Thursday, 23 April 2026

ऊर्जा, खनन एवं अवसंरचना

कोयला मंत्रालय की बड़ी उपलब्धि: कैप्टिव और वाणिज्यिक खानों में रिकॉर्ड 200+ मीट्रिक टन उत्पादन

उत्पादन एवं प्रेषण (Dispatch) के नए रिकॉर्ड

  • वित्त वर्ष 2025-26 भारत के कोयला क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष रहा है, जिसमें कैप्टिव और वाणिज्यिक खानों (Captive and Commercial Blocks) ने पहली बार 200 मिलियन टन (MT) उत्पादन और प्रेषण का आंकड़ा पार कर लिया है।
  • 31 मार्च 2026 तक कोयले का कुल उत्पादन 210.46 मीट्रिक टन तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष (190.95 MT) की तुलना में 10.22 प्रतिशत की मजबूत वार्षिक वृद्धि (YoY Growth) को दर्शाता है।
  • कोयले का प्रेषण (Dispatch) भी 204.61 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है, जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के 190.42 मीट्रिक टन के मुकाबले 7.35 प्रतिशत अधिक है।
  • मंत्रालय के अनुसार, यह लगातार चौथा वर्ष है जब कोयला उत्पादन और आपूर्ति दोनों में निरंतर और प्रगतिशील वृद्धि दर्ज की गई है, जो देश की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए लॉजिस्टिक्स की मजबूती को दर्शाता है।

नई खदानों का संचालन और त्वरित शुरुआत

  • वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान खदान खोलने की अनुमति (Mine Opening Permission - MOP) प्रदान करके 12 नए कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला ब्लॉकों का परिचालन सफलतापूर्वक शुरू किया गया।
  • इन 12 नए ब्लॉकों के शुरू होने से देश की वार्षिक कोयला उत्पादन क्षमता में 86 मीट्रिक टन से अधिक की महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गई है।
  • उत्पादन की त्वरित शुरुआत (Fast-tracked Production): इस वर्ष की एक बड़ी उपलब्धि यह रही कि 7 कोयला ब्लॉकों में एक ही वित्तीय वर्ष के भीतर आवंटन से लेकर उत्पादन तक का कार्य शुरू हो गया, जो परियोजनाओं के बेहतर अंतर-विभागीय समन्वय को दर्शाता है।
  • यह ऐतिहासिक उपलब्धि 'आत्मनिर्भर भारत' और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसका मुख्य उद्देश्य घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाना और आयात पर निर्भरता को कम करके राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
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DEOrbit Exam Note: कैप्टिव खदान (Captive Mine) क्या है?: कैप्टिव कोयला खदानें वे खदानें होती हैं जो किसी कंपनी को विशेष रूप से उसके स्वयं के उपयोग (जैसे स्टील प्लांट, सीमेंट या पावर प्लांट चलाने के लिए) आवंटित की जाती हैं। इसके विपरीत, 'वाणिज्यिक खनन' (Commercial Mining) में कंपनी उत्पादित कोयले को खुले बाजार में बेचने के लिए स्वतंत्र होती है। भारत सरकार ने कोयला क्षेत्र में आत्मनिर्भरता लाने के लिए वर्ष 2020 में वाणिज्यिक कोयला खनन को निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया था।

