सरकारी योजनाएं एवं पहल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया 'कर्मयोगी साधना सप्ताह' का उद्घाटन
अभियान की शुरुआत
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'कर्मयोगी साधना सप्ताह' का शुभारंभ किया।
- इस अभियान का मुख्य उद्देश्य भारत के नागरिकों के जीवन में शासन की गुणवत्ता को सुधारना है।
- प्रधानमंत्री ने कहा कि इस अभियान के माध्यम से कर्मयोगियों को अधिक सक्षम और दक्ष बनाया जाएगा।
'प्रगति' की दिशा में कदम
- प्रधानमंत्री ने इस अभियान को 'नागरिक सेवाएं सुधारने' और 'अधिक संवेदनशील बनाने' का प्रयास बताया।
- प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा इस अवसर पर वीडियो संदेश के माध्यम से सभी नागरिकों को संबोधित किया।
बेहतर लोक सेवक की परिभाषा
- प्रधानमंत्री ने बेहतर लोक सेवक को परिभाषित करते हुए कहा कि उसे समर्पित और संवेदनशील होना चाहिए।
- तय किया गया कि इस अभियान के माध्यम से सिविल सेवकों के गुणों को उभारा जाएगा।
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DEOrbit Exam Note:
'कर्मयोगी साधना सप्ताह' सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने की एक पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत में सिविल सेवकों को अधिक दक्ष और संवेदनशील बनाना है।
'कर्मयोगी साधना सत्र': प्रधानमंत्री का संबोधन
प्रधानमंत्री के संबोधन के मुख्य बिंदु
- प्रधानमंत्री ने कर्मयोगी भारत के अभियान का उद्घाटन किया, जो देश के सरकारी कर्मचारियों के लिए है।
- 21वीं सदी के कार्यकाल को देखते हुए प्रशासन में बदलाव और सुधार पर जोर दिया।
- कर्मियों की क्षमता वृद्धि के लिए iGOT और CBC कमीशन के महत्व पर प्रकाश डाला।
- तकनीकी और डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
क्षमता निर्माण और डिजिटलीकरण
- iGOT प्लेटफार्म द्वारा कर्मचारियों के विकास में तकनीकी प्रशिक्षण की अवधारणा प्रस्तुत की गई।
- कर्मियों की कुशलता और उनकी कार्यप्रणाली में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया गया।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटलीकरण के प्रयोग द्वारा सरकार की प्रक्रियाओं में सुधार करने की कोशिशों की प्रशंसा की गई।
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DEOrbit Exam Note:
'कर्मयोगी' भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है जो सरकारी कर्मचारियों के डिजिटल और तकनीकी कौशल को बढ़ावा देती है, ताकि प्रशासनिक कार्य प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
दिल्ली सरकार की 'लखपति बिटिया योजना': बेटियों के भविष्य को मिलेगा संबल
योजना की घोषणा और उद्देश्य
- 'लखपति बिटिया योजना' दिल्ली सरकार द्वारा शुरू की गई है ताकि बेटियों की शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
- इस योजना के तहत बेटियों को जन्म से 18 या 21 वर्ष की आयु तक आर्थिक सहायता दी जाएगी।
- महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा इस योजना का संचालन किया जा रहा है।
वित्तीय सहायता और लाभ
- बेटियों के जन्म पर 11,000 रुपये और प्रत्येक चरण (कक्षा 1, 6, 9, 11 व 12) में प्रवेश पर 5,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
- डिप्लोमा और ग्रेजुएशन के लिए अतिरिक्त सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।
- अप्रिय पारिवारिक स्थितियों में जिस बेटी का नामांकन नहीं होगा, उन्हें भी 1.20 लाख रुपये दिए जाएंगे।
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DEOrbit Exam Note:
दिल्ली सरकार का यह कदम महिला सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण है और इसका उद्देश्य बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करना है, जो भारत में सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए अत्यावश्यक है।
