इस वर्ष संगोष्ठी का मुख्य विषय (Theme) "बहु-क्षेत्रीय अभियान: पारंपरिक और अनियमित खतरों से निपटने की अनिवार्यता" निर्धारित किया गया है।
  • दो-दिवसीय इस आयोजन के दौरान रक्षा बलों को थल, वायु, समुद्र, साइबर, अंतरिक्ष और संज्ञानात्मक क्षेत्रों (Cognitive domains) सहित 'बहुआयामी संघर्ष' के लिए तैयार करने की रूपरेखा पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।
  • विभिन्न सत्रों में आधुनिक युद्धक्षेत्रों को आकार देने वाले वैश्विक रुझानों, परिचालन कला की पुनर्कल्पना और जटिल वातावरण में प्रभावी कमान और नियंत्रण (Command and Control) जैसे प्रमुख पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।

'रण संवाद' की वैचारिक पृष्ठभूमि और सीडीएस (CDS) की भूमिका

  • इस तरह की अनूठी और अपनी तरह की पहली त्रि-सेवा पहल की परिकल्पना रक्षा प्रमुख (सीडीएस - Chief of Defence Staff) जनरल अनिल चौहान द्वारा की गई थी।
  • इसे मूल रूप से 'रण संवाद - युद्ध, युद्ध कला और युद्ध प्रक्रिया पर वार्तालाप' के रूप में संकल्पित किया गया था, ताकि रक्षा पेशेवरों और विशेषज्ञों के बीच रणनीतिक संवाद स्थापित किया जा सके।
  • विज्ञप्ति के अनुसार, 'रण संवाद' के प्रथम और उद्घाटन सत्र का आयोजन मध्य प्रदेश स्थित आर्मी वॉर कॉलेज, महू (Army War College, Mhow) में किया गया था।
  • महू में आयोजित उस प्रथम सत्र का मुख्य विषय "युद्धकला पर प्रौद्योगिकी का प्रभाव" था, जिसने सैन्य पेशेवरों के बीच इस उच्च-स्तरीय विचार-विमर्श की मजबूत नींव रखी थी।
  • वर्तमान संगोष्ठी बहु-क्षेत्रीय अभियानों में नागरिक-सैन्य समन्वय (Civil-Military Coordination) की व्यापक समझ प्रदान करेगी, जिससे भारतीय रक्षा बलों की 'परिचालन तत्परता' में भारी वृद्धि होगी।
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DEOrbit Exam Note: चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) और रक्षा कमान: भारतीय सशस्त्र बलों में 'संयुक्तता' (Jointness) और एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए कारगिल समीक्षा समिति की सिफारिश पर CDS के पद का सृजन किया गया था। जनरल बिपिन रावत भारत के पहले CDS थे, जबकि वर्तमान (दूसरे) CDS जनरल अनिल चौहान हैं। परीक्षा की दृष्टि से सेनाओं की कमान और उनके मुख्यालय अत्यंत महत्वपूर्ण हैं: भारतीय वायु सेना (IAF) की कुल 7 कमान हैं, जिनमें से 'प्रशिक्षण कमान' (Training Command) का मुख्यालय बेंगलुरु (कर्नाटक) में स्थित है। वहीं, थल सेना का 'आर्मी वॉर कॉलेज' मध्य प्रदेश के महू (Mhow - Military Headquarters Of War) में स्थित है, जिसे अब डॉ. अंबेडकर नगर के नाम से भी जाना जाता है।

रक्षा क्षेत्र के प्रमुख युद्धाभ्यास और नौसैन्य गतिविधियां

भारत-मिस्र संयुक्त विशेष बल अभ्यास 'साइक्लोन-IV' (Cyclone-IV)

  • भारतीय सेना का एक दस्ता भारत और मिस्र (Egypt) के बीच संयुक्त विशेष बल अभ्यास 'साइक्लोन-IV' (चौथे संस्करण) में भाग लेने के लिए रवाना हुआ है।
  • यह सैन्य अभ्यास 9 से 17 अप्रैल, 2026 तक मिस्र के अंशास (Anshas) क्षेत्र में आयोजित किया जा रहा है।
  • भारतीय दल में विशेष बलों (Special Forces) की इकाइयों के 25 चयनित जवान शामिल हैं।
  • इस अभ्यास का मुख्य फोकस रेगिस्तानी और अर्ध-रेगिस्तानी क्षेत्रों में विशेष अभियानों से जुड़ी रणनीतियों और सामरिक तालमेल को बढ़ाना है।

आईएनएस त्रिकंद की केन्या यात्रा और 'PASSEX' अभ्यास

  • भारतीय नौसेना का अग्रणी निर्देशित मिसाइल युद्धपोत आईएनएस त्रिकंद (INS Trikand) दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी तैनाती के तहत 7 अप्रैल 2026 को केन्या के मोम्बासा (Mombasa) पहुंचा।
  • इस अवसर पर पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन भी केन्या यात्रा पर पहुंचे।
  • मोम्बासा से प्रस्थान करने से पहले आईएनएस त्रिकंद केन्या नौसेना की इकाइयों के साथ एक पैसेज एक्सरसाइज (PASSEX) में भाग लेगा।

आईएनएस सुदर्शिनी की फ्रांस यात्रा और 'एस्केल ए सेते 2026' में भागीदारी

  • भारतीय नौसेना का नौकायन प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी (INS Sudarshini) 7 अप्रैल 2026 को फ्रांस के सेते (Sete) बंदरगाह से रवाना हुआ।
  • इस पोत ने भूमध्य सागर के द्विवार्षिक समुद्री उत्सव 'एस्केल ए सेते 2026' (Escale à Sète) में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
  • पोत ने फ्रांसीसी नौसेना की 400वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित 'हेरिटेज सिटी परेड' में भाग लिया और सुदर्शिनी रोइंग टीम ने ज्यूक्स मैरीटाइम्स में कांस्य पदक जीता।
  • सेते से रवाना होने के बाद, आईएनएस सुदर्शिनी अब अपने 'लोकायन 26' (Lokayan 26) मिशन के तहत कैसाब्लांका के रास्ते में है।
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DEOrbit Exam Note:

अभ्यास साइक्लोन (Cyclone): भारत और मिस्र के विशेष बलों (Special Forces) के बीच यह पहला और एकमात्र द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास है, जिसका पहला संस्करण वर्ष 2023 में जैसलमेर (राजस्थान) में आयोजित किया गया था।

आईएनएस त्रिकंद और SAGAR: आईएनएस त्रिकंद भारतीय नौसेना का एक 'तलवार श्रेणी' (Talwar-class) का गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है। इसकी तैनाती SAGAR (Security and Growth for All in the Region) विज़न के तहत की गई है, जो हिंद महासागर क्षेत्र के लिए भारत की रणनीतिक नीति है।

आईएनएस सुदर्शिनी और 'लोकायन': आईएनएस सुदर्शिनी गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित एक 'नौकायन प्रशिक्षण पोत' (Sail Training Ship) है। भारतीय नौसेना द्वारा दुनिया भर के बंदरगाहों पर अपने कैडेटों को प्रशिक्षण देने और सद्भावना यात्राओं के लिए चलाए जा रहे मिशन को 'लोकायन' (Lokayan - Voyage around the world) नाम दिया गया है।

INS तारागिरी और परमाणु-पनडुब्बी INS अरिदमन नौसेना में शामिल

तीसरी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी

  • भारतीय नौसेना की ताकत में इजाफा करते हुए INS अरिदमन (INS Aridhaman) और स्टील्थ फ्रिगेट INS तारागिरी (INS Taragiri) को कमीशन किया गया है।
  • INS अरिदमन नौसेना में शामिल होने वाली तीसरी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) है।
  • यह पनडुब्बी परमाणु हथियार ले जाने में पूरी तरह से सक्षम है।
  • इसके शामिल होने के साथ ही भारत में पहली बार 3 सक्रिय परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां हो गई हैं।
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DEOrbit Exam Note: INS अरिदमन 'अरिहंत-श्रेणी' (Arihant-class) की पनडुब्बी है। इससे पूर्व INS अरिहंत और INS अरिघात इस श्रेणी के तहत नौसेना में शामिल की जा चुकी हैं। INS तारागिरी 'प्रोजेक्ट 17A' (Project 17A) के तहत निर्मित एक उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट है, जिसका निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), मुंबई द्वारा किया गया है।

स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट 'INS तारागिरी' (Taragiri) भारतीय नौसेना में शामिल

'प्रोजेक्ट 17A' और 'तारागिरी' का नौसेना में कमीशन

  • रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) में एक भव्य समारोह के दौरान भारतीय नौसेना के नवीनतम स्टील्थ फ्रिगेट 'आईएनएस तारागिरी' (INS Taragiri) को आधिकारिक रूप से कमीशन किया।
  • यह युद्धपोत नौसेना के प्रतिष्ठित 'प्रोजेक्ट 17A' (Project 17A) के तहत निर्मित तीसरा स्टील्थ गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट है।
  • इसका निर्माण 'मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड' (MDL), मुंबई द्वारा पूर्णतः स्वदेशी रूप से किया गया है, जो भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' पहल का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • इस शानदार पोत का नाम उत्तराखंड के गढ़वाल में स्थित 'तारागिरी' पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया है।

