Thursday, 23 April 2026

आर्थिक नीतियां एवं वृहद आंकड़े

अर्थव्यवस्था: 65 साल पुराना कानून खत्म, देश में लागू हुआ नया 'आयकर अधिनियम, 2025'

ऐतिहासिक कर सुधार: आयकर अधिनियम 1961 की ली जगह

  • भारत के प्रत्यक्ष कर ढांचे (Direct Tax framework) में एक ऐतिहासिक सुधार करते हुए नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत यानी 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में 'आयकर अधिनियम, 2025' (Income Tax Act, 2025) लागू कर दिया गया है।
  • इस नए, आधुनिक और सरल कानून ने छह दशक (लगभग 65 साल) पुराने 'आयकर अधिनियम, 1961' को पूरी तरह से समाप्त कर उसकी जगह ले ली है।
  • वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस नए अधिनियम का मुख्य उद्देश्य कर नीतियों (Tax policies) की जटिल भाषा को सरल बनाना, इसे आम जनता के समझने योग्य बनाना और कर अनुपालन (Tax compliance) को आसान करना है।

कॉन्सेप्ट क्लैरिटी: 'आयकर अधिनियम 2025' और 'आयकर नियम 2026' में मूल अंतर

  • अधिनियम (Act) क्या है?: यह संसद द्वारा पारित मूल कानून है, जो सिर्फ यह बताता है कि 'क्या' करना है (जैसे- टैक्स देना अनिवार्य है)। इसे अगस्त 2025 में संसद और राष्ट्रपति से मंजूरी मिली, इसलिए यह 'आयकर अधिनियम, 2025' कहलाता है।
  • नियम (Rules) क्या हैं?: संसद के कानून को जमीन पर लागू करने के लिए संबंधित विभाग (यहाँ CBDT) जो बारीक प्रक्रिया और दिशा-निर्देश (जैसे- फॉर्म कैसे भरें, वेबसाइट कौन सी होगी) बनाता है, उसे 'नियम' कहते हैं। ये नियम 20 मार्च 2026 को जारी हुए, इसलिए इन्हें 'आयकर नियम, 2026' कहा गया।
  • निष्कर्ष: सरल शब्दों में, मूल कानून (Act) 2025 में बनकर तैयार हो गया था, लेकिन उसे लागू करने के व्यावहारिक नियम (Rules) 2026 में बने और फिर इसे 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में प्रभावी (Effective) कर दिया गया।
💡
DEOrbit Exam Note: प्रत्यक्ष कर और CBDT: आयकर (Income Tax) एक 'प्रत्यक्ष कर' (Direct Tax) है, जिसका अर्थ है कि जिस व्यक्ति पर यह कर लगाया जाता है, उसी को इसका भुगतान करना होता है। भारत में प्रत्यक्ष करों से संबंधित नीतियां बनाने और उन्हें लागू करने वाली शीर्ष संस्था 'केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड' (CBDT) है, जो वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन कार्य करती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 265 में स्पष्ट लिखा है कि "कानून के अधिकार के बिना कोई भी कर नहीं लगाया या वसूला जाएगा।"

MoSPI ने राष्ट्रीय लेखा का 'आधार वर्ष' (Base Year) बदलकर किया 2022-23, विशाखापत्तनम में कार्यशाला

नया आधार वर्ष (2022-23) और अखिल भारतीय कार्यशाला का आयोजन

  • सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए राष्ट्रीय लेखा (National Accounts) के लिए 'आधार वर्ष' को संशोधित करके 2022-23 कर दिया है।
  • इस प्रमुख संशोधन का मुख्य उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था की वर्तमान संरचना को अधिक सटीक रूप से प्रतिबिंबित करना और अनुमान पद्धतियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना है।
  • राष्ट्रीय स्तर पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में बदलाव के अनुरूप, अब राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा भी सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के आधार वर्ष को संशोधित किया जाएगा।
  • इन नए परिवर्तनों को राज्यों में सुचारू रूप से लागू करने और संकलन प्रक्रियाओं के मानकीकरण के लिए 8 से 10 अप्रैल, 2026 तक आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में एक 'तीन-दिवसीय अखिल भारतीय कार्यशाला' का आयोजन किया जा रहा है।