स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत गुजरात का 'स्वच्छता मॉडल'
सीवर सफाई में 'जीरो-ह्यूमन-एंट्री' और सफाईमित्रों का सामाजिक कल्याण
- स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 (SBM-U 2.0) के अंतर्गत गुजरात राज्य ने तकनीकी नवाचार और सामाजिक कल्याण को जोड़कर एक प्रेरक मॉडल प्रस्तुत किया है।
- राजकोट ने 2.29 करोड़ रुपये की लागत से सीवर सफाई के लिए उन्नत रोबोटिक तकनीक को अपनाया है, जिससे खतरनाक मैनुअल सफाई (हाथ से सफाई) समाप्त हो गई है।
- इस पहल से "जीरो-ह्यूमन-एंट्री" (Zero-Human-Entry) का विज़न साकार हो रहा है और सफाईमित्र अब 'रोबोट ऑपरेटर' के रूप में कार्य कर रहे हैं।
- राजकोट नगर निगम द्वारा 5000 से अधिक सफाई कर्मियों के परिवारों के लाभ के लिए एक आधुनिक सामुदायिक भवन का निर्माण भी किया जा रहा है।
- वहीं, भुज नगर पालिका ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 108 महिला सफाईमित्रों के लिए विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया।
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DEOrbit Exam Note:
SBM-U 2.0 (स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0): इसे 'आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय' (MoHUA) द्वारा 1 अक्टूबर 2021 को लॉन्च किया गया था। इसका मुख्य लक्ष्य सभी वैधानिक शहरों को 'कचरा मुक्त' (Garbage Free) बनाना और अमृत (AMRUT) योजना के अंतर्गत न आने वाले शहरों में सीवेज/सेप्टेज का सुरक्षित प्रबंधन सुनिश्चित करना है।
मिट्टी की सेहत सुधार कार्यक्रम की घोषणा
आईसीएआर - आईएआरआई के 122वें स्थापना दिवस पर घोषणाएं
- मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आईसीएआर-आईएआरआई के स्थापना दिवस समारोह में भाग लिया।
- कार्यक्रम में मिट्टी की गुणवत्ता और हरियाली बढ़ाने की योजनाओं पर जोर दिया गया।
- विभिन्न स्तर पर अनुसंधान संस्थानों के साथ मिलकर कार्य करने का निर्णय लिया गया।
प्लास्टिक के उपयोग को घटाने पर विशेष ध्यान
- प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और पर्यावरण को स्वच्छ रखने हेतु उपाय सुझाए गए।
- प्राकृतिक संसाधनों के कुशल उपयोग पर बल दिया गया।
प्रधानमंत्री के 'विकसित भारत' विजन पर जोर
- प्रधानमंत्री मोदी के 'विकसित भारत' विजन को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाई गई।
- स्मार्ट कृषि और डिजिटल तकनीकों के अधिकाधिक प्रयोग पर विचार विमर्श हुआ।
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DEOrbit Exam Note:
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर) ने 1905 में स्थापना के बाद से कृषि अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
नई वस्त्र योजनाओं पर दक्षिण क्षेत्र परामर्श कार्यशाला
मुख्य विमर्श एवं रणनीतिक दिशा-निर्देश
- वस्त्र मंत्रालय द्वारा 21 अप्रैल 2026 को बेंगलुरु में नई वस्त्र योजनाओं (बजट 2026-27 के तहत) पर 'दक्षिण क्षेत्र परामर्श कार्यशाला' का आयोजन किया गया।
- वस्त्र सचिव श्रीमती रचना शाह ने 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य में इस क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए 'फार्म टू फैशन' और 'मेक इन इंडिया' विज़न पर जोर दिया।
- कार्यशाला में संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज को मजबूत करने, आधुनिकीकरण, चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circularity) और उपभोक्ता प्राथमिकताओं पर विशेष ध्यान देने पर बल दिया गया।
- वरिष्ठ अधिकारियों ने आधुनिकीकरण हेतु अनुदान, रोजगार-संबद्ध प्रोत्साहन (ELI), प्रौद्योगिकी उन्नयन कोष योजना (TUFS) और खादी विकास से जुड़ी नीतिगत सहयोग की रूपरेखा प्रस्तुत की।
