Monday, 20 April 2026

निधन / श्रद्धांजलि

महान पार्श्व गायिका आशा भोसले का निधन, उपराष्ट्रपति ने व्यक्त किया शोक

भारतीय संगीत जगत को अपूरणीय क्षति, बहुमुखी आवाज के लिए थीं विख्यात

  • भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने 12 अप्रैल 2026 को प्रसिद्ध गायिका आशा भोसले के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
  • उपराष्ट्रपति ने अपने शोक संदेश में कहा कि आशा जी अपनी बहुमुखी आवाज से विभिन्न संगीत शैलियों में सहजता से गा पाईं और भारतीय संगीत पर एक अमिट छाप छोड़ी।
  • उन्होंने भावपूर्ण ग़ज़लों से लेकर पारंपरिक भजनों तक में महारत हासिल की थी।
  • उनकी बेमिसाल आवाज और संगीत की विरासत लाखों लोगों के दिलों में गूंजती रहेगी और आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स: आशा भोसले: भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे महान और प्रभावशाली पार्श्व गायिकाओं में से एक मानी जाती थीं। उन्हें उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा वर्ष 2000 में सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान 'दादा साहब फाल्के पुरस्कार' और 2008 में देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान 'पद्म विभूषण' से सम्मानित किया जा चुका है।

स्मृति शेष: दिग्गज फोटो जर्नलिस्ट रघु राय का निधन

जीवन परिचय एवं फोटोग्राफी का सफर

  • भारत के सबसे प्रतिष्ठित फोटो जर्नलिस्ट और डॉक्यूमेंट्री फोटोग्राफर रघु राय (83 वर्ष) का 26 अप्रैल 2026 को कैंसर से जूझने के बाद निधन हो गया।
  • उनका जन्म 18 दिसंबर 1942 को (वर्तमान पाकिस्तान में) हुआ था।
  • उन्होंने वर्ष 1966 में 'द स्टेट्समैन' (The Statesman) समाचार पत्र से अपने करियर की शुरुआत की और 6 दशकों तक भारत के ऐतिहासिक पलों को अपने लेंस में कैद किया।
  • फोटोग्राफी में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1972 में 'पद्म श्री' और वर्ष 2009 में 'फ्रांसीसी नागरिक सम्मान' से नवाजा गया था। इसके अलावा उन्होंने 56 से अधिक पुस्तकें भी लिखीं।

कैमरे में कैद भारत का इतिहास (प्रमुख तस्वीरें)

  • भोपाल गैस त्रासदी (1984): मलबे में दबे एक बच्चे की उनकी मार्मिक तस्वीर ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया था। इस तस्वीर के बारे में उन्होंने कहा था- "इसके चेहरे पर खामोशी चीख से भी तेज थी।"
  • ऐतिहासिक घटनाक्रम: 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में पाकिस्तानी सेना के सरेंडर की तस्वीर, 1971 में बांग्लादेशी शरणार्थियों की दुर्दशा, और 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद स्वर्ण मंदिर परिसर का दृश्य।
  • प्रमुख व्यक्तित्व: मदर टेरेसा की प्रार्थना करती हुई प्रसिद्ध तस्वीर (जिसके लिए पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने विशेष अनुमति दी थी), दलाई लामा (1988), फील्ड मार्शल मानेकशॉ (1973), राजीव और सोनिया गांधी (1975), तथा धीरूभाई अंबानी और उनके बेटों की ऐतिहासिक तस्वीर (1986)।
DEOrbit परीक्षा नोट्स: रघु राय का मानना था कि विजुअल हिस्ट्री (तस्वीरें) 'सबसे सच्चा दस्तावेज' होती हैं। उनका फोटोग्राफी का मूल मंत्र था- "घर से इस ख्याल से मत निकलना कि पेड़ की टहनी पर उल्टे लटके बंदर की तस्वीर लेनी है, वर्ना कई पल छूट जाएंगे।" यह उनकी बिना पूर्व-निर्धारित सोच के मौलिक (Original) पलों को कैद करने की कला को दर्शाता है।