कांडला (दीनदयाल) बंदरगाह पर 132 करोड़ की कनेक्टिविटी परियोजना को मंजूरी

'पीएम गति शक्ति' के तहत 'रोड ओवर ब्रिज' (ROB) का निर्माण

  • केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने गुजरात के 'दीनदयाल पत्तन प्राधिकरण' (कांडला बंदरगाह) में एक महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजना को मंजूरी दी है।
  • इस परियोजना के तहत LC-235 पर एक 'रोड ओवर ब्रिज' (ROB) का निर्माण किया जाएगा, जिसकी कुल अनुमानित लागत 132.51 करोड़ रुपये है।
  • यह पहल भारत सरकार के प्रमुख 'सागरमाला कार्यक्रम' (Sagarmala Programme) और 'पीएम गति शक्ति' राष्ट्रीय मास्टर प्लान का एक अभिन्न अंग है।
  • उद्देश्य: इस ब्रिज के निर्माण से बंदरगाह के पास यातायात की भीड़ (Congestion) कम होगी, रेल क्रॉसिंग की बाधाएं समाप्त होंगी और माल की निर्बाध 'मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स' आवाजाही सुनिश्चित हो सकेगी।
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DEOrbit Exam Note: दीनदयाल बंदरगाह (कांडला पोर्ट): गुजरात के कच्छ की खाड़ी (Gulf of Kutch) में स्थित यह भारत के सबसे व्यस्त प्रमुख बंदरगाहों में से एक है। विभाजन के बाद कराची बंदरगाह के पाकिस्तान में चले जाने के कारण, पश्चिमी भारत की व्यापारिक जरूरतों को पूरा करने के लिए 1950 के दशक में इसका निर्माण किया गया था। यह एशिया का पहला 'निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्र' (EPZ) भी था, जिसे 1965 में स्थापित किया गया था।

भारत के शिपबिल्डिंग सेक्टर में कौशल विकास के लिए दक्षिण कोरिया (KOICA) से समझौता

'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' और अंतरराष्ट्रीय सहयोग

  • जहाजरानी, बंदरगाह और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) ने भारत के 'शिपबिल्डिंग' (जहाज निर्माण) क्षेत्र में कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए दक्षिण कोरिया की 'कोरिया इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी' (KOICA) के साथ एक समझौता (MoU) किया है।
  • उद्देश्य: इस ऐतिहासिक सहयोग का मुख्य लक्ष्य भारतीय समुद्री और शिपबिल्डिंग सेक्टर के लिए कुशल और पेशेवर प्रतिभाओं (Skilled Workforce) की एक मजबूत नींव तैयार करना है।
  • यह पहल भारत सरकार के महत्वाकांक्षी 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' (Maritime Amrit Kaal Vision 2047) के लक्ष्यों के अनुरूप है, जो भारत को वैश्विक समुद्री नेतृत्व में स्थापित करने का रोडमैप है।
  • इस सहयोग के तहत भारत में 'शिपबिल्डिंग वर्कफोर्स डेवलपमेंट एंड टेक्नोलॉजी सेंटर' की स्थापना की जाएगी, जहाँ कोरिया की उन्नत तकनीक और अनुभव का लाभ भारतीय युवाओं को मिलेगा।
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DEOrbit Exam Note: दक्षिण कोरिया (South Korea) और शिपबिल्डिंग: पूर्वी एशिया में स्थित दक्षिण कोरिया की राजधानी 'सियोल' (Seoul) है। यह देश वर्तमान में जहाज निर्माण (Shipbuilding) के क्षेत्र में पूरी दुनिया में निर्विवाद लीडर माना जाता है। दुनिया की सबसे बड़ी शिपबिल्डिंग कंपनियां जैसे 'हुंडई हेवी इंडस्ट्रीज' (Hyundai Heavy Industries) और 'सैमसंग हेवी इंडस्ट्रीज' दक्षिण कोरिया की ही हैं। भारत अपनी शिपबिल्डिंग क्षमता (विशेषकर व्यावसायिक जहाजों के लिए) बढ़ाने के लिए इसी कोरियाई विशेषज्ञता का लाभ उठा रहा है।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा: पवन ऊर्जा क्षमता में ऐतिहासिक वृद्धि, 6.05 GW का नया रिकॉर्ड

वर्ष 2025-26 के शानदार आंकड़े: टूट गया 2016-17 का ऐतिहासिक रिकॉर्ड

  • भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान पवन ऊर्जा क्षमता में अब तक की सबसे अधिक वार्षिक वृद्धि दर्ज करते हुए 6.05 गीगावाट (GW) की नई क्षमता जोड़ी है।
  • इस शानदार प्रदर्शन के साथ ही भारत ने वित्त वर्ष 2016-17 में दर्ज की गई 5.5 गीगावाट क्षमता वृद्धि के पिछले ऐतिहासिक रिकॉर्ड को भी सफलतापूर्वक पार कर लिया है।
  • इस ऐतिहासिक वृद्धि के साथ, नवीनतम आंकड़ों के अनुसार भारत की कुल स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता अब 56 गीगावाट (GW) से अधिक हो गई है।
  • वर्ष 2024-25 में जोड़ी गई क्षमता की तुलना में इस वर्ष (2025-26) पवन ऊर्जा क्षेत्र में लगभग 46 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जो देश के तटवर्ती पवन ऊर्जा तैनाती पथ में आई नई गति को दर्शाता है।