उन्नत स्टील्थ तकनीक और घातक मारक क्षमता

  • प्रोजेक्ट 17A के जहाज अपने पूर्ववर्ती 'शिवालिक-क्लास' (प्रोजेक्ट 17) जहाजों का उन्नत संस्करण हैं, जिनमें बहुत बेहतर 'स्टील्थ' (रडार से बचने की क्षमता) विशेषताएँ मौजूद हैं।
  • यह सतह से सतह पर मार करने वाली ब्रह्मोस (BrahMos) सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों और हवा में मार करने वाली उन्नत मिसाइल (SAM) प्रणालियों से लैस है।
  • आईएनएस तारागिरी दुश्मन के विमानों, पनडुब्बियों और जहाजों को नष्ट करने के लिए अत्याधुनिक स्वदेशी रडार, सोनार और 'इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर' (EW) सूट से सुसज्जित है।
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DEOrbit Exam Note: प्रोजेक्ट 17A (नीलगिरि क्लास): इस प्रोजेक्ट को वर्ष 2015 में मंजूरी दी गई थी, जिसके तहत कुल 7 स्टील्थ फ्रिगेट्स का निर्माण किया जा रहा है (4 मझगांव डॉक- MDL द्वारा और 3 गार्डन रीच शिपबिल्डर्स- GRSE द्वारा)। इस श्रेणी का पहला जहाज 'INS नीलगिरि' और दूसरा 'INS उदयगिरि' था। प्रोजेक्ट 17A के सभी जहाजों का नाम भारत की प्रमुख पर्वत श्रृंखलाओं (Mountain Ranges) के नाम पर रखा गया है।

⚓ अंतर्राष्ट्रीय रक्षा संबंध: 'आईओएस सागर' मिशन के तहत भारतीय नौसैनिक पोत 'INS सुनयना' पहुंचा मालदीव

INS सुनयना का माले दौरा और 'एक महासागर, एक मिशन'

  • हिंद महासागर में 'आईओएस सागर' (IOS SAGAR) पोत मिशन पहल के तहत तैनात भारतीय नौसैनिक पोत 'आईएनएस सुनयना' (INS Sunayna) 6 अप्रैल 2026 को मालदीव की राजधानी माले (Male) पहुंच गया है।
  • इस विशेष समुद्री यात्रा को रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ द्वारा 2 अप्रैल 2026 को मुंबई से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया था।
  • यह महत्वपूर्ण पहल 'एक महासागर, एक मिशन' (One Ocean, One Mission) के चिरस्थायी दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसका उद्देश्य भारत और समुद्री पड़ोसी देशों के बीच संबंधों को मजबूत करना है।
  • इस मिशन में 16 मित्र देश एक साथ मिलकर हिंद महासागर के दक्षिण-पूर्व क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, सहयोग और 'अंतर-संचालनीयता' (Interoperability) बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं।

संयुक्त सैन्य अभ्यास: 'पैसेज एक्सरसाइज' (PASSEX) और प्रशिक्षण

  • इस बहुराष्ट्रीय अभियान की एक बड़ी विशेषता यह है कि आईएनएस सुनयना के नाविक दल में मालदीव राष्ट्रीय रक्षा बल (MNDF) के दो कर्मी भी शामिल हैं।
  • माले में ठहराव के दौरान दोनों देशों के बलों ने समुद्री कौशल, छोटे हथियारों से फायरिंग और 'क्षति नियंत्रण' (Damage Control) अभ्यासों का गहन संयुक्त प्रशिक्षण प्राप्त किया।
  • जहाज के माले से प्रस्थान के समय भारतीय नौसेना और मालदीव राष्ट्रीय तटरक्षक बल के बीच एक 'पैसेज एक्सरसाइज' (PASSEX - Passage Exercise) का भी आयोजन किया जाएगा।
  • इस यात्रा का समग्र उद्देश्य दोनों देशों के बीच 'पड़ोसी प्रथम' (Neighbourhood First) नीति और 'सागर' (SAGAR) विजन के तहत प्रगाढ़ और स्थायी समुद्री साझेदारी को प्रदर्शित करना है।
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DEOrbit Exam Note: PASSEX और SAGAR विजन: 'पैसेज एक्सरसाइज' (PASSEX) भारतीय नौसेना द्वारा नियमित रूप से किया जाने वाला एक नौसैनिक अभ्यास है। जब भी कोई भारतीय नौसैनिक जहाज किसी मित्र देश के बंदरगाह पर जाता है या उनके समुद्री क्षेत्र से गुजरता है, तो आपसी सहयोग और तालमेल सुनिश्चित करने के लिए यह अभ्यास किया जाता है। 'सागर' (SAGAR - Security and Growth for All in the Region) विजन की शुरुआत भारत सरकार द्वारा वर्ष 2015 में की गई थी, जिसका मुख्य लक्ष्य हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के देशों के साथ समुद्री सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है। आईएनएस सुनयना (INS Sunayna) भारतीय नौसेना का एक 'सरयू-श्रेणी' (Saryu-class) का स्वदेशी गश्ती पोत है।

अंतर्राष्ट्रीय रक्षा सहयोग: भारतीय नौसेना का युद्धपोत 'INS त्रिकंड' तंजानिया पहुंचा

INS त्रिकंड का 'दार-एस-सलाम' दौरा और प्रमुख सामरिक गतिविधियां

  • भारतीय नौसेना का प्रमुख गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट 'आईएनएस त्रिकंड' (INS Trikand) 03 अप्रैल 2026 को पूर्वी अफ्रीकी देश तंजानिया के 'दार-एस-सलाम' (Dar-es-Salaam) बंदरगाह पर पहुंच गया है।
  • यह महत्वपूर्ण समुद्री यात्रा दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र (South-Western Indian Ocean Region) में भारतीय नौसेना की निरंतर और सामरिक तैनाती का एक प्रमुख हिस्सा है।
  • इस आधिकारिक दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और तंजानिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और समुद्री सहयोग (Maritime Cooperation) को बढ़ावा देना है।
  • इस पोर्ट कॉल के दौरान 'आईएनएस त्रिकंड' के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन सचिन कुलकर्णी तंजानिया पीपुल्स डिफेंस फोर्सेज (TPDF) और यूनाइटेड रिपब्लिक ऑफ तंजानिया की सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च-स्तरीय मुलाकात करेंगे।

'महासागर' (SAGAR) विजन, संयुक्त सैन्य अभ्यास और कूटनीति

  • बंदरगाह पर प्रवास के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच आपसी तालमेल (Interoperability) बढ़ाने के लिए पेशेवर संवाद और संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास (Joint Training Exercises) आयोजित किए जाएंगे।
  • भारत की रक्षा और मानवीय कूटनीति (Humanitarian Diplomacy) के तहत, भारत से लाए गए कुछ जरूरी सामान (Essential supplies) भी इस दौरे के दौरान तंजानिया को सौंपे जाएंगे।
  • सैन्य अभ्यासों के अतिरिक्त, कई तरह के सामाजिक और सामुदायिक कार्यक्रम भी आयोजित होंगे, जिनमें मैत्रीपूर्ण खेल प्रतिस्पर्धाएं, योग (Yoga) सत्र और एक सांस्कृतिक संध्या शामिल है, जिससे दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी सद्भावना (People-to-people connect) बढ़ेगी।
  • आईएनएस त्रिकंड का यह दौरा भारत के 'महासागर' (SAGAR) विजन के पूर्णतः अनुरूप है, जिसका आधिकारिक अर्थ "विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए आपसी और समग्र प्रगति" है।
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DEOrbit Exam Note: SAGAR विजन और भारत-तंजानिया संबंध: 'SAGAR' (Security and Growth for All in the Region) विजन की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2015 में मॉरीशस यात्रा के दौरान की गई थी, जिसका मुख्य लक्ष्य हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के देशों के साथ समुद्री सुरक्षा और आर्थिक सहयोग बढ़ाना है। तंजानिया (राजधानी: डोडोमा) पूर्वी अफ्रीका का एक महत्वपूर्ण देश है। करंट अफेयर्स के दृष्टिकोण से यह तथ्य अति-महत्वपूर्ण है कि भारत के बाहर पहली बार 'IIT मद्रास' (IIT Madras) ने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय परिसर तंजानिया के जंजीबार (Zanzibar) में ही स्थापित किया है।

आईएनएस त्रिकंद ने केन्या के 'मोम्बासा बंदरगाह' पर अपना प्रवास किया पूरा

भारतीय नौसेना ने केन्या को सौंपे 'इंसास' (INSAS) राइफलें और गोला-बारूद

  • भारतीय नौसेना के अग्रणी निर्देशित मिसाइल फ्रिगेट 'आईएनएस त्रिकंद' (INS Trikand) ने 10 अप्रैल 2026 को केन्या के मोम्बासा बंदरगाह पर अपना प्रवास सफलतापूर्वक समाप्त कर लिया है।
  • यह प्रवास पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (FOC-in-C) वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन की केन्या यात्रा के साथ संपन्न हुआ।
  • जहाज पर आयोजित एक औपचारिक समारोह के दौरान, भारतीय नौसेना ने केन्या नौसेना के कमांडर 'मेजर जनरल पॉल ओवोर ओटिएनो' को इंसास (INSAS) राइफलें और गोला-बारूद औपचारिक रूप से सौंपे।
  • आईएनएस त्रिकंद के कमांडिंग ऑफिसर 'कैप्टन सचिन कुलकर्णी' ने केन्या नौसेना बेड़े के कमांडर से भेंट की और दोनों नौसेनाओं के बीच 'विजिट बोर्ड सर्च एंड सीज़र' (VBSS), क्रॉस डेक विजिट तथा खेल व योग प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स: सागर विजन (SAGAR): मोम्बासा बंदरगाह पर आईएनएस त्रिकंद का यह प्रवास भारत के 'महासागर' (Security and Growth for All in the Region - क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह पहल हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की उपस्थिति और अफ्रीकी देशों (विशेषकर केन्या) के साथ सौहार्द, पारस्परिक सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कूटनीतिक कदम है।