स्मृति शेष: बीकाजी फूड्स के संस्थापक शिव रतन अग्रवाल का निधन

जीवन परिचय और व्यावसायिक सफर

  • बीकानेर की गलियों के स्वाद को वैश्विक ब्रांड बनाने वाले बीकाजी फूड्स इंटरनेशनल लिमिटेड के चेयरमैन शिव रतन अग्रवाल (75) का 23 अप्रैल 2026 को चेन्नई में हार्ट अटैक से निधन हो गया।
  • करीबियों के बीच वे प्यार से 'फन्ना बाबू' के नाम से जाने जाते थे।
  • स्वर्गीय हल्दीराम अग्रवाल के पौत्र शिव रतन जी ने वर्ष 1993 में बीकाजी की स्थापना की थी, जिसे आज उन्होंने 40 से अधिक देशों तक पहुंचा दिया है।
  • उनका मूल मंत्र था- "मशीनें सिर्फ रफ्तार बढ़ाती हैं, संस्कार नहीं; तकनीक अपनाएं... पर अपनी जड़ों (स्वाद) को मत छोड़िए।"
  • फोर्ब्स के अनुसार उनकी कंपनी का मार्केट कैप 17,282 करोड़ रुपये और उनकी कुल नेटवर्थ 13,175 करोड़ रुपये आंकी गई है।

सामाजिक योगदान और परोपकार

  • महाराजा गंगासिंह के बाद उन्हें बीकानेर का दूसरा सबसे बड़ा दानवीर माना जाता है।
  • वर्ष 2010 में उन्होंने अपने परिवार (हल्दीराम ट्रस्ट) के माध्यम से 20 करोड़ रुपये की लागत से 'हल्दीराम मूलचंद हार्ट हॉस्पिटल' का निर्माण करवाया था।
  • कैंसर अस्पताल में 250 बेड का ब्लॉक बनवाने के साथ ही उन्होंने शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई स्कूलों को भी गोद लिया।
DEOrbit परीक्षा नोट्स: शिव रतन अग्रवाल ने बीकानेरी भुजिया और पारंपरिक स्वाद को आधुनिक तकनीक (मशीनीकरण) से जोड़ा। बीकानेर उन्हें आज के युग का 'भागीरथ' मानता है, क्योंकि उन्होंने मशीनी युग आने पर भी पुराने कारीगरों को बेरोजगार नहीं होने दिया और विरासत का हमेशा सम्मान किया।

दिग्गज फोटो जर्नलिस्ट रघु राय का निधन

जीवन परिचय एवं फोटोग्राफी का सफर

  • भारत के सबसे प्रतिष्ठित फोटो जर्नलिस्ट और डॉक्यूमेंट्री फोटोग्राफर रघु राय (83 वर्ष) का 26 अप्रैल 2026 को कैंसर से जूझने के बाद निधन हो गया।
  • उनका जन्म 18 दिसंबर 1942 को (वर्तमान पाकिस्तान में) हुआ था।
  • उन्होंने वर्ष 1966 में 'द स्टेट्समैन' (The Statesman) समाचार पत्र से अपने करियर की शुरुआत की और 6 दशकों तक भारत के ऐतिहासिक पलों को अपने लेंस में कैद किया।
  • फोटोग्राफी में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1972 में 'पद्म श्री' और वर्ष 2009 में 'फ्रांसीसी नागरिक सम्मान' से नवाजा गया था। इसके अलावा उन्होंने 56 से अधिक पुस्तकें भी लिखीं।

कैमरे में कैद भारत का इतिहास (प्रमुख तस्वीरें)