अग्रणी राज्य, सरकारी छूट और वर्ष 2030 का राष्ट्रीय लक्ष्य

  • इस वर्ष के दौरान क्षमता वृद्धि में प्रमुख योगदानकर्ता राज्य गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र रहे हैं, जहाँ पवन-सौर हाइब्रिड परियोजनाओं को तेजी से लागू किया गया है।
  • सरकार ने पवन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए पवन टरबाइनों के निर्माण घटकों पर रियायती सीमा शुल्क और जून 2028 तक अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली (ISTS) शुल्कों में पूर्ण छूट प्रदान की है।
  • इसके अतिरिक्त, अलग पवन 'नवीकरणीय ऊर्जा खपत दायित्व' (RPO) ढांचा और राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान (NIWE) से मिल रही तकनीकी सहायता ने भी इस इकोसिस्टम को मजबूत किया है।
  • यह रिकॉर्ड वृद्धि भारत को वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट (GW) गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता हासिल करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण रूप से योगदान देगी।
  • ध्यातव्य है कि देश का पवन ऊर्जा कार्यक्रम वर्ष 1990 के दशक की शुरुआत में सरकार की व्यापक नवीकरणीय ऊर्जा रणनीति के हिस्से के रूप में शुरू किया गया था।
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DEOrbit Exam Note: राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान (NIWE) और 'पंचामृत' लक्ष्य: भारत में पवन ऊर्जा के विकास और अनुसंधान के लिए 'नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय' के अधीन राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान (NIWE) की स्थापना चेन्नई (तमिलनाडु) में की गई है। इसके साथ ही, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए यह आंकड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण है कि COP-26 (ग्लासगो) में प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए 'पंचामृत' लक्ष्यों के तहत भारत ने वर्ष 2030 तक 500 GW अक्षय (गैर-जीवाश्म) ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का संकल्प लिया है, जिसके लक्ष्य की प्राप्ति में 56 GW स्थापित क्षमता वाला यह पवन ऊर्जा क्षेत्र एक बड़ा स्तंभ साबित हो रहा है।

खान मंत्रालय ने 'ख खनिज (नीलामी) दूसरी संशोधन नियमावली, 2026' की अधिसूचित

संशोधन का उद्देश्य और 'एकीकृत खनन पोर्टल' की शुरुआत

  • खान मंत्रालय ने खदानों के त्वरित संचालन और खनन क्षेत्र में व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) को बेहतर बनाने के लिए 30 मार्च 2026 को 'खनिज (नीलामी) दूसरी संशोधन नियमावली, 2026' को अधिसूचित किया है।
  • इन संशोधनों के तहत नीलामी के लिए ब्लॉकों की पहचान, मंजूरी प्राप्त करने और संचालन की निगरानी जैसी विभिन्न प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने हेतु एक 'एकीकृत खनन पोर्टल' (Integrated Mining Portal) लागू किया जाएगा।
  • यह पोर्टल अग्रिम भुगतान की पहली किस्त और/या निष्पादन सुरक्षा प्राप्त होने पर स्वचालित रूप से 'आशय पत्र' (LoI - Letter of Intent) जारी करने की सुविधा देगा, जिससे लेटलतीफी कम होगी।
  • यदि नीलामी रद्द कर दी जाती है (क्योंकि ब्लॉक में खनन करना असंभव हो गया है), तो नियमों में अग्रिम भुगतान और निष्पादन प्रतिभूति की वापसी का प्रावधान भी किया गया है।

अव्यवहार्य हिस्से को बाहर करना और अन्वेषण एजेंसियों की भागीदारी

  • अव्यवहार्य हिस्से को बाहर करना: संशोधन नियम खनन ब्लॉक के उन हिस्सों को बाहर करने की अनुमति देते हैं जहाँ घने जंगल, वन्यजीव गलियारे, नदियां या बुनियादी ढांचे जैसी बाधाओं के कारण खनन संभव नहीं है।
  • हालांकि, यह तभी संभव होगा जब ऐसे छोड़े गए क्षेत्रों में मौजूद कुल अनुमानित खनिज संसाधनों की मात्रा ब्लॉक के कुल संसाधनों के 25% से कम हो।
  • अन्वेषण एजेंसियों की भागीदारी: अब अधिसूचित निजी अन्वेषण एजेंसियों (NPEAs) को उनके द्वारा खोजे गए सभी प्रकार के खनिज ब्लॉकों की नीलामी में भाग लेने की अनुमति दे दी गई है।
  • इससे पहले इन निजी एजेंसियों की भागीदारी केवल 'महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों' तथा गहराई में पाए जाने वाले खनिजों तक ही सीमित थी।