कार्यशाला के मुख्य बिंदु और 'जिला घरेलू उत्पाद' (DDP) का संकलन

  • राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा आयोजित इस कार्यशाला का उद्घाटन 8 अप्रैल 2026 को सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन सचिव डॉ. सौरभ गर्ग और आंध्र प्रदेश के प्रधान सचिव (योजना) श्री पीयूष कुमार द्वारा किया जाएगा।
  • इस कार्यशाला में अर्थव्यवस्था के सभी संस्थागत और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए 'जिला घरेलू उत्पाद' (DDP - District Domestic Product) के संकलन में पद्धतिगत परिवर्तनों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
  • इसके अतिरिक्त, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जिला घरेलू उत्पाद के सटीक संकलन के लिए एक 'मसौदा समान दिशानिर्देश' (Draft Uniform Guidelines) पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
  • इस कार्यशाला में विभिन्न राज्यों के अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालयों (DES) के लगभग 150 अधिकारी और कर्मचारी भाग ले रहे हैं।
💡
DEOrbit Exam Note:

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) और आधार वर्ष (Base Year): GDP और अन्य समष्टि-आर्थिक (Macroeconomic) आंकड़ों की गणना के लिए 'आधार वर्ष' वह वर्ष होता है जिसके मूल्यों को स्थिर (Constant) मानकर वर्तमान उत्पादन की गणना की जाती है ताकि मुद्रास्फीति (Inflation) के प्रभाव को हटाया जा सके। इससे पहले भारत की GDP गणना का आधार वर्ष 2011-12 था, जिसे अब 2022-23 कर दिया गया है। परीक्षा की दृष्टि से यह सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है। भारत में GDP और राष्ट्रीय आय के आंकड़े MoSPI के तहत आने वाले 'राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय' (NSO) द्वारा जारी किए जाते हैं।


सरकार ने पहली बार शुरू किया 'एनुअल सर्वे ऑफ इनकॉर्पोरेटेड सर्विसेज सेक्टर एंटरप्राइजेज'

सेवा क्षेत्र (Service Sector) के डेटा का एकत्रीकरण

  • भारत सरकार ने देश में पहली बार 'एनुअल सर्वे ऑफ इनकॉर्पोरेटेड सर्विसेज सेक्टर एंटरप्राइजेज' की शुरुआत की है।
  • इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य देश के सेवा क्षेत्र (Service Sector) से जुड़ा सटीक डेटा जुटाना है।
  • सेवा क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो देश की कुल GDP में 50% से अधिक का योगदान देता है।
💡
DEOrbit Exam Note: अर्थव्यवस्था में 'सेवा क्षेत्र' (Service Sector) को 'तृतीयक क्षेत्र' (Tertiary Sector) के रूप में जाना जाता है। इसमें व्यापार, होटल, परिवहन, संचार, वित्त, बीमा और रियल एस्टेट जैसी सेवाएं शामिल होती हैं।

मार्च 2026 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI)

अखिल भारतीय खुदरा मुद्रास्फीति दर 3.40% पर, खाद्य मुद्रास्फीति 3.87% दर्ज

  • सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने 13 अप्रैल 2026 को आधार वर्ष 2024=100 मानते हुए मार्च 2026 के लिए 'उपभोक्ता मूल्य सूचकांक' (CPI) के आंकड़े आधिकारिक रूप से जारी किए हैं ।
  • मार्च 2026 के महीने में अखिल भारतीय वार्षिक खुदरा मुद्रास्फीति दर 3.40 प्रतिशत (अस्थायी) रही है ।
  • इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में मुद्रास्फीति दर 3.63 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 3.11 प्रतिशत दर्ज की गई ।
  • उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) पर आधारित वार्षिक खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) 3.87 प्रतिशत (अनंतिम) रही ।
  • इसके अतिरिक्त, मार्च 2026 माह के लिए 'आवास' (Housing) क्षेत्र की वार्षिक मुद्रास्फीति दर 2.11 प्रतिशत दर्ज की गई ।