  • भोपाल गैस त्रासदी (1984): मलबे में दबे एक बच्चे की उनकी मार्मिक तस्वीर ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया था। इस तस्वीर के बारे में उन्होंने कहा था- "इसके चेहरे पर खामोशी चीख से भी तेज थी।"
  • ऐतिहासिक घटनाक्रम: 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में पाकिस्तानी सेना के सरेंडर की तस्वीर, 1971 में बांग्लादेशी शरणार्थियों की दुर्दशा, और 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद स्वर्ण मंदिर परिसर का दृश्य।
  • प्रमुख व्यक्तित्व: मदर टेरेसा की प्रार्थना करती हुई प्रसिद्ध तस्वीर (जिसके लिए पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने विशेष अनुमति दी थी), दलाई लामा (1988), फील्ड मार्शल मानेकशॉ (1973), राजीव और सोनिया गांधी (1975), तथा धीरूभाई अंबानी और उनके बेटों की ऐतिहासिक तस्वीर (1986)।
DEOrbit परीक्षा नोट्स: रघु राय का मानना था कि विजुअल हिस्ट्री (तस्वीरें) 'सबसे सच्चा दस्तावेज' होती हैं। उनका फोटोग्राफी का मूल मंत्र था- "घर से इस ख्याल से मत निकलना कि पेड़ की टहनी पर उल्टे लटके बंदर की तस्वीर लेनी है, वर्ना कई पल छूट जाएंगे।" यह उनकी बिना पूर्व-निर्धारित सोच के मौलिक (Original) पलों को कैद करने की कला को दर्शाता है।

बीकाजी फूड्स के संस्थापक शिव रतन अग्रवाल का निधन

जीवन परिचय और व्यावसायिक सफर

  • बीकानेर की गलियों के स्वाद को वैश्विक ब्रांड बनाने वाले बीकाजी फूड्स इंटरनेशनल लिमिटेड के चेयरमैन शिव रतन अग्रवाल (75) का 23 अप्रैल 2026 को चेन्नई में हार्ट अटैक से निधन हो गया।
  • करीबियों के बीच वे प्यार से 'फन्ना बाबू' के नाम से जाने जाते थे।
  • स्वर्गीय हल्दीराम अग्रवाल के पौत्र शिव रतन जी ने वर्ष 1993 में बीकाजी की स्थापना की थी, जिसे आज उन्होंने 40 से अधिक देशों तक पहुंचा दिया है।
  • उनका मूल मंत्र था- "मशीनें सिर्फ रफ्तार बढ़ाती हैं, संस्कार नहीं; तकनीक अपनाएं... पर अपनी जड़ों (स्वाद) को मत छोड़िए।"
  • फोर्ब्स के अनुसार उनकी कंपनी का मार्केट कैप 17,282 करोड़ रुपये और उनकी कुल नेटवर्थ 13,175 करोड़ रुपये आंकी गई है।

सामाजिक योगदान और परोपकार

  • महाराजा गंगासिंह के बाद उन्हें बीकानेर का दूसरा सबसे बड़ा दानवीर माना जाता है।
  • वर्ष 2010 में उन्होंने अपने परिवार (हल्दीराम ट्रस्ट) के माध्यम से 20 करोड़ रुपये की लागत से 'हल्दीराम मूलचंद हार्ट हॉस्पिटल' का निर्माण करवाया था।
  • कैंसर अस्पताल में 250 बेड का ब्लॉक बनवाने के साथ ही उन्होंने शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई स्कूलों को भी गोद लिया।
DEOrbit परीक्षा नोट्स: शिव रतन अग्रवाल ने बीकानेरी भुजिया और पारंपरिक स्वाद को आधुनिक तकनीक (मशीनीकरण) से जोड़ा। बीकानेर उन्हें आज के युग का 'भागीरथ' मानता है, क्योंकि उन्होंने मशीनी युग आने पर भी पुराने कारीगरों को बेरोजगार नहीं होने दिया और विरासत का हमेशा सम्मान किया।

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