रणनीतिक खनिजों के लिए प्रोत्साहन और पट्टा सीमाएं

  • रणनीतिक खनिजों के लिए प्रोत्साहन: महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों (जैसे ग्रेफाइट, फॉस्फेट और पोटाश) के लिए नीलामी प्रीमियम में विशेष छूट दी गई है।
  • यह छूट तब लागू होगी जब ऐसे सभी खनिजों के अनुमानित संसाधनों का मूल्य, उस ब्लॉक के कुल अनुमानित खनिज संसाधनों के 10% से कम हो।
  • खनन पट्टा (ML) समय-सीमा: जिन ब्लॉकों में वन भूमि शामिल है, उनके लिए खनन पट्टा (ML) निष्पादित करने के लिए शुरुआती 3 वर्षों के बाद अधिकतम 2 वर्ष की अतिरिक्त अवधि मिलेगी।
  • जिन ब्लॉकों में वन भूमि शामिल नहीं है, वहां 3 वर्षों के बाद कोई अतिरिक्त अवधि स्वीकृत नहीं की जाएगी (यह प्रावधान 30 मार्च 2026 के बाद नीलाम किए गए ब्लॉकों पर लागू होगा)।
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DEOrbit Exam Note: MMDR Act और क्रिटिकल मिनरल्स: भारत में खनिजों का आवंटन और विनियमन खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR Act) के तहत किया जाता है। हाल ही में भारत सरकार ने 'महत्वपूर्ण खनिजों' (Critical Minerals) की पहचान पर विशेष जोर दिया है (जैसे लिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स) जो भविष्य की प्रौद्योगिकियों, इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपरिहार्य हैं। निजी अन्वेषण एजेंसियों (NPEAs) को सभी खनिजों के लिए अनुमति देना देश के खनन क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करने और आयात निर्भरता को कम करने की दिशा में एक बहुत बड़ा नीतिगत कदम है।

अरुणाचल प्रदेश में 'कमला' और 'कलाई-II' मेगा जलविद्युत परियोजनाओं को मंजूरी

कमला जलविद्युत परियोजना (1720 मेगावाट)

  • प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने 8 अप्रैल 2026 को अरुणाचल प्रदेश में 1720 मेगावाट की 'कमला जलविद्युत परियोजना' (Kamala HEP) को मंजूरी दी है।
  • इस परियोजना के निर्माण के लिए 26,069.50 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है, जिसे 96 महीने में पूरा किया जाएगा।
  • स्थान: यह परियोजना अरुणाचल प्रदेश के कामले, क्रा दादी और कुरुंग कुमे जिलों में स्थित होगी।
  • क्रियान्वयन एजेंसी: इसका निर्माण NHPC लिमिटेड और अरुणाचल प्रदेश सरकार की एक संयुक्त उद्यम कंपनी द्वारा किया जाएगा।

कलाई-II जलविद्युत परियोजना (1200 मेगावाट)

  • कैबिनेट द्वारा अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ (Anjaw) जिले में 1200 मेगावाट क्षमता वाली 'कलाई-II जलविद्युत परियोजना' (Kalai-II HEP) को भी मंजूरी प्रदान की गई है।
  • इस परियोजना की अनुमानित लागत 14,105.83 करोड़ रुपये है और इसके पूरा होने की अनुमानित अवधि 78 महीने तय की गई है।
  • स्थान: कलाई-II का निर्माण अंजॉ जिले में लोहित नदी (Lohit River) पर किया जाएगा। यह लोहित बेसिन की पहली जलविद्युत परियोजना है।
  • क्रियान्वयन एजेंसी: इसे THDC इंडिया लिमिटेड और अरुणाचल प्रदेश सरकार के संयुक्त उद्यम के माध्यम से लागू किया जाएगा।