- केंद्रीय रेशम बोर्ड ने योजनाओं को अधिक हथकरघा-केंद्रित (Handloom-centric) बनाने और 'फार्म टू फैब्रिक' के विज़न के अनुरूप समग्र विकास सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स:
* प्रमुख बजट 2026-27 योजनाएं: इस कार्यशाला में एकीकृत वस्त्र क्षेत्र (कार्यक्रम), राष्ट्रीय फाइबर योजना (NFS), वस्त्र विस्तार और रोजगार (TEEM) योजना, राष्ट्रीय हथकरघा और हस्तशिल्प कार्यक्रम (NHHP), मेगा टेक्सटाइल पार्क और महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना (MGGSY) जैसी महत्वपूर्ण पहलों पर विस्तृत चर्चा हुई।
* समर्थ 2.0 (Samarth 2.0): यह योजना 2.0 कौशल सशक्तिकरण (Skill Empowerment) पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य पारंपरिक पाठ्यक्रमों, मोबाइल-आधारित प्रौद्योगिकियों के उपयोग और उद्योग-प्रासंगिक प्रशिक्षण के माध्यम से एक कुशल कार्यबल का निर्माण करना है।
📈 अटल पेंशन योजना (APY): 9 करोड़ नामांकन का नया कीर्तिमान
रिकॉर्ड वृद्धि एवं मुख्य आंकड़े
- भारत सरकार की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजना, 'अटल पेंशन योजना' (APY) के तहत कुल सफल नामांकन का आंकड़ा 21 अप्रैल 2026 तक 9 करोड़ को पार कर गया है।
- वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान इस योजना में 1.35 करोड़ से अधिक नए ग्राहकों का नामांकन हुआ।
- यह आंकड़ा योजना की शुरुआत के बाद से किसी भी एक वित्तीय वर्ष में दर्ज किया गया अब तक का सबसे अधिक (सर्वाधिक) नामांकन है।
- इस पेंशन योजना का प्रशासन 'पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण' (PFRDA) द्वारा किया जाता है।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स:
* शुरुआत एवं उद्देश्य: APY की शुरुआत 9 मई 2015 को हुई थी। यह एक स्वैच्छिक और अंशदायी पेंशन योजना है, जो विशेष रूप से गरीब, वंचित तथा असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों पर केंद्रित है।
* पात्रता (Eligibility): यह योजना 18 से 40 वर्ष आयु वर्ग के सभी भारतीय नागरिकों के लिए उपलब्ध है, बशर्ते वे आयकरदाता (Taxpayer) न हों या पूर्व में आयकरदाता न रहे हों।
* 'सम्पूर्ण सुरक्षा कवच' (लाभ):
1. 60 वर्ष की आयु के पश्चात ₹1,000 से ₹5,000 तक की गारंटीकृत मासिक पेंशन।
2. अभिदाता की मृत्यु के पश्चात उसके पति/पत्नी को समान पेंशन राशि।
3. दोनों (अभिदाता और जीवनसाथी) के निधन के बाद 60 वर्ष की आयु तक संचित कोष (Accumulated Corpus) नामित व्यक्ति (Nominee) को लौटा दिया जाता है।
राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस: बुनियादी स्तर पर लोकतंत्र का सशक्तिकरण
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और संरचना
- राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस हर साल 24 अप्रैल को पूरे देश में मनाया जाता है।
- यह दिन 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के कार्यान्वयन का प्रतीक है, जो 1993 में लागू हुआ था और जिसने पंचायती राज संस्थानों को संवैधानिक दर्जा दिया।
- संविधान के भाग IX में पंचायतों से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं।
- स्वतंत्रता के बाद बलवंत राय मेहता समिति (1957) की सिफारिश पर त्रि-स्तरीय पंचायती राज संरचना का प्रस्ताव रखा गया था।
- राजस्थान 1959 में इस प्रणाली को लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना था।
- वर्तमान में देश भर में 2.5 लाख से अधिक पंचायतें हैं, जिनमें लगभग 24.04 लाख निर्वाचित प्रतिनिधि शामिल हैं।
- इन प्रतिनिधियों में लगभग 49.75 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो समावेशी शासन को दर्शाता है।
- स्वामित्व योजना (SVAMITVA): 24 अप्रैल 2021 को शुरू की गई यह योजना ड्रोन और जीआईएस (GIS) तकनीक का उपयोग करके ग्रामीण क्षेत्रों की मैपिंग करती है और संपत्ति कार्ड जारी करती है।