मार्च 2026 में सर्वाधिक मुद्रास्फीति (महंगाई) वाली शीर्ष 5 प्रमुख वस्तुएं

क्र.सं. वस्तु (Item) मुद्रास्फीति (मार्च 2026)
1. चांदी के आभूषण 148.61 %
2. सोने / हीरे / प्लैटिनम के आभूषण 45.92 %
3. नारियल (खोपरा) 45.52 %
4. टमाटर 35.99 %
5. फूलगोभी 34.11 %
💡
DEOrbit परीक्षा नोट्स: डेटा संग्रह और महत्वपूर्ण तथ्य:सीपीआई (CPI) के लिए अब आधार वर्ष 2024=100 कर दिया गया है । यह डेटा 'राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय' (NSO) द्वारा देश के 1407 शहरी बाजारों और 1465 गांवों से एकत्र किया जाता है । राज्यों की बात करें तो मार्च 2026 में तेलंगाना (5.83%) में सर्वाधिक संयुक्त मुद्रास्फीति दर्ज की गई है । वहीं प्याज (-27.76%), आलू (-18.98%) और लहसुन (-10.18%) की कीमतों में भारी गिरावट (अल्प मुद्रास्फीति) दर्ज की गई है ।

मार्च 2026 के लिए थोक मूल्य सूचकांक (WPI)

अखिल भारतीय थोक मुद्रास्फीति दर 3.88% पर, कच्चे तेल व धातुओं की कीमतों में उछाल

  • वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने 15 अप्रैल 2026 को आधार वर्ष 2011-12=100 मानते हुए मार्च 2026 के लिए 'थोक मूल्य सूचकांक' (WPI) के आंकड़े आधिकारिक रूप से जारी किए हैं ।
  • मार्च 2026 (मार्च 2025 की तुलना में) के लिए वार्षिक थोक मुद्रास्फीति दर 3.88 प्रतिशत (अस्थायी) दर्ज की गई है ।
  • इस सकारात्मक मुद्रास्फीति दर का मुख्य कारण कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, गैर-खाद्य वस्तुओं, बुनियादी धातुओं और खाद्य पदार्थों आदि की कीमतों में भारी वृद्धि है ।
  • डब्ल्यूपीआई (WPI) खाद्य सूचकांक पर आधारित वार्षिक खाद्य मुद्रास्फीति मार्च 2026 में 1.85 प्रतिशत पर स्थिर रही है ।
  • माह-दर-माह (MoM) आधार पर देखा जाए तो, फरवरी 2026 की तुलना में मार्च 2026 में समग्र WPI सूचकांक में 1.64 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है ।

WPI के प्रमुख घटक, उनके भारांक (Weightage) और मार्च 2026 में वृद्धि

क्र.सं. प्रमुख समूह (Major Group) कुल भारांक (%) MoM वृद्धि (मार्च 2026)
1. विनिर्मित उत्पाद (Manufactured Products) 64.23 % + 0.88 %
2. प्राथमिक वस्तुएं (Primary Articles) 22.62 % + 2.28 %
3. ईंधन और बिजली (Fuel & Power) 13.15 % + 4.13 %
💡
DEOrbit परीक्षा नोट्स: WPI बनाम CPI:थोक मूल्य सूचकांक (WPI) केवल 'वस्तुओं' (Goods) की थोक स्तर की कीमतों को मापता है (इसमें 'सेवाएं' शामिल नहीं होतीं), जबकि CPI वस्तुओं और सेवाओं दोनों की खुदरा कीमतों को मापता है। भारत में WPI का आधार वर्ष 2011-12 है (जबकि CPI का हाल ही में 2024 कर दिया गया है)। WPI बास्केट में सबसे अधिक भारांक 'विनिर्मित उत्पादों' (64.23%) का होता है, जबकि CPI में सबसे बड़ा हिस्सा 'खाद्य पदार्थों' का होता है। WPI के आंकड़े हर महीने की 14 तारीख को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी किए जाते हैं ।