राज्य को होने वाले प्रमुख लाभ और बाढ़ नियंत्रण

  • मुफ्त बिजली: इन दोनों परियोजनाओं से अरुणाचल प्रदेश राज्य को 12% मुफ्त बिजली मिलेगी।
  • LADF: इसके साथ ही, स्थानीय क्षेत्र विकास कोष (LADF) के लिए 1% अतिरिक्त बिजली आवंटित की जाएगी।
  • बाढ़ नियंत्रण: कमला जलविद्युत परियोजना ब्रह्मपुत्र घाटी में बाढ़ नियंत्रण में भी अत्यधिक सहायक होगी।
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DEOrbit Exam Note:

लोहित नदी (Lohit River) और जलविद्युत क्षमता: 'लोहित नदी' पूर्वी तिब्बत से निकलती है और अरुणाचल प्रदेश से होते हुए असम में ब्रह्मपुत्र नदी में मिल जाती है। इसकी लाल मिट्टी के कारण इसे 'खून की नदी' (River of Blood) भी कहा जाता है। 'कलाई-II' इसी लोहित बेसिन की पहली जलविद्युत परियोजना है। भारत में अरुणाचल प्रदेश को उसकी भौगोलिक स्थिति और तेज बहाव वाली नदियों के कारण देश का 'पॉवरहाउस' (Powerhouse of India) माना जाता है, जहाँ भारत में जलविद्युत उत्पादन की सर्वाधिक संभावनाएं (Potential) मौजूद हैं।


भारत बना दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा 'नवीकरणीय ऊर्जा बाजार'

IRENA की रिपोर्ट: 2025 में 45 गीगावाट नई क्षमता का रिकॉर्ड

  • इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी (IRENA) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नवीकरणीय (Renewable) ऊर्जा बाजार बन गया है।
  • इस सूची में चीन पहले स्थान पर और अमेरिका दूसरे स्थान पर है।
  • भारत ने एक साल के भीतर करीब 45 गीगावाट (GW) नई नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता ग्रिड में जोड़ी है।
  • इस नई क्षमता वृद्धि में मुख्य रूप से सौर (Solar) और पवन (Wind) ऊर्जा का सर्वाधिक योगदान रहा है।
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DEOrbit Exam Note: IRENA (International Renewable Energy Agency): यह नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने वाला प्रमुख अंतर-सरकारी संगठन है। इसकी स्थापना 2009 में हुई थी और इसका मुख्यालय अबू धाबी (UAE) में स्थित है। भारत 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है।

'खनिज रियायत नियमावली 2026' में महत्वपूर्ण तीसरे संशोधन की अधिसूचना जारी

निम्न श्रेणी के हेमेटाइट लौह अयस्क (BHQ और BHJ) के 'औसत विक्रय मूल्य' का नया फॉर्मूला

  • खान मंत्रालय ने 10 अप्रैल 2026 को 'खनिज (परमाणु और हाइड्रोकार्बन ऊर्जा खनिजों के अलावा) रियायत (तीसरा संशोधन) नियम, 2026' को आधिकारिक रूप से अधिसूचित किया है।
  • इस संशोधन के तहत, निर्धारित 'सीमा मूल्य' (Threshold Value) से नीचे के हेमेटाइट लौह अयस्क के 'औसत विक्रय मूल्य' (ASP) की गणना के लिए एक नई कार्यप्रणाली प्रदान की गई है।
  • इस नई नीति में मुख्य रूप से लौह अयस्क की प्रमुख आधार चट्टानें- बैंडेड हेमेटाइट क्वार्टजाइट (BHQ) और बैंडेड हेमेटाइट जैस्पर (BHJ) शामिल हैं।
  • ASP की नई गणना विधि: 35% से 45% (से कम) लौह अयस्क श्रेणी के लिए ASP, (45-51% श्रेणी के ASP) के 75% के बराबर होगा। वहीं, 35% से कम श्रेणी के लिए यह 50% के बराबर होगा।
  • रॉयल्टी पर स्पष्टीकरण: संशोधन में स्पष्ट किया गया है कि खदान से निकले कच्चे माल के प्रसंस्करण के नाम पर खनिज का आर्थिक मूल्य कम नहीं किया जा सकता। यदि ऐसा होता है, तो प्रारंभिक जांच के बाद बचे कच्चे माल पर रॉयल्टी लागू होगी।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स: सीमा मान (Threshold Value): यह वह अधिकतम सीमा है जिसके नीचे खनन से प्राप्त सामग्री को 'अपशिष्ट' (Waste) मानकर हटा दिया जाता है। हेमेटाइट लौह अयस्क के लिए यह न्यूनतम 45 प्रतिशत 'Fe' (Iron) निर्धारित है। इस नए संशोधन का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब निम्न श्रेणी (BHQ/BHJ) के संसाधनों का भी संवर्धन (Beneficiation) करके इस्पात निर्माण में उपयोग हो सकेगा। इससे उच्च श्रेणी के लौह अयस्क संसाधनों के तेजी से खत्म होने (क्षय) की समस्या हल होगी और देश लंबे समय तक लौह अयस्क में आत्मनिर्भर बना रहेगा।