लखनऊ के 'स्मृतिका युद्ध स्मारक' में अत्याधुनिक लेजर और साउंड शो का उद्घाटन

रक्षा मंत्री और यूपी के मुख्यमंत्री ने किया संयुक्त रूप से शुभारंभ

  • रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने 11 अप्रैल 2026 को लखनऊ छावनी स्थित 'स्मृतिका युद्ध स्मारक' (Smritika War Memorial) में अत्याधुनिक लेजर, लाइट और साउंड शो का उद्घाटन किया।
  • लगभग 30 मिनट के इस मल्टीमीडिया शो में 1947-48, 1962, 1965 और 1971 के प्रमुख युद्धों सहित 'ऑपरेशन मेघदूत' और 'ऑपरेशन विजय' में भारतीय सेना के अद्वितीय योगदान को प्रदर्शित किया गया है।
  • यह महत्वपूर्ण पहल सेना के मुख्यालय 'मध्य कमान' (Central Command) की ओर से उत्तर प्रदेश सरकार और 'उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम' के सहयोग से की गई है।
  • इस शो को प्रदर्शित करने के लिए स्मारक परिसर का व्यापक जीर्णोद्धार किया जा रहा है, जिसके तहत एक आधुनिक एम्फीथिएटर और सैन्य इतिहास को दर्शाने वाली तीन विशेष 'मिनिएचर दीवारें' बनाई जा रही हैं।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स: स्मृतिका युद्ध स्मारक: यह स्मारक भारतीय रक्षा बलों के सैनिकों की वीरता और बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए वर्ष 1994 से लखनऊ छावनी में स्थापित है। मध्य कमान (Central Command): भारतीय थल सेना की कुल 7 कमान हैं, जिनमें से मध्य कमान का मुख्यालय लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में ही स्थित है। इस उद्घाटन समारोह में मध्य कमान के 'जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ' लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता भी उपस्थित थे।

भारतीय वायुसेना का 'मेंटेनेंस कमांड कमांडर्स कॉन्क्लेव 2026' नागपुर में संपन्न

'ऑपरेशंस को सहयोग देने के लिए मिशन मोड में मेंटेनेंस कमांड' विषय पर मंथन

  • भारतीय वायुसेना का 'मेंटेनेंस कमांड कमांडर्स कॉन्क्लेव 2026' 10 और 11 अप्रैल, 2026 को वायुसेना नगर, नागपुर में आयोजित किया गया।
  • इस महत्वपूर्ण सम्मेलन की अध्यक्षता मेंटेनेंस कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ एयर मार्शल वल्ला उमेश ने की।
  • इस वर्ष के कॉन्क्लेव का मुख्य विषय (Theme) "ऑपरेशंस को सहयोग देने के लिए मिशन मोड में मेंटेनेंस कमांड" रखा गया था।
  • सम्मेलन में विदेशी 'ओईएम' (OEM) पर निर्भरता कम करने के लिए 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' और 'क्षमता संवर्धन' के तहत हासिल की गई प्रगति की व्यापक समीक्षा की गई।
  • एयर मार्शल ने अपने समापन भाषण में निरंतर विकास, नवाचार, स्वदेशीकरण और उन्नत तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स: मेंटेनेंस कमांड (Maintenance Command): भारतीय वायुसेना (IAF) की कुल 7 कमान हैं, जिनमें से 5 ऑपरेशनल (लड़ाकू) और 2 कार्यात्मक (Functional) कमान हैं। 'मेंटेनेंस कमांड' वायुसेना की एक कार्यात्मक कमान है, जिसका मुख्यालय नागपुर (महाराष्ट्र) के वायुसेना नगर में स्थित है। इसका मुख्य कार्य वायुसेना के सभी विमानों, रडारों और उपकरणों का रखरखाव, मरम्मत और अपग्रेडेशन सुनिश्चित करना है। दूसरी कार्यात्मक कमान 'प्रशिक्षण कमान' (Training Command) है, जो बेंगलुरु में है।

स्वदेशी 'अस्त्र-एमके1' (Astra-Mk1) मिसाइल का सफल परीक्षण

अस्त्र मिसाइल की मारक क्षमता और वायुसेना की ताकत

  • भारतीय वायुसेना ने स्वदेशी रूप से विकसित 'अस्त्र-एमके1' (Astra-Mk1) हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल का सुखोई-30 एमकेआई (Su-30 MKI) लड़ाकू विमान से सफल परीक्षण किया है।
  • यह एक 'बियॉन्ड विजुअल रेंज' (BVR - Beyond Visual Range) मिसाइल है, यानी यह पायलट की आंखों की दृश्य सीमा से बहुत दूर (लगभग 100 किमी से अधिक दूरी पर) स्थित दुश्मन के विमानों या ड्रोन्स को अचूक निशाना बना सकती है।
  • इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा पूर्णतः स्वदेशी तकनीक से डिजाइन और विकसित किया गया है।
  • इस सफल परीक्षण से भारतीय वायुसेना की हवाई मारक क्षमता और आकाशीय युद्ध (Dogfight) में बढ़त सुनिश्चित हुई है, जिससे विदेशी मिसाइलों पर भारत की निर्भरता कम होगी।
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DEOrbit Exam Note: DRDO और IGMDP: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की स्थापना 1958 में की गई थी (मुख्यालय: नई दिल्ली)। भारत को मिसाइल तकनीक में आत्मनिर्भर बनाने के लिए 1983 में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नेतृत्व में 'एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम' (IGMDP) शुरू किया गया था। इसके तहत 'PATNA' (पृथ्वी, अग्नि, त्रिशूल, नाग, आकाश) मिसाइलें विकसित की गई थीं। 'अस्त्र' मिसाइल इसी स्वदेशी तकनीकी क्षमता का एक उन्नत रूप है।

DRDO ने नौसेना के लिए केरल में लॉन्च किया अत्याधुनिक 'SPACE' सेंटर

'SPACE' (सबमर्सिबल प्लेटफॉर्म) और NPOL की भूमिका

  • रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने केरल के कुलमावु (इडुक्की) में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की एक अत्याधुनिक परीक्षण सुविधा का उद्घाटन किया।
  • इस सुविधा का नाम 'SPACE' (सबमर्सिबल प्लेटफॉर्म फॉर अकॉस्टिक कैरेक्टराइजेशन एंड इवैल्यूएशन) रखा गया है।
  • इसे DRDO की एक प्रमुख नौसेना प्रयोगशाला 'नेवल फिजिकल एंड ओशनोग्राफिक लेबोरेटरी' (NPOL) द्वारा स्थापित किया गया है।
  • उपयोग: यह जहाजों, पनडुब्बियों और हेलीकॉप्टरों पर तैनात किए जाने वाले 'सोनार सिस्टम' (Sonar Systems) के परीक्षण और मूल्यांकन के लिए एक विश्व स्तरीय हब के रूप में कार्य करेगा।
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DEOrbit Exam Note: सोनार (SONAR) और NPOL: SONAR का पूर्ण रूप 'Sound Navigation and Ranging' है। यह पानी के नीचे वस्तुओं का पता लगाने और संचार करने के लिए ध्वनि तरंगों (Acoustic waves) का उपयोग करता है। कोच्चि (केरल) में स्थित NPOL प्रयोगशाला भारतीय नौसेना के लिए पानी के नीचे निगरानी (Underwater surveillance) और सोनार प्रौद्योगिकियों के विकास में सबसे अग्रणी संस्थान है।

विशाखापत्तनम में नौसेना के लिए 'लार्ज कैविटेशन टनल' (LCT) की आधारशिला

NSTL में अत्याधुनिक परीक्षण सुविधा का शुभारंभ

  • रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 03 अप्रैल 2026 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में 'नौसेना विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला' (NSTL) में एक अत्याधुनिक 'लार्ज कैविटेशन टनल' (Large Cavitation Tunnel - LCT) की आधारशिला रखी।
  • NSTL, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की एक प्रमुख प्रयोगशाला है, जो भारतीय नौसेना के लिए अत्याधुनिक हथियार और प्रणालियां विकसित करती है।
  • यह टनल भारत को पनडुब्बियों और नौसैनिक जहाजों के डिजाइन और परीक्षण के मामले में पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है।

'लार्ज कैविटेशन टनल' (LCT) का महत्व और कार्यप्रणाली

  • कैविटेशन टनल क्या है?: यह एक प्रकार की हाइड्रोडायनामिक (Hydrodynamic) परीक्षण सुविधा है, जिसका उपयोग पानी के नीचे चलने वाले प्रोपेलर (Propellers) और पनडुब्बियों के डिजाइन का परीक्षण करने के लिए किया जाता है।
  • यह सुविधा भारत को नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों के लिए उन्नत 'प्रोपल्शन सिस्टम' (Propulsion Systems) को स्वदेशी रूप से विकसित करने में मदद करेगी।
  • इसके परीक्षणों से पनडुब्बियों से निकलने वाले शोर (Noise) को कम करने में मदद मिलेगी, जिससे उनकी 'स्टील्थ' (Stealth) क्षमता मजबूत होगी और वे दुश्मन के रडार और सोनार की पकड़ से बच सकेंगी।
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DEOrbit Exam Note: DRDO - NSTL (Naval Science and Technological Laboratory): NSTL की स्थापना 20 अगस्त 1969 को विशाखापत्तनम में की गई थी। यह प्रयोगशाला भारतीय नौसेना के लिए टॉरपीडो (Torpedoes), माइंस (Mines), डिकॉय (Decoys) और पानी के नीचे इस्तेमाल होने वाले हथियारों के अनुसंधान और विकास के लिए जिम्मेदार है। पनडुब्बियों को शांत (Silent) और अदृश्य रखने में इन 'हाइड्रोडायनामिक' परीक्षणों की ही सबसे बड़ी भूमिका होती है।