वैश्विक अर्थव्यवस्था एवं व्यापार समझौते

प्रमुख अपडेट

  • IMF रैंकिंग: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था रैंकिंग में एक स्थान गिरकर छठे स्थान पर पहुँच गया है।
  • यूनाइटेड किंगडम (UK) 4.26 ट्रिलियन डॉलर के साथ अब भारत को पीछे छोड़कर पांचवें स्थान पर आ गया है।
  • FTA समझौता: भारत और न्यूजीलैंड के बीच 27 अप्रैल को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर होंगे।
  • इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड से आने वाले 95% उत्पादों पर टैरिफ कम या पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा।

'यूक्रेन' बना यूरोप का सबसे गरीब देश

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के नवीनतम आंकड़े

  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, युद्धग्रस्त यूक्रेन अब यूरोप का सबसे गरीब देश बन गया है।
  • वर्तमान में यूक्रेन की प्रति व्यक्ति आय गिरकर लगभग 6,067 डॉलर प्रति वर्ष रह गई है।
  • यूरोप के अन्य गरीब देशों की सूची में अब बेलारूस, मोल्दोवा, बोस्निया और हर्जेगोविना, तथा नॉर्थ मैसेडोनिया जैसे देश शामिल हैं, जिन्हें यूक्रेन ने पीछे छोड़ दिया है।

📊 नीति आयोग: 'ट्रेड वॉच क्वार्टरली' का 7वां अंक जारी

व्यापारिक रुझान एवं रत्न-आभूषण क्षेत्र

  • नीति आयोग ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) के लिए अपने प्रकाशन 'ट्रेड वॉच क्वार्टरली' (Trade Watch Quarterly) का नवीनतम (7वां) अंक जारी किया है।
  • व्यापारिक आंकड़े: इस अवधि में भारत के व्यापारिक माल (Merchandise) निर्यात में 1.6% की मामूली वृद्धि दर्ज की गई, जबकि सेवा (Services) निर्यात में 7.9% की मजबूत और तेज वृद्धि हुई।
  • मुख्य विषय (Theme): इस तिमाही अंक का मुख्य विषय (Theme) भारत का 'रत्न और आभूषण क्षेत्र' (Gem and Jewellery Sector) है, जो देश के श्रम-प्रधान विनिर्माण और निर्यात का एक प्रमुख स्तंभ है।
  • वैश्विक हिस्सेदारी: वर्ष 2024 में 378 अरब डॉलर के वैश्विक रत्न एवं आभूषण बाजार में भारत की निर्यात हिस्सेदारी 7.8 प्रतिशत (29.5 अरब डॉलर) रही है।
  • विनिर्माण क्षमता: भारत वैश्विक मांग के आधे से अधिक की पूर्ति करते हुए हीरे और मूल्यवान धातुओं के आभूषणों में केंद्रित है, तथा कच्चे सोने को छोड़कर यह दुनिया के सबसे बड़े कटिंग और पॉलिशिंग केंद्र के रूप में स्थापित है।
  • प्रमुख चुनौतियां: इस क्षेत्र का निर्यात मुख्य रूप से केवल तीन बाजारों—अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और हांगकांग—तक सीमित है, साथ ही यह आयातित कच्चे माल पर अत्यधिक निर्भरता और MSME क्षेत्र में बिखराव जैसी संरचनात्मक बाधाओं का सामना कर रहा है।
💡
DEOrbit परीक्षा नोट्स: * ट्रेड वॉच क्वार्टरली का उद्देश्य: यह रिपोर्ट नीति निर्माताओं, उद्योग जगत और शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन है, जो बदलते भू-राजनीतिक और वैश्विक परिदृश्य में भारत की व्यापार प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करने हेतु डेटा-आधारित अंतर्दृष्टि (Insights) प्रदान करती है। * इस रिपोर्ट को नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री सुमन बेरी और सदस्य डॉ. अरविंद विरमानी द्वारा जारी किया गया।

No comments:

Post a Comment

DEOrbit.cloud - Science GK Paper Solution DE Orbit SOLUTION ...