पड़ोसी देश एवं क्षेत्रीय सहयोग
भारत-भूटान ऊर्जा साझेदारी और पुनात्सांगचू जलविद्युत परियोजना
केंद्रीय मंत्री की भूटान यात्रा और प्रमुख कूटनीतिक मुलाकातें
- केंद्रीय विद्युत और आवास एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल 4-दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भूटान पहुंचे हैं।
- उन्होंने भूटान नरेश 'जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक', भूटान के प्रधानमंत्री 'शेरिंग तोबगे' और ऊर्जा मंत्री ल्योनपो जेम शेरिंग से मुलाकात की।
- बातचीत के दौरान भूटान के राष्ट्रीय सेवा कार्यक्रम 'ग्यालसुंग' (Gyal Sung) और सतत विकास के लिए प्रस्तावित 'गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी' (Gelephu Mindfulness City) के दृष्टिकोण पर भी चर्चा की गई।
पुनात्सांगचू-I और पुनात्सांगचू-II (जलविद्युत) पर अहम समझौते
- पुनात्सांगचू-II (1020 मेगावाट): दोनों देशों ने इस परियोजना के 'टैरिफ दर नियम' (Tariff Protocol) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस परियोजना का संयुक्त रूप से उद्घाटन 11 नवंबर 2025 को किया गया था और 19 सितंबर 2025 से भारत को बिजली निर्यात शुरू हो चुका है।
- पुनात्सांगचू-I (1200 मेगावाट): 10 अप्रैल 2026 को केंद्रीय मंत्री इस परियोजना के बांध में 'कंक्रीट डालने के समारोह' में शामिल हुए, जो इसके निर्माण कार्य आरंभ होने का प्रतीक है।
- रिएक्टिव पावर एक्सचेंज: ग्रिड स्थिरता बढ़ाने और द्विपक्षीय बिजली व्यापार को सुव्यवस्थित करने के लिए 'रिएक्टिव पावर एक्सचेंज संबंधी लेखा प्रणाली' पर भी समझौता किया गया।
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DEOrbit Exam Note:
पुनात्सांगचू नदी (Punatsangchhu River): यह भूटान की एक प्रमुख नदी है, जिसे भारत (असम) में संकोश (Sankosh) नदी के नाम से जाना जाता है। यह आगे चलकर ब्रह्मपुत्र नदी में मिल जाती है। 'गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी': यह भूटान के दक्षिणी सीमावर्ती क्षेत्र (असम सीमा के पास) में एक प्रस्तावित मेगा-सिटी प्रोजेक्ट है। भारत ने भूटान में इससे पूर्व 'चूखा' (336 MW), 'कुरुछू' (60 MW), 'ताला' (1020 MW) और 'मांगदेछू' (720 MW) जलविद्युत परियोजनाएं भी सफलतापूर्वक विकसित की हैं।
NH-927 के 'बाराबंकी-बहराइच' 4-लेन राजमार्ग को मंजूरी
भारत-नेपाल सीमा व्यापार को मिलेगा भारी बढ़ावा, यात्रा का समय होगा आधा
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय राजमार्ग-927 (NH-927) के 4-लेन वाले आधुनिक पहुंच नियंत्रित (एक्सेस कंट्रोल्ड) बाराबंकी-बहराइच खंड के निर्माण को मंजूरी दे दी है।
- यह रणनीतिक राजमार्ग भारत और नेपाल के बीच आर्थिक सहयोग और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
- इस परियोजना से बाराबंकी और बहराइच के बीच यात्रा के समय में 50 प्रतिशत की कमी आएगी (समय 150 मिनट से घटकर मात्र 75 मिनट रह जाएगा)।
- वाहनों की गति भी 40 किमी प्रति घंटे से बढ़कर 80 किमी प्रति घंटे हो जाएगी, जिससे परिवहन लागत और माल की आवाजाही में लगने वाला समय कम होगा।
- तेज गति से यात्रा करने से पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों को नेपाल के बाजारों तक पहुँचने में मदद मिलेगी और जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पादों की बर्बादी कम होगी।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स:
भारत-नेपाल व्यापार: भारत, नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जो नेपाल के कुल व्यापार का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कवर करता है। भारत से नेपाल को होने वाला अधिकांश निर्यात 'रुपईडीहा-नेपालगंज' मार्ग से होता है। NH-927 के इस नए खंड के बनने से रुपईडीहा (भारत) और निकटवर्ती नेपालगंज (नेपाल) के बीच संपर्क सुविधा बहुत बेहतर हो जाएगी।
भारत-भूटान: 7वीं सीमा शुल्क संयुक्त समूह (JGC) की बैठक
द्विपक्षीय व्यापार एवं सीमा प्रबंधन
- भारत और भूटान के बीच सीमा शुल्क पर संयुक्त समूह (JGC) की सातवीं बैठक 20-21 अप्रैल 2026 को केरल के मुन्नार में आयोजित की गई।
- इस महत्वपूर्ण बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के विशेष सचिव श्री योगेंद्र गर्ग और भूटान के राजस्व एवं सीमा शुल्क महानिदेशक श्री सोनम जाम्त्शो ने की।
- वार्ता के दौरान समन्वित सीमा प्रबंधन (CBM), खुफिया जानकारी साझा करके तस्करी-रोधी तंत्र को मजबूत करने और प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण पर जोर दिया गया।
- व्यापार सुगमता के लिए 'इलेक्ट्रॉनिक कार्गो ट्रैकिंग सिस्टम' (ECTS) के उपयोग और सीमा पर बुनियादी ढांचे में सुधार पर भी सहमति बनी।
- बैठक के पश्चात भूटान के प्रतिनिधिमंडल ने कोच्चि बंदरगाह का दौरा किया, जहां उन्हें कंटेनर हैंडलिंग, समुद्री गश्त और सैटेलाइट फोन (AIS) जैसी सुरक्षा प्रणालियों की व्यावहारिक जानकारी दी गई।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स:
* व्यापारिक आंकड़े: भारत, भूटान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भूटान का लगभग 80 प्रतिशत व्यापार भारत के साथ होता है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 46 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि के साथ 1.9 अरब डॉलर को पार कर गया।
* सीमा शुल्क केंद्र: भूटान की स्थलरुद्ध (Landlocked) भौगोलिक स्थिति के कारण व्यापार मुख्य रूप से भूमि सीमा शुल्क केंद्रों के माध्यम से होता है। वर्तमान में भारत-भूटान सीमा पर 10 अधिसूचित भूमि सीमा शुल्क केंद्र स्थित हैं, जिनमें से 6 पश्चिम बंगाल में और 4 असम में हैं।
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