भारतीय तटरक्षक बल के उन्नत 'एफपीवी-4' (FPV-4) जहाज़ की आधारशिला रखी गई

'14 एफपीवी परियोजना' (14 FPV Project) और एमडीएल (MDL) की भूमिका

  • रक्षा मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार, भारतीय तटरक्षक बल (ICG) की '14 एफपीवी परियोजना' (यार्ड 16501-14) के अंतर्गत 4 तेज़ गति वाले गश्ती जहाज़ (FPV-4, यार्ड 16504) के निर्माण की आधारशिला रखी गई है।
  • इसके साथ ही, इसी वृहद रक्षा परियोजना के तहत एक अन्य जहाज़ 'एफपीवी-7' (यार्ड 16507) की प्लेट कटाई (Plate Cutting) का महत्वपूर्ण प्रारंभिक समारोह भी सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
  • इन दोनों उन्नत गश्ती जहाज़ों के निर्माण से संबंधित यह ऐतिहासिक समारोह 6 अप्रैल 2026 को देश के प्रमुख रक्षा शिपयार्ड 'मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड' (MDL), मुंबई में आयोजित किया गया था।
  • इन फास्ट पेट्रोल वेसल्स (FPVs) का मुख्य सामरिक उद्देश्य देश की तटीय सुरक्षा (Coastal Security) को अभेद्य बनाना और समुद्री सीमाओं में कानून प्रवर्तन कार्यों (Law enforcement operations) को प्रभावी ढंग से अंजाम देना है।

तकनीकी विशेषताएँ: एआई (AI) आधारित रखरखाव और 340 टन विस्थापन

  • इन एफपीवी (FPVs) को पूरी तरह से अत्याधुनिक मशीनरी से सुसज्जित किया जा रहा है, जिसमें भविष्य की तकनीकी जरूरतों को देखते हुए 'एआई (AI) आधारित पूर्वानुमानित रखरखाव प्रणाली' (Predictive Maintenance System) को शामिल किया गया है।
  • समुद्री निगरानी, खोज और बचाव अभियानों को अधिक सघन बनाने के लिए इन जहाज़ों में विशेष रूप से बहुउद्देश्यीय ड्रोन (Multipurpose Drones) भी तैनात किए गए हैं।
  • 'आत्मनिर्भर भारत' की परिकल्पना को साकार करते हुए इनमें उच्च गुणवत्ता वाले स्वदेशी घटकों का उपयोग किया गया है, जिनमें मैसूर की 'त्रिवेणी कंपनी' द्वारा निर्मित गियर बॉक्स और 'एमजेपी इंडिया' (MJP India) द्वारा निर्मित वाटर जेट प्रमुख हैं।
  • अपनी श्रेणी में बेहद शक्तिशाली माने जाने वाले ये जहाज़ लगभग 340 टन विस्थापन (Displacement) क्षमता के हैं और उन्नत वाटर जेट (Water Jet) तकनीक से संचालित होते हैं, जो इन्हें समुद्र में अद्वितीय गति और पैंतरेबाज़ी की क्षमता प्रदान करते हैं।
  • रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन स्वदेशी गश्ती जहाज़ों के बेड़े में शामिल होने से रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील 'हिंद महासागर क्षेत्र' (Indian Ocean Region - IOR) में भारतीय तटरक्षक बल की उपस्थिति और समुद्री मारक क्षमता में भारी वृद्धि सुनिश्चित होगी।
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DEOrbit Exam Note: भारतीय तटरक्षक बल (ICG) और एमडीएल (MDL): भारतीय तटरक्षक बल की स्थापना रुस्तमजी समिति (Rustomji Committee) की सिफारिशों के आधार पर 1 फरवरी 1977 को (औपचारिक रूप से 'तटरक्षक अधिनियम 1978' के तहत) की गई थी। यह बल रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। इसका आदर्श वाक्य "वयम् रक्षामः" (हम रक्षा करते हैं) है। दूसरी ओर, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) मुंबई में स्थित भारत का एक प्रमुख शिपयार्ड है (जिसे 'भारत का प्रमुख शिपयार्ड' भी कहा जाता है), जो भारतीय नौसेना के 'प्रोजेक्ट 75' (स्कॉर्पीन क्लास पनडुब्बियां) और 'प्रोजेक्ट 15B' (विशाखापत्तनम क्लास डिस्ट्रॉयर) जैसे देश के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण नौसैनिक प्रोजेक्ट्स के निर्माण के लिए विख्यात है।

भारत-उज़्बेकिस्तान संयुक्त सैन्य अभ्यास 'दुस्तलिक' (DUSTLIK) का 7वां संस्करण

भारतीय सशस्त्र बलों की 60 सदस्यीय टुकड़ी उज़्बेकिस्तान के लिए रवाना

  • भारतीय सेना और वायुसेना की एक संयुक्त टुकड़ी 12 से 25 अप्रैल 2026 तक आयोजित होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास 'दुस्तलिक' (Dustlik) के 7वें संस्करण में भाग लेने के लिए रवाना हो गई है।
  • इस वर्ष यह अभ्यास उज़्बेकिस्तान के नामंगन (Namangan) स्थित 'गुरुमसरराय फील्ड ट्रेनिंग एरिया' में आयोजित किया जा रहा है।
  • भारतीय टुकड़ी में कुल 60 जवान शामिल हैं, जिनमें 45 थल सेना (मुख्यतः महार रेजिमेंट से) और 15 वायु सेना के जवान हैं।
  • इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य अर्ध-पहाड़ी इलाकों में संयुक्त अभियानों को अंजाम देने के लिए दोनों देशों की सेनाओं के बीच सैन्य सहयोग और संयुक्त क्षमताओं को बढ़ाना है।
  • अभ्यास का समापन 48 घंटे के कड़े सत्यापन (Validation) अभ्यास के साथ होगा, जिसका उद्देश्य गैरकानूनी सशस्त्र समूहों को निष्क्रिय करने के लिए सामरिक ऑपरेशन्स का परीक्षण करना है।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स: अभ्यास 'दुस्तलिक': यह भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच एक वार्षिक द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास है, जिसे दोनों देशों में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है। इसका पिछला (छठा) संस्करण अप्रैल 2025 में भारत के औंध (पुणे) स्थित 'फॉरेन ट्रेनिंग नोड' में आयोजित किया गया था। यह अभ्यास दोनों मित्र राष्ट्रों के बीच अंतर-संचालनीयता (Interoperability) और रक्षा सहयोग को और मजबूत करता है।

नई दिल्ली में भारतीय नौसेना 'कमांडर्स सम्मेलन 2026' का आयोजन

'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद नौसेना की परिचालन तैयारियों की होगी व्यापक समीक्षा

  • भारतीय नौसेना के छमाही 'कमांडर्स सम्मेलन 2026' का पहला संस्करण 14 से 16 अप्रैल 2026 तक नौसेना भवन, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।
  • यह सर्वोच्च स्तरीय सम्मेलन राष्ट्रीय समुद्री हितों की रक्षा और क्षमता विकास के लिए नौसेना की परिचालन स्थिति की व्यापक समीक्षा का मंच प्रदान करता है।
  • सम्मेलन में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत त्वरित नौसैनिक तैनाती और हिंद महासागर क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय बलों की उपस्थिति पर विशेष चर्चा होगी।
  • इस दौरान 'चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ' (CDS) और 'गृह सचिव' के संबोधन भी होंगे, जिसका उद्देश्य अंतर-संचालनीयता और 'संयुक्तता' (Jointness) को बढ़ाना है।
  • सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) रोडमैप, मानवरहित प्रणालियों (Unmanned systems) और डेटा-संचालित प्रौद्योगिकियों के उपयोग की समीक्षा भी की जाएगी।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स: 'महासागर' (SAGAR) विजन: भारत सरकार के 'क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए पारस्परिक और समग्र विकास' (SAGAR) दृष्टिकोण के अनुरूप, इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारतीय नौसेना को हिंद महासागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में 'वरीयता प्राप्त सुरक्षा भागीदार' (Preferred Security Partner) के रूप में स्थापित करना है।

HAL ने तटरक्षक बल को सौंपे 4 'ALH Mk III' हेलीकॉप्टर

स्वदेशी 'मैरीटाइम रोल' वेरिएंट, रात में ऑपरेशन की क्षमता

  • हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने भारतीय तटरक्षक बल (ICG) को 4 हल्के हेलीकॉप्टर 'ALH Mk III' (मैरीटाइम रोल वेरिएंट) सौंपे हैं।
  • ये पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बने हैं और इनमें शक्तिशाली 'शक्ति-1H' टर्बोशाफ्ट इंजन लगा है।
  • इनमें ग्लास कॉकपिट और रात में ऑपरेशन (Night Ops) करने की उन्नत क्षमता है। (ICG का मोटो 'वयम् रक्षामः' है)।

'आईओएस सागर' पोत थाईलैंड के फुकेट पहुंचा

'सागर' विजन और 'IONS' की अध्यक्षता के तहत बहुराष्ट्रीय नौसैन्य मिशन

  • हिंद महासागर पोत (IOS) 'सागर' मालदीव के माले से प्रस्थान के बाद 14 अप्रैल 2026 को थाईलैंड के फुकेट (Phuket) पहुंच गया है।
  • यह आईओएस सागर और आईएनएस सुनयना का 'सागर' (SAGAR) विजन के तहत चल रहे मिशन का दूसरा पड़ाव है।
  • मार्च 2026 में शुरू हुआ यह मिशन 'हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी' (IONS) के अध्यक्ष के रूप में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को दर्शाता है।
  • फुकेट में यह प्रवास थाई नव वर्ष 'सोंगक्रान' (Songkran) उत्सव के अवसर पर हो रहा है, जहाँ रॉयल थाई नौसेना (RTN) के साथ पेशेवर, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
  • इस मिशन को रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने 2 अप्रैल 2026 को मुंबई से हरी झंडी दिखाई थी, जिसमें 16 मित्र देशों (FC) के नौसैनिक सवार हैं।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स: मिशन के प्रमुख पड़ाव: भारत की 'एक महासागर, एक मिशन' की परिकल्पना को मूर्त रूप देने वाला यह अंतर्राष्ट्रीय दल माले और फुकेट के बाद जकार्ता, सिंगापुर, यांगून, चटगांव और कोलंबो बंदरगाहों का भी दौरा करेगा। माले से पारगमन के दौरान इस दल ने नौवहन और नौसैनिक युद्धाभ्यासों में भाग लिया, जो क्षमता विकास के प्रति भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