- सभासार: यह एक एआई (AI) आधारित उपकरण है जो 23 क्षेत्रीय भाषाओं का समर्थन करते हुए स्वचालित रूप से ग्राम सभा की बैठकों के कार्यवृत्त तैयार करता है।
- ई-ग्रामस्वराज: यह योजना, प्रगति रिपोर्टिंग और वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता के लिए एक वेब पोर्टल है जो पीएफएमएस (PFMS) से जुड़ा हुआ है।
- ग्राम ऊर्जा स्वराज: यह ई-ग्राम स्वराज के तहत एक डैशबोर्ड है जो ग्राम पंचायत स्तर पर सौर, जल, पवन और बायोगैस जैसी नवीकरणीय ऊर्जा परिसंपत्तियों का पता लगाता है।
महिला, युवा और जनजातीय सशक्तिकरण
- सशक्त पंचायत-नेत्री अभियान: इसके तहत 1,48,904 महिला निर्वाचित प्रतिनिधियों को नेतृत्व, संचार और निर्णय लेने के कौशल का प्रशिक्षण दिया गया है।
- मॉडल युवा ग्राम सभा (MYGS): यह पहल जवाहर नवोदय विद्यालयों और एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के छात्रों को मॉक ग्राम सभाओं के माध्यम से स्थानीय शासन समझने में मदद करती है।
- पेसा अधिनियम (PESA Act 1996): यह 10 राज्यों के पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों पर लागू है, जो आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभा के नेतृत्व वाले शासन को मजबूत करता है।
वित्तीय मजबूती
- 15वें वित्त आयोग (2021-26) के तहत ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए लगभग 2.36 लाख करोड़ रुपये की सिफारिश की गई थी।
- 16वें वित्त आयोग (2026-31) के तहत इसे बढ़ाकर लगभग 4.35 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिससे स्थानीय वित्तीय स्वायत्तता में वृद्धि हुई है।
जनगणना 2027: भारत की पहली डिजिटल जनगणना
प्रमुख बिंदु एवं दो-चरणीय प्रक्रिया
- जनगणना 2027 भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी, जो कुल मिलाकर देश की 16वीं और स्वतंत्रता के बाद की 8वीं जनगणना है।
- राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCPA) के निर्णय के अनुसार, इस जनगणना में 'जातिगत गणना' को भी शामिल किया जाएगा।
- सरकार ने इसके सफल और सुगम संचालन के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया है।
- प्रथम चरण (मकान सूचीकरण - HLO): यह चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच प्रत्येक राज्य में 30 दिनों की अवधि के लिए आयोजित किया जाएगा।
- द्वितीय चरण (जनसंख्या गणना): यह चरण फरवरी 2027 में निर्धारित है, जिसमें जातिगत गणना सहित विस्तृत जनसांख्यिकीय आंकड़े जुटाए जाएंगे।
- संदर्भ तिथि: इस जनगणना के लिए मानक समय 1 मार्च, 2027 की मध्यरात्रि निर्धारित किया गया है (बर्फबारी वाले क्षेत्रों जैसे जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल और उत्तराखंड के लिए यह तिथि 1 अक्टूबर 2026 होगी)।
प्रमुख तकनीकी एवं डिजिटल पहल
- स्व-गणना पोर्टल: घर-घर जाकर की जाने वाली गणना से 15 दिन पहले नागरिकों को ऑनलाइन पोर्टल (16 भाषाओं में उपलब्ध) के माध्यम से अपनी जानकारी स्वयं भरने का विकल्प मिलेगा, जिससे एक 'स्व-गणना आईडी (SE ID)' जनरेट होगी।
- सीएमएमएस (CMMS) पोर्टल: संपूर्ण जनगणना प्रक्रिया के वास्तविक समय में प्रबंधन और निगरानी के लिए 'जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली' नामक एक समर्पित पोर्टल विकसित किया गया है।
- एचएलओ (HLO) मोबाइल ऐप: यह गणनाकारों द्वारा डेटा एकत्र करने वाला एक ऑफलाइन-सक्षम मोबाइल एप्लिकेशन है, जो डेटा को सीधे सर्वर पर भेजेगा और कागजी कार्रवाई को पूरी तरह खत्म कर देगा।
- डेटा सुरक्षा: डेटा को सुरक्षित रखने के लिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का उपयोग किया जा रहा है और प्रणालियां अंतरराष्ट्रीय ISO/IEC 27001:2022 मानकों के अनुरूप हैं।
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