जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य
जैव विविधता (संशोधन) अधिनियम 2023 से IPR फाइलिंग में भारी उछाल
नियामक सुधार और पेटेंट (IPR) के नए नियम
- राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत के जैविक संसाधनों से संबंधित 'बौद्धिक संपदा अधिकार' (IPR / Patent) आवेदनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
- यह उछाल मुख्य रूप से हाल ही में लागू किए गए 'जैव विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023' का प्रत्यक्ष परिणाम है, जिसने जैविक संसाधनों के उपयोग से जुड़े नियामक ढांचे को बेहद स्पष्ट और सुदृढ़ कर दिया है।
- संशोधित अधिनियम की धारा 7 के अंतर्गत अब यह अनिवार्य कर दिया गया है कि भारत में उत्पन्न जैविक संसाधनों पर आधारित IPR (पेटेंट सहित) के लिए आवेदन करने से पहले आवेदकों को NBA से 'पंजीकरण प्रमाणपत्र' (Certificate of Registration - CoR) प्राप्त करना ही होगा।
- इस अनिवार्यता का मुख्य उद्देश्य अनुसंधान और वाणिज्यिक उपयोग में पारदर्शिता लाना और जैविक संसाधनों से होने वाले लाभों का 'निष्पक्ष एवं समान बंटवारा' (Fair and Equitable Benefit Sharing) सुनिश्चित करना है।
आवेदनों में वृद्धि के आंकड़े और प्रमुख सेक्टर
- इस सुव्यवस्थित पंजीकरण प्रणाली के कारण अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच लगभग 857 बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 792 को प्रमाणपत्र (CoR) जारी किए गए।
- वहीं, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 की अवधि में यह आंकड़ा बढ़कर 1,077 IPR आवेदनों तक पहुँच गया, जिसमें से 885 आवेदकों को प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं।
- ये पेटेंट आवेदन मुख्य रूप से जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology), फार्मास्यूटिकल्स, कृषि रसायन, पॉलिमर प्रौद्योगिकी और खाद्य विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण सेक्टरों से प्राप्त हुए हैं।
- सरकार का यह कदम वैज्ञानिक प्रगति (Scientific progress) और संरक्षण प्राथमिकताओं (Conservation priorities) के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाने का कार्य कर रहा है।
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DEOrbit Exam Note:
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA): यह भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन एक 'सांविधिक निकाय' (Statutory Body) है। इसकी स्थापना वर्ष 2003 में 'जैव विविधता अधिनियम, 2002' के प्रावधानों को लागू करने के लिए की गई थी। इसका मुख्यालय चेन्नई (तमिलनाडु) में स्थित है। यह अधिनियम 1992 के 'जैविक विविधता पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन' (CBD) में भारत की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए लाया गया था।
देश की पहली डेंगू वैक्सीन 'क्यूडेंगा' (Qdenga) को मिली मंजूरी
'क्यूडेंगा' वैक्सीन के मुख्य तथ्य और उपयोग
- भारत में लगातार बढ़ रहे डेंगू के मामलों को देखते हुए, देश में पहली बार 'क्यूडेंगा' (Qdenga) नामक डेंगू वैक्सीन के उपयोग को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है।
- इस जीवनरक्षक वैक्सीन को जापान की फार्मा कंपनी 'टाकेडा' (Takeda) द्वारा विकसित किया गया है। भारत के औषधि महानियंत्रक (CDSCO) ने इसके इस्तेमाल की अनुमति प्रदान की है।
- यह वैक्सीन 4 वर्ष से लेकर 60 वर्ष तक की आयु के लोगों को लगाई जा सकेगी, जो डेंगू के चारों सीरोटाइप (Serotypes) के खिलाफ प्रभावी सुरक्षा प्रदान करेगी।
- इसके बाजार में आने से भारत में हर साल मानसून के बाद फैलने वाली डेंगू महामारी और उससे होने वाली मृत्यु दर को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।
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DEOrbit Exam Note:
डेंगू बुखार (Dengue Fever): डेंगू एक उष्णकटिबंधीय वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से संक्रमित 'मादा एडीज इजिप्टी' (Aedes aegypti) मच्छर के काटने से फैलती है। इसे 'हड्डी तोड़ बुखार' (Breakbone fever) भी कहा जाता है। इस वायरस (Flavivirus) के शरीर में प्रवेश करने से रक्त में प्लेटलेट्स (Platelets) की संख्या तेजी से कम होने लगती है, जो जानलेवा साबित हो सकती है।
मैसूर के CFTRI में 'बायोनेस्ट' (BIONEST) इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन
'बायोनेस्ट' सुविधा और खाद्य स्टार्टअप्स को बढ़ावा
- केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मैसूर (कर्नाटक) स्थित 'केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान' (CSIR-CFTRI) में BIRAC-बायोनेस्ट (BIONEST) इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया।
- इस सुविधा का मुख्य उद्देश्य प्रयोगशाला में होने वाले अनुसंधान को सीधे वाणिज्यिक अनुप्रयोगों (Lab to Market) से जोड़ना और खाद्य नवाचार क्षेत्र में स्टार्टअप्स को मजबूती प्रदान करना है।
- मार्च 2026 तक, इस बायोनेस्ट सुविधा ने 26 से अधिक भौतिक और हाइब्रिड स्टार्टअप्स को सहयोग प्रदान किया है, जिन्होंने सामूहिक रूप से 12 पेटेंट दाखिल किए हैं।
उभरती प्रौद्योगिकियां और CFTRI की 75वीं वर्षगांठ
- ये स्टार्टअप्स मुख्य रूप से न्यूट्रास्युटिकल्स (Nutraceuticals), प्रेसिजन फर्मेंटेशन, प्रोबायोटिक्स और CRISPR-आधारित अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों जैसे उभरते क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।
- इस अवसर पर संस्थान (CFTRI) की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक स्मारक डाक कवर (Commemorative Postal Cover) और चित्र पोस्टकार्ड भी जारी किया गया।
- मंत्री जी ने कृषि, अंतरिक्ष और 'विशेष पोषण' (Specialized Nutrition) जैसे क्षेत्रों के बीच समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया, ताकि देश की खाद्य सुरक्षा और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को सुदृढ़ किया जा सके।
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DEOrbit Exam Note:
BIRAC और BioNEST योजना: 'जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद' (BIRAC) भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) द्वारा स्थापित एक गैर-लाभकारी सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम है। 'बायोनेस्ट' (BioNEST - Bioincubators Nurturing Entrepreneurship for Scaling Technologies) इसी BIRAC की एक प्रमुख योजना है। इसके तहत देश भर में बायोटेक स्टार्टअप्स को विश्वस्तरीय 'इनक्यूबेशन' (ऊष्मायन) और बुनियादी ढांचा प्रदान करने के लिए सेंटर स्थापित किए जाते हैं। वहीं, CSIR-CFTRI की स्थापना वर्ष 1950 में मैसूर में की गई थी।
भारतीय भेषज संहिता (आईपी) 2026 पर वैज्ञानिक सम्मेलन
मुख्य बिंदु
- 17 अप्रैल 2026 को सीएसआईआर-भारतीय समवेत औषध संस्थान (CSIR-IIIM), जम्मू में 'भारतीय भेषज संहिता (आईपी) 2026' पर एक वैज्ञानिक सम्मेलन का आयोजन किया गया।
- यह आयोजन भारतीय भेषज संहिता आयोग (IPC) द्वारा वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के सहयोग से संपन्न हुआ।
- सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य देश भर में औषधि मानकों को एकसमान बनाए रखना तथा दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता सुनिश्चित करना है।
- तकनीकी सत्रों में अशुद्धता मानकों को सुदृढ़ करने, पादप औषधियों (plant drugs) के मानकीकरण और आधुनिक विश्लेषणात्मक दृष्टिकोणों को अपनाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
- बैठक में सूक्ष्मजीवविज्ञानी एवं रक्त संबंधी मानकों को मजबूत करने तथा नियामक निकायों, शिक्षाविदों और उद्योग जगत के बीच निरंतर सहयोग पर भी व्यापक चर्चा की गई।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स:
भारतीय भेषज संहिता आयोग (IPC) भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्था है। इसका मुख्य कार्य भारत में निर्मित और विपणन की जाने वाली दवाओं के लिए आधिकारिक मानक (Pharmacopoeia) निर्धारित करना है।
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