नई दिल्ली के 'नौसेना भवन' में प्रथम नौसेना कमांडर सम्मेलन 2026 शुरू

नौसेना प्रमुख ने किया उद्घाटन, CDS ने भविष्य के युद्धों पर किया मंथन

  • प्रथम भारतीय नौसेना कमांडर सम्मेलन 2026 का शुभारंभ 14 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली स्थित 'नौसेना भवन' में हुआ।
  • इस सर्वोच्च स्तरीय सम्मेलन का उद्घाटन नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने किया।
  • नौसेना प्रमुख ने पश्चिम एशिया के संघर्ष, भारत की ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री हितों की रक्षा पर जोर देते हुए उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने का आह्वान किया।
  • चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने भू-राजनीतिक उथल-पुथल और भविष्य के युद्धों में आर्थिक व तकनीकी घटकों को शामिल कर योजना बनाने का आग्रह किया।
  • सम्मेलन में क्षमता संवर्धन, बहु-क्षेत्रीय युद्ध पद्धतियों, स्वदेशीकरण और मित्र देशों के साथ बहुपक्षीय अभ्यासों पर विस्तृत चर्चा की गई।

नौकायन प्रशिक्षण पोत 'आईएनएस सुदर्शिनी' मोरक्को के कैसाब्लांका पहुंचा

'लोकायन 26' मिशन और 'महासागर' (MAHASAGAR) विजन का हिस्सा

  • भारतीय नौसेना का प्रतिष्ठित नौकायन प्रशिक्षण पोत 'आईएनएस सुदर्शिनी' 15 अप्रैल 2026 को मोरक्को के प्रमुख बंदरगाह कैसाब्लांका (Casablanca) पहुँच गया है।
  • यह यात्रा भारतीय नौसेना के ट्रांस-ओशनिक (महासागरीय) मिशन 'लोकायन 26' का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • जहाज का आगमन भारत की 'महासागर' (MAHASAGAR) परिकल्पना के अनुरूप समुद्री जुड़ाव और द्विपक्षीय कूटनीतिक संबंधों को दर्शाता है।
  • कैसाब्लांका में जहाज के कमांडिंग ऑफिसर ने मोरक्को नौसेना के 'सेंट्रल मैरीटाइम सेक्टर' के कमांडर कमोडोर हसन अकुती और 'रॉयल नेवल स्कूल' के निदेशक कमोडोर उमर नस्करी से शिष्टाचार भेंट की।
  • तीन दिवसीय इस यात्रा के दौरान चालक दल रॉयल मोरक्कन नौसेना के साथ पेशेवर और सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लेगा, जो भारत की 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना को रेखांकित करता है।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स: भारत-मोरक्को नौसैन्य संबंध: पिछले एक वर्ष में भारतीय नौसेना के चार प्रमुख जहाजों— आईएनएस तबर, आईएनएस तरकश, आईएनएस सुमेधा और आईएनएस सुशील— ने कैसाब्लांका का दौरा किया है। इसके अतिरिक्त, नवंबर 2025 में रॉयल मोरक्कन नेवी के इंस्पेक्टर रियर एडमिरल मोहम्मद ताहिन ने भी भारत का महत्वपूर्ण दौरा किया था।

सौर तूफ़ान का प्रभाव और सौर स्टॉर्म

सौर तूफ़ान और उसका पृथ्वी पर प्रभाव

  • सौर तूफ़ान सूर्य पर होने वाला एक विस्फोट है जो ऊर्जा, गैस, और चुंबकीकृत प्लाज़्मा अंतरिक्ष में फैलाता है।
  • यह पृथ्वी के वायुमंडल पर असर डाल सकते हैं, जिससे रेडियो संप्रेषण और GPS सिस्टम प्रभावित हो सकते हैं।
  • सौर तूफ़ान का कारण कोरोनल मास इजेक्शन (CME) होता है, जो प्लाज़्मा को सूर्य के वातावरण से निकालता है।
  • यह पृथ्वी तक 15-18 घंटे में पहुंच सकते हैं, जिससे इलेक्ट्रिकल ग्रिड्स बाधित हो सकते हैं।
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DEOrbit Exam Note: सौर तूफ़ान का अध्ययन वैज्ञानिकों को सूर्य के व्यवहार और उसकी गतिविधियों को समझने में मदद करता है। यह ज्ञान अंतरिक्ष यात्रा और संचार प्रणालियों के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

केसलर सिंड्रोम (Kessler Syndrome)

अर्थ: अंतरिक्ष कचरे (Space Debris) से उत्पन्न होने वाली खतरनाक 'चेन रिएक्शन'

  • परिभाषा: 'केसलर सिंड्रोम' अंतरिक्ष में बढ़ते 'स्पेस डेब्रीस' (अंतरिक्ष कचरे) से पैदा होने वाली एक अत्यंत खतरनाक स्थिति है।
  • जब पृथ्वी की कक्षा में बेकार उपग्रहों और रॉकेटों के टुकड़े बहुत अधिक हो जाते हैं, तो वे आपस में टकराने लगते हैं। यह टकराव एक चेन रिएक्शन (Chain Reaction) का रूप ले लेता है।
  • एक टक्कर से निकले सैकड़ों टुकड़े अन्य सैटेलाइट्स से टकराते हैं, जिससे कचरा लगातार बढ़ता जाता है। इससे भविष्य में अंतरिक्ष में नए सैटेलाइट भेजना लगभग असंभव हो सकता है।
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DEOrbit Exam Note: इसरो और अंतरिक्ष कचरा: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में अंतरिक्ष में 4,600 से ज्यादा ऐसी बेकार वस्तुएं (कचरा) पृथ्वी की कक्षा में घूम रही हैं, जो भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती हैं।

'क्लाउड मायथोस' (Claude Mythos)

एंथ्रोपिक (Anthropic) कंपनी का उन्नत AI मॉडल

  • 'क्लाउड मायथोस' एंथ्रोपिक कंपनी द्वारा विकसित एक उन्नत AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) मॉडल है।
  • यह कंप्यूटर सिस्टम की सुरक्षा जांच करने वाले एक स्मार्ट 'स्कैनर' की तरह काम करता है, जो सॉफ्टवेयर में छिपी सुरक्षा खामियों (Bugs) को आसानी से ढूंढ सकता है।
  • हाल ही में इस AI ने Linux और OpenBSD जैसे लोकप्रिय सॉफ्टवेयर में बड़ी खामियां खोजी हैं, जिन्हें इंसान लंबे समय तक नहीं पकड़ पाए थे।
  • भारतीय IT मंत्रालय और CERT-In इसकी क्षमताओं का गहराई से अध्ययन कर रहे हैं।

'लोइटरिंग म्यूनिशन' (Loitering Munition) या 'सुसाइड ड्रोन'

भारतीय सेना का स्वदेशी तकनीक के लिए रोडमैप

  • लोइटरिंग म्यूनिशन को आम भाषा में 'सुसाइड ड्रोन' (Suicide Drone) भी कहा जाता है।
  • यह एक ऐसा मानव रहित हवाई हथियार है जो काफी समय तक हवा में मंडराता (Loiter) रहता है और तुरंत हमला नहीं करता।
  • इसकी खासियत यह है कि यह पहले अपने लक्ष्य की तलाश करता है और जैसे ही सही निशाना मिलता है, यह सीधे उससे टकराकर विस्फोट कर देता है (स्वयं नष्ट हो जाता है)।
  • हाल ही में भारतीय सेना ने देश में ही ऐसे उन्नत ड्रोन विकसित करने के लिए एक 'टेक्नोलॉजी रोडमैप' पेश किया है।
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DEOrbit Exam Note: आधुनिक युद्ध प्रणाली में इन ड्रोन्स का व्यापक उपयोग हो रहा है। ईरान निर्मित 'शहीद-136' (Shahed-136) और इजराइल निर्मित 'हरोप' (Harop) विश्व के कुछ सबसे प्रसिद्ध लोइटरिंग म्यूनिशन के उदाहरण हैं।

आईएनएस सुदर्शिनी की मोरक्को यात्रा: 'लोकयान 26' तैनाती

द्विपक्षीय समुद्री सहयोग एवं प्रशिक्षण

  • भारतीय नौसेना के सेल प्रशिक्षण पोत, आईएनएस सुदर्शिनी ने 18 अप्रैल 2026 को मोरक्को के कैसाब्लांका बंदरगाह की अपनी सफल यात्रा संपन्न की।
  • यह यात्रा मौजूदा 'लोकयान 26' तैनाती का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारत और मोरक्को के बीच समुद्री साझेदारी को सुदृढ़ करना है।
  • कैसाब्लांका में प्रवास के दौरान भारतीय नौसेना के प्रशिक्षुओं ने 'रॉयल मोरक्कन नेवल स्कूल' के कैडेटों के साथ पेशेवर बातचीत, प्रशिक्षण आदान-प्रदान और मैत्रीपूर्ण खेल प्रतियोगिताओं में भाग लिया।
  • यात्रा के दौरान साझा समुद्री हितों और रणनीतिक तालमेल पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसके बाद पोत अब स्पेन के लास पालमास के लिए रवाना हो गया है।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स: * आईएनएस सुदर्शिनी: यह भारतीय नौसेना का एक 'तीन-मास्ट' वाला पाल प्रशिक्षण पोत (Sail Training Ship) है, जिसका निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा किया गया है। * प्रशिक्षण उद्देश्य: इस तरह की यात्राएं भविष्य के नौसेना अधिकारियों को समुद्र की कठिन परिस्थितियों का अनुभव करने और 'वसुधैव कुटुंबकम' के वैश्विक संदेश को प्रसारित करने का अवसर प्रदान करती हैं।

डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट (DSC A-23): नौसेना में शामिल

स्वदेशी निर्माण एवं समुद्री क्षमता

  • भारतीय नौसेना के 'डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट' (DSC) परियोजना के पांच जहाजों में से चौथे जहाज 'डीएससी ए-23 (यार्ड 328)' को 19 अप्रैल 2026 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित टीटागढ़ में नौसेना बेड़े में शामिल किया गया।
  • इस जहाज का निर्माण मेसर्स टीटागढ़ नेवल सिस्टम्स लिमिटेड (TNSL), कोलकाता द्वारा स्वदेशी रूप से किया गया है।
  • यह 30 मीटर लंबा कैटामरान-पतवार (Catamaran-hull) आकार का जहाज है, जिसकी विस्थापन क्षमता लगभग 380 टन है।
  • यह विशेष रूप से बंदरगाहों और तटीय जल में गोताखोरी अभियानों, जलमग्न निरीक्षण, और बचाव कार्यों में नौसेना की परिचालन क्षमता को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • इन जहाजों के मुख्य और सहायक उपकरणों का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा स्वदेशी तौर पर निर्मित है, जो रक्षा मंत्रालय की 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' पहल का एक गौरवशाली प्रतीक है।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स: * कैटामरान (Catamaran) डिज़ाइन: यह एक विशेष प्रकार का डिज़ाइन होता है जो जहाज को समुद्र में बेहतर स्थिरता, विस्तारित डेक क्षेत्र और उन्नत समुद्री संचालन सुविधा प्रदान करता है, जो गोताखोरी अभियानों के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है। * परीक्षण: इस पोत का विशाखापत्तनम स्थित नौसेना विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला (NSTL) में व्यापक मॉडल परीक्षण और हाइड्रोडायनामिक विश्लेषण (दबाव-वेग, जहाज का प्रतिरोध, समुद्री स्थिरता आदि) किया गया है।

टी-72 और टी-90 टैंकों के लिए ट्रॉल असेंबली अनुबंध

भारतीय सेना की 'माइन ब्रीचिंग' क्षमता का सुदृढ़ीकरण

  • रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना की बारूदी सुरंग भेदने (Mine Breaching) की क्षमता बढ़ाने के लिए लगभग 975 करोड़ रुपये के ट्रॉल असेंबली खरीद अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • यह अनुबंध 21 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) और इलेक्ट्रो-न्यूमेटिक्स एंड हाइड्रोलिक्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के साथ किया गया।
  • टी-72/टी-90 टैंकों के लिए इस्तेमाल होने वाली यह ट्रॉल असेंबली रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित की गई है।
  • यह उपकरण 'प्रोक्सिमिटी मैग्नेटिक फ्यूज' वाली एंटी-टैंक माइन्स (बारूदी सुरंगों) से भरे क्षेत्रों में सैन्य वाहनों के गुजरने के लिए सुरक्षित मार्ग बनाने का महत्वपूर्ण कार्य करेगा।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स: * Buy (Indian-IDDM) श्रेणी: यह खरीद अनुबंध रक्षा अधिग्रहण की 'बाय (इंडियन-आईडीडीएम)' यानी स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित (Indigenously Designed, Developed and Manufactured) श्रेणी के अंतर्गत आता है। * यह परियोजना भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के साथ-साथ एमएसएमई (MSME) सेक्टर की भागीदारी और रोजगार सृजन को भी प्रोत्साहित करेगी।

⚓ 'इन-एसएलएन डाइवएक्स 2026': आईएनएस निरीक्षक का श्रीलंका दौरा

नौसैनिक अभ्यास एवं 'आरोग्य मैत्री' पहल

  • भारतीय नौसेना का गोताखोरी सहायता और पनडुब्बी बचाव पोत, आईएनएस निरीक्षक (INS Nireekshak) 21 अप्रैल 2026 को श्रीलंका के कोलंबो बंदरगाह पहुंचा।
  • यह पोत 21 से 27 अप्रैल 2026 तक चलने वाले भारत-श्रीलंका द्विपक्षीय गोताखोरी अभ्यास 'इन-एसएलएन डाइवएक्स 2026' (IN-SLN DIVEEX 2026) के चौथे संस्करण में भाग ले रहा है।
  • भारत सरकार की 'आरोग्य मैत्री' पहल के तहत, भारतीय नौसेना श्रीलंकाई अधिकारियों को दो 'मैत्री भीष्म क्यूब' (Maitri Bhishma Cubes) भेंट करेगी।
  • समुद्री सुरक्षा सहयोग को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से भारत द्वारा श्रीलंकाई नौसेना को 9 मिमी गोला-बारूद के 50,000 राउंड भी सौंपे जाएंगे।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स: * मैत्री भीष्म क्यूब: ये अत्याधुनिक पोर्टेबल चिकित्सा इकाइयां हैं जो एक साथ 200 आपातकालीन मामलों को संभालने में सक्षम हैं। इनमें त्वरित प्रतिक्रिया के लिए बुनियादी जांच और शल्य चिकित्सा (Surgical) उपकरण मौजूद होते हैं। * 'सागर' विजन (SAGAR): यह अभ्यास हिंद महासागर क्षेत्र में 'सागर' (Security and Growth for All in the Region / क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) की परिकल्पना के अनुरूप भारत की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।

नौसेना असैन्य समारोह 2026: असैन्य कर्मियों की भूमिका का सम्मान

समारोह के मुख्य बिंदु और नई पहल

  • रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने 23 अप्रैल, 2026 को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित भारतीय नौसेना के 'नौसेना असैन्य समारोह' (Naval Civilian Function) में भाग लिया।
  • संबोधन के दौरान उन्होंने नौसेना के असैन्य कर्मियों को भारतीय नौसेना की "नींव का पत्थर" बताया और उनकी अटूट निष्ठा व कार्य कुशलता की सराहना की।
  • इस अवसर पर आईगॉट (iGOT) कर्मयोगी प्लेटफॉर्म, 'सक्षम' (SAKSHAM - NLCMS 2.0) कार्यक्रम और 'नव्यस्य' (NAVASYA) पहल का औपचारिक उद्घाटन किया गया।
  • असैन्य कर्मियों की आधिकारिक ड्यूटी पर हवाई और रेल यात्रा की सुविधा के लिए 'रक्षा यात्रा प्रणाली' (DTA) के कार्यान्वयन पर विशेष जोर दिया गया।
  • समारोह के दौरान 'इन नेवल सिविलियन' पत्रिका का 9वां संस्करण भी जारी किया गया, जिसमें उत्कृष्ट उपलब्धियों और ज्ञानवर्धक लेखों को प्रदर्शित किया गया है।

नौसेना प्रमुख का संबोधन और सम्मान

  • नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने ऑपरेशन सिंधुदुर्ग, अंतर्राष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू (IFR), मिलन (MILAN) और हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (IONS) जैसे प्रमुख आयोजनों में असैन्य कर्मियों की तकनीकी सहायता और महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
  • उन्होंने जोर देकर कहा कि नौसेना की असली ताकत उसके मानव संसाधनों में निहित है।
  • समारोह के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले नौसेना असैन्य कर्मियों को प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
DEOrbit परीक्षा नोट्स: नौसेना में असैन्य कर्मी (Naval Civilians) युद्धपोतों और पनडुब्बियों के तकनीकी रखरखाव से लेकर रसद आपूर्ति तक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके कौशल विकास और कल्याण के लिए शुरू की गई 'सक्षम' (NLCMS 2.0) और 'नव्यस्य' जैसी पहलें रक्षा मंत्रालय के ई-गवर्नेंस और प्रशासनिक सुधारों का हिस्सा हैं।

आईएनएस सुदर्शिनी: पहली बार स्पेन के लास पामास पहुंची

कैनरी द्वीप समूह की ऐतिहासिक यात्रा

  • भारतीय नौसेना का प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी 'लोकायन 26' (Lokayan 26) के तहत अपनी समुद्री यात्रा के हिस्से के रूप में 23 अप्रैल 2026 को स्पेन के लास पामास (Las Palmas) पहुँचा।
  • यह किसी भी भारतीय नौसैनिक पोत की कैनरी द्वीप समूह (Canary Islands) की पहली यात्रा है, जो इसे ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।
  • जनवरी 2026 में कोच्चि से रवाना होने के बाद, यह पोत 'वसुधैव कुटुंबकम' का संदेश देते हुए ओमान, मिस्र, माल्टा, फ्रांस और मोरक्को के बंदरगाहों का दौरा कर चुका है।

रणनीतिक महत्व और भावी योजनाएं

  • यह पड़ाव इस पोत की महत्वाकांक्षी अटलांटिक पार (Trans-Atlantic) समुद्री यात्रा पर निकलने से पहले एक महत्वपूर्ण रणनीतिक विराम (Strategic Halt) का काम करता है।
  • आगे चलकर, यह जहाज संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के 250वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के हिस्से के रूप में विभिन्न अमेरिकी बंदरगाहों पर आयोजित होने वाले 'सेल 250' (Sail 250) स्मारक कार्यक्रमों में भाग लेगा।
  • लास पामास प्रवास के दौरान, पोत के कमांडिंग ऑफिसर स्पेनिश नौसेना अधिकारियों के साथ वार्ता करेंगे और जन-संपर्क को मजबूत करने के लिए जहाज को स्थानीय स्पेनिश समुदाय तथा भारतीय प्रवासियों के लिए खोला जाएगा।
DEOrbit परीक्षा नोट्स: आईएनएस सुदर्शिनी (INS Sudarshini) भारतीय नौसेना का एक पाल-प्रशिक्षण पोत (Sail Training Ship) है। कैनरी द्वीप समूह अफ्रीका के उत्तर-पश्चिमी तट के पास स्थित एक स्पेनिश द्वीपसमूह है, जो अटलांटिक महासागर को पार करने वाले जहाजों के लिए ऐतिहासिक रूप से एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट पॉइंट (Transit Point) रहा है।

डीआरडीओ (DRDO): उन्नत बख्तरबंद वाहनों (ट्रैक्ड और व्हील्ड) का अनावरण

डिजाइन, विकास और अनावरण

  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने 25 अप्रैल 2026 को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में उन्नत बख्तरबंद वाहनों (ट्रैक्ड और व्हील्ड) का अनावरण किया।
  • इन अत्याधुनिक वाहनों को व्हीकल्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (VRDE) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है।
  • इन वाहनों का निर्माण दो प्रमुख औद्योगिक साझेदारों- 'टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड' और 'भारत फोर्ज लिमिटेड' द्वारा किया गया है।
  • वर्तमान में इन वाहनों में स्वदेशी सामग्री की हिस्सेदारी लगभग 65 प्रतिशत है, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक ले जाने की योजना है, जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करेगा।

प्रमुख तकनीकी विशेषताएं और मारक क्षमता

  • ये दोनों उन्नत वाहन स्वदेशी रूप से विकसित 30 मिमी के 'क्रू-लेस टरेट' (Crewless Turret) से सुसज्जित हैं।
  • इनमें हाई-पावर इंजन और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन का समावेश किया गया है, जो उच्च पावर-टू-वेट अनुपात, बेहतर गति और कठिन बाधाओं को पार करने की क्षमता सुनिश्चित करते हैं।
  • सुरक्षा के दृष्टिकोण से, इनमें मॉड्यूलर ब्लास्ट और बैलिस्टिक प्रोटेक्शन प्रदान किया गया है, जो 'STANAG' लेवल 4 और 5 के मानकों के अनुरूप है।
  • ये वाहन हाइड्रो जेट प्रणाली से युक्त एम्फीबियस प्लेटफॉर्म हैं, जो इन्हें जल अवरोधों को आसानी से पार करने में सक्षम बनाते हैं।
  • मारक क्षमता को बढ़ाने के लिए, 30 मिमी टरेट को 7.62 मिमी पीकेटी (PKT) गन के साथ एकीकृत किया गया है और इसे एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों के प्रक्षेपण के लिए भी कॉन्फ़िगर किया गया है।
DEOrbit परीक्षा नोट्स: इन उन्नत वाहनों में दिया गया 'एम्फीबियस' (Amphibious) फीचर इन्हें जमीन के साथ-साथ पानी में भी सुगमता से चलने की क्षमता देता है। इसके अलावा 'क्रू-लेस टरेट' (Crewless Turret) तकनीक का अर्थ है कि वाहन के ऊपर लगी तोप या हथियार प्रणाली को वाहन के अंदर सुरक्षित बैठकर रिमोट से संचालित किया जा सकता है, जिससे सैनिकों की जान का जोखिम कम होता है।

आईएनएस सुनयना (IOS सागर): सिंगापुर के चांगी नौसैनिक अड्डे पर आगमन

यात्रा का उद्देश्य और प्रमुख बिंदु

  • हिंद महासागर पोत (आईओएस सागर) के रूप में तैनात भारतीय नौसेना का जहाज 'आईएनएस सुनयना' 26 अप्रैल 2026 को सिंगापुर के चांगी नौसेना अड्डे पर पहुंचा।
  • यह तैनाती भारत के 'सागर' (SAGAR - Security and Growth for All in the Region) विजन के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य महासागर क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास को बढ़ावा देना है।
  • इस पोत पर 16 मित्र विदेशी देशों (Friendly Foreign Countries - FFC) का एक बहुराष्ट्रीय दल सवार है।
  • सिंगापुर पहुंचने से पहले, यह पोत अपनी इस यात्रा के दौरान माले, फुकेत और जकार्ता के बंदरगाहों पर भी रुक चुका है, जिससे यह इसका 'चौथा पोर्ट कॉल' (Fourth Port Call) बन गया है।

प्रमुख गतिविधियां एवं कूटनीतिक संवाद

संबंधित व्यक्ति / गतिविधि विवरण एवं महत्व
डॉ. शिल्पक अंबुले सिंगापुर में भारत के उच्चायुक्त, जिन्होंने जहाज पर सवार चालक दल से बातचीत की और अंतर-संचालनीयता बढ़ाने में उनकी भूमिका की सराहना की।
क्रांजी युद्ध स्मारक आईएनएस सुनयना के कमान अधिकारी कमांडर सिद्धार्थ चौधरी ने यहां पुष्पांजलि अर्पित की।
सिंगापुर नौसेना (RSN) संवाद सिंगापुर गणराज्य नौसेना के 9वें फ्लोटिला के कमांडर कर्नल सुहाइमी मेंग सून के साथ समुद्री सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
संयुक्त दौड़ भारतीय प्रवासी समुदाय और चालक दल ने 'एक महासागर एक मिशन' विषय पर आधारित दौड़ में भाग लिया, जिसका उद्देश्य समुद्री जागरूकता बढ़ाना था।

पेशेवर आदान-प्रदान और वापसी

  • सिंगापुर नौसेना के साथ पेशेवर जुड़ाव के तहत आईओएस सागर के दल ने नेविगेशन और डैमेज कंट्रोल सिम्युलेटर, 'सूचना संलयन केंद्र' (Information Fusion Centre) और नौसेना संग्रहालय का दौरा किया।
  • यह पोत 29 अप्रैल 2026 को सिंगापुर से रवाना होगा, जो समुद्री सहयोग को मजबूत करने के अपने मिशन को आगे बढ़ाएगा।
DEOrbit परीक्षा नोट्स: भारत का 'सागर' (SAGAR - Security and Growth for All in the Region) विजन एक प्रमुख रणनीतिक पहल है, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करना है। 'आईएनएस सुनयना' पर 16 मित्र देशों के बहुराष्ट्रीय दल की उपस्थिति भारत की 'अंतर-संचालनीयता' (Interoperability) और सहयोगी समुद्री दृष्टिकोण का एक बेहतरीन उदाहरण है, जो क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को मजबूत करता है।


गूगल क्लाउड इंडिया एआई हब: विशाखापत्तनम बना 'एआई पटनम'

शिलान्यास और परियोजना का विवरण

  • केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) में 'गूगल क्लाउड इंडिया एआई हब' (Google Cloud India AI Hub) के शिलान्यास समारोह में भाग लिया।
  • यह मेगा परियोजना लगभग 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर के अनुमानित निवेश के साथ स्थापित की जा रही है।
  • इसे गूगल द्वारा 'अडानी कॉनेक्स' (AdaniConnex) और 'एयरटेल नेक्सट्रा' (Airtel Nxtra) के साथ एक रणनीतिक साझेदारी में विकसित किया जा रहा है।
  • आंध्र प्रदेश सरकार ने इस परियोजना के लिए कपुलुप्पाडा, भीमिली और अचुतापुरम क्षेत्रों में लगभग 300 एकड़ भूमि आवंटित की है।

परियोजना की प्रमुख विशेषताएं और अवसंरचना

अवसंरचना / पहल विवरण और सामरिक प्रभाव
हाइपरस्केल एआई डेटा सेंटर विशाखापत्तनम में 1 गीगावाट (1 Gigawatt) की क्षमता वाला एक विशाल हाइपरस्केल एआई डेटा सेंटर स्थापित किया जाएगा, जो भारत की एआई यात्रा में एक बड़ा मील का पत्थर है।
सबमरीन केबल नेटवर्क गूगल द्वारा विशाखापत्तनम से समुद्र के भीतर तीन नई केबल बिछाई जाएंगी, जो ओशिनिया, मध्य पूर्व, यूरोप, अफ्रीका और संयुक्त राज्य अमेरिका को जोड़कर वैश्विक डिजिटल मार्गों को मजबूत करेंगी।
'एआई पटनम' (AI City) का विकास अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे और वैश्विक निवेश के दम पर विशाखापत्तनम 'एआई पटनम' के रूप में उभर रहा है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, एयरोस्पेस और कृषि क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स और विनिर्माण परिदृश्य

  • भारत मोबाइल फोन के प्रमुख निर्यातक देशों में से एक बन गया है और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स की 50 प्रतिशत मांग अब स्थानीय उत्पादन से पूरी की जा रही है।
  • भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के तहत देश में वाणिज्यिक उत्पादन भी शुरू हो चुका है, जो इसे वैश्विक मूल्य श्रृंखला (Global Value Chain) का एक विश्वसनीय भागीदार बनाता है।
DEOrbit परीक्षा नोट्स: विशाखापत्तनम में 1 गीगावाट (Gigawatt) क्षमता के 'हाइपरस्केल एआई डेटा सेंटर' की स्थापना एक ऐतिहासिक कदम है। 1 गीगावाट बिजली की खपत करने वाला डेटा सेंटर दुनिया के सबसे बड़े डेटा केंद्रों की श्रेणी में आता है। यह न केवल भारी मात्रा में डेटा प्रोसेसिंग (AI Training & Inference) को सुगम बनाएगा, बल्कि विकसित भारत 2047 के लिए एक मजबूत 'डिजिटल नींव' भी तैयार करेगा और भारत को वैश्विक एआई अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए सशक्त करेगा।


डीआरडीओ और नौसेना: एनएएसएम-एसआर (NASM-SR) मिसाइल का पहला सैल्वो लॉन्च

सफल परीक्षण और मुख्य विशेषताएं

  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय नौसेना ने ओडिशा में बंगाल की खाड़ी के तट पर नौसेना के हेलीकॉप्टर प्लेटफॉर्म से 'नौसेना की लघु दूरी की जहाज-रोधी मिसाइल' (NASM-SR) का सफलतापूर्वक पहला सैल्वो लॉन्च किया।
  • परीक्षण के दौरान, एक ही हेलीकॉप्टर से दो मिसाइलें त्वरित अंतराल (quick succession) में दागी गईं, जिससे यह इस उन्नत वायु-प्रक्षेपित जहाज-रोधी मिसाइल प्रणाली का पहला 'सैल्वो लॉन्च' बन गया।
  • चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) में तैनात विभिन्न रेंज ट्रैकिंग उपकरणों (जैसे रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम और टेलीमेट्री) के आंकड़ों के अनुसार परीक्षण के सभी उद्देश्य पूरी तरह से हासिल कर लिए गए।
  • इन मिसाइलों ने सैल्वो लॉन्च क्षमता के साथ-साथ 'जलरेखा को भेदने' (Sea-skimming) की क्षमता का भी सफल प्रदर्शन किया।

मिसाइल प्रणाली की तकनीकी विशेषताएं

तकनीकी विशेषता / प्रणाली संबंधित विवरण और उपकरण
प्रोपल्शन (Propulsion) यह मिसाइल सॉलिड प्रोपल्शन बूस्टर और लॉन्ग-बर्न सस्टेनर का उपयोग करती है।
नेविगेशन और मार्गदर्शन फाइबर-ऑप्टिक जाइरोस्कोप आधारित इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम, रेडियो-अल्टीमीटर और उन्नत नियंत्रण एवं मार्गदर्शन एल्गोरिदम का उपयोग किया गया है।
अन्य स्वदेशी उप-प्रणालियां सीकर, इंटीग्रेटेड एवियोनिक्स मॉड्यूल, उच्च-बैंडविड्थ टू-वे डेटा लिंक और जेट-वेन नियंत्रण जैसी सभी महत्वपूर्ण प्रणालियां डीआरडीओ द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित की गई हैं।

विकास और उत्पादन भागीदारी

  • इस मिसाइल प्रणाली को मुख्य रूप से 'इमारत अनुसंधान केन्द्र' (RCI), हैदराबाद द्वारा विकसित किया गया है।
  • इसके विकास में डीआरडीओ की अन्य प्रयोगशालाओं जैसे DRDL (हैदराबाद), HEMRL (पुणे), TBRL (चंडीगढ़) और ITR (चांदीपुर) ने भी महत्वपूर्ण सहयोग दिया है।
  • वर्तमान में इन मिसाइलों का उत्पादन 'विकास-सह-उत्पादन भागीदार' (DCPP) द्वारा अन्य भारतीय उद्योगों और स्टार्टअप की सहायता से किया जा रहा है।
DEOrbit परीक्षा नोट्स: रक्षा शब्दावली में 'सैल्वो लॉन्च' (Salvo Launch) का अर्थ है लक्ष्य पर प्रहार की संभावना को अधिकतम करने और दुश्मन के रक्षा तंत्र (जैसे रडार और इंटरसेप्टर) को चकमा देने के लिए त्वरित अंतराल में एक साथ कई हथियारों या मिसाइलों को दागना। इसके अतिरिक्त, 'जलरेखा भेदन' (Sea-skimming) एक ऐसी तकनीक है जिसमें एंटी-शिप मिसाइलें दुश्मन के रडार और इन्फ्रारेड डिटेक्शन से बचने के लिए समुद्र की सतह के बिल्कुल करीब उड़ान भरती हैं।


आईएन-एसएलएन डाइवैक्स 2026: भारत-श्रीलंका समुद्री सहयोग

अभ्यास का आयोजन और मुख्य गतिविधियां

  • भारत और श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय गोताखोरी अभ्यास 'आईएन-एसएलएन डाइवैक्स' (IN-SLN DIVEEX) का चौथा संस्करण 21 से 28 अप्रैल 2026 तक कोलंबो में आयोजित किया गया।
  • इस अभ्यास में भारतीय नौसेना के गोताखोरी सहायता और पनडुब्बी बचाव पोत आईएनएस निरीक्षक (INS Nireekshak) ने भाग लिया।
  • अभ्यास का मुख्य उद्देश्य जटिल जलमग्न अभियानों पर ध्यान केंद्रित करना और दोनों नौसेनाओं के बीच अंतर-संचालन (Interoperability) को मजबूत करना था।
  • एक प्रमुख उपलब्धि के रूप में दोनों नौसेनाओं के गोताखोरों ने 55 मीटर से अधिक की गहराई में सफलतापूर्वक मिश्रित गैस गोताखोरी (Mixed gas diving) की।

ऐतिहासिक महत्व और मानवीय कूटनीति

गतिविधि / पहल विवरण और सामरिक महत्व
द्वितीय विश्व युद्ध के जहाज कोलंबो तट पर द्वितीय विश्व युद्ध के जहाजों 'एसएस नोरविकेन' (SS Norviken) और 'एसएस फिडियास' (SS Phidias) के मलबे पर विशेष मिश्रित गैस गोताखोरी की गई।
आईपीकेएफ (IPKF) स्मारक आईएनएस निरीक्षक के कमांडिंग ऑफिसर ने श्रीलंका में भारतीय शांति सेना (IPKF) के अभियानों के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
'आरोग्य मैत्री' पहल (BHISHM) मानवीय सहयोग के तहत भारत ने भीष्म (BHISHM - भारत स्वास्थ्य पहल सहयोग, हित और मैत्री) क्यूब श्रीलंका को सौंपे, जिससे आपदा राहत और चिकित्सा तैयारियों को मजबूती मिलेगी।
DEOrbit परीक्षा नोट्स: यह द्विपक्षीय अभ्यास और 'आरोग्य मैत्री' जैसी मानवीय पहल भारत की 'सागर' (SAGAR - Security and Growth for All in the Region) परिकल्पना के बिल्कुल अनुरूप है। 'भीष्म क्यूब' (BHISHM Cube) एक स्वदेशी रूप से विकसित पोर्टेबल और मॉड्यूलर चिकित्सा सुविधा (अस्पताल) है, जिसे आपात स्थिति या आपदाओं के दौरान तुरंत एयरलिफ्ट कर तैनात किया जा सकता है, जो भारत की उन्नत आपदा राहत कूटनीति (Disaster Relief Diplomacy) का एक प्रमुख हिस्सा है।


भारतीय सेना का 'ऑपरेशन नेत्र 1.0': लेह में विशाल नेत्र शिविर

शिविर का आयोजन और चिकित्सा उपलब्धियां

  • भारतीय सेना ने नागरिक-सैन्य सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण पेश करते हुए 27 से 30 अप्रैल 2026 तक लेह के 153 जनरल अस्पताल में 'ऑपरेशन नेत्र 1.0' के तहत एक विशाल नेत्र शिविर का सफलतापूर्वक आयोजन किया।
  • इस शिविर का उद्घाटन 14 कोर के जीओसी (GOC), लेफ्टिनेंट जनरल हितेश भल्ला ने किया।
  • ब्रिगेडियर (डॉ.) संजय कुमार मिश्रा के नेतृत्व में सशस्त्र बलों के चिकित्सा दल ने लद्दाख के दूरस्थ क्षेत्रों (चुशुल, हानले, दुरबुक, न्योमा, जांस्कर आदि) के 950 रोगियों की जांच की।
  • चिकित्सकों ने 214 विशेष प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूरी कीं, जिनमें 197 जटिल मोतियाबिंद सर्जरी शामिल हैं, और 15 पूर्णतः दृष्टिबाधित रोगियों की दृष्टि वापस लौटाई।

तकनीकी नवाचार और सहयोगी प्रयास

पहल / सहयोग संबंधित विवरण और महत्व
ऑपरेशन नेत्र ऐप (App) 153 जनरल अस्पताल द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित इस ऐप का शुभारंभ किया गया। यह रिकॉर्ड के संपूर्ण डिजिटलीकरण और क्यूआर (QR) कोड आधारित पहचान के माध्यम से उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रोगी सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
भारतीय वायु सेना (IAF) भारतीय वायु सेना द्वारा उन्नत चिकित्सा उपकरणों को एयरलिफ्ट करके लेह पहुँचाया गया, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि उपचार का स्तर उच्चतम मानकों के अनुरूप हो।
राष्ट्रव्यापी अभियान यह शिविर उस बड़े राष्ट्रव्यापी अभियान का हिस्सा है जिसके तहत नवंबर 2025 से अब तक 2,500 से अधिक दृष्टि-बहाली सर्जरी की जा चुकी हैं (इससे पहले उधमपुर, देहरादून, जयपुर आदि में शिविर आयोजित हुए थे)।
DEOrbit परीक्षा नोट्स: इस शिविर का समापन लद्दाख के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना की उपस्थिति में हुआ। सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (AFMS) की महानिदेशक वाइस एडमिरल आरती सरीन के नेतृत्व में संचालित 'ऑपरेशन नेत्र 1.0', भारतीय सेना के 'राष्ट्र सर्वोपरि' (Nation First) के सिद्धांत की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि भौगोलिक बाधाओं के बावजूद कोई भी नागरिक आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहे।


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