MNRE ने 'हाइड्रोजन स्टार्टअप इकोसिस्टम' पर प्रदर्शनी का किया आयोजन

18 नवाचारी स्टार्टअप्स ने 'हरित हाइड्रोजन' (Green Hydrogen) प्रौद्योगिकियों का किया प्रदर्शन

  • नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने भारत में हरित हाइड्रोजन स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को बढ़ावा देने के लिए एक दिवसीय प्रदर्शनी का आयोजन किया।
  • इस प्रदर्शनी में 18 होनहार स्टार्टअप्स ने इलेक्ट्रोलाइज़र तकनीक, ईंधन सेल (Fuel Cell), बायोमास से हाइड्रोजन उत्पादन और सुरक्षित भंडारण जैसी अपनी नवीनतम प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया।
  • कार्यक्रम में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) प्रोफेसर अजय कुमार सूद और MNRE के सचिव श्री संतोष सारंगी सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।
  • मंत्रालय ने नवाचार को बढ़ावा देने के लिए 100 करोड़ रुपये के बजट के साथ एक पायलट योजना शुरू की थी, जिसके तहत प्रति स्टार्टअप अधिकतम 5 करोड़ रुपये का अनुदान (Grant) दिया जा रहा है।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स: भारत में हाइड्रोजन स्टार्टअप्स: उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2025 तक भारत के हाइड्रोजन क्षेत्र में कुल 249 स्टार्टअप पंजीकृत हो चुके हैं। इस प्रदर्शनी में मुख्य रूप से 5 इलेक्ट्रोलाइज़र, 2 हाइड्रोजन उत्पादन, 2 ड्रोन, 3 हाइड्रोजन कुकिंग और 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता' (AI) आधारित स्टार्टअप्स ने हिस्सा लिया, जो भारत के 'राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन' की बढ़ती सफलता और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।

भारत-ईरान कच्चा तेल व्यापार पुनरुद्धार

प्रमुख बिंदु

  • करीब 7 साल बाद भारत को ईरान से कच्चे तेल की खेप प्राप्त हुई है।
  • ईरान का 'फेलिसिटी' टैंकर गुजरात के सिक्का पोर्ट और 'जया' टैंकर ओडिशा के पारादीप पोर्ट पहुंचा।
  • यह व्यापार अमेरिका द्वारा समुद्र में पहले से मौजूद तेल बेचने की अस्थायी अनुमति के बाद संभव हुआ है।

भारत का कोयला उत्पादन 1 बिलियन टन के पार: एक ऐतिहासिक उपलब्धि

ऐतिहासिक मील का पत्थर और ऊर्जा सुरक्षा

  • भारत ने अपने ऊर्जा इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1 बिलियन टन (1000 मिलियन टन) से अधिक कोयला और लिग्नाइट उत्पादन का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है।
  • केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने इस अभूतपूर्व उपलब्धि पर सभी हितधारकों को बधाई दी है, जो देश की बढ़ती ऊर्जा और बिजली की मांग को पूरा करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • यह बड़ी उपलब्धि 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण के बिल्कुल अनुरूप है, जिसका मुख्य उद्देश्य कोयले के आयात पर देश की निर्भरता को कम करना और घरेलू उत्पादन को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है।

कोयला उत्पादन: प्रमुख योगदानकर्ता और उपाय

क्षेत्र / संस्था उत्पादन और योगदान का विवरण
कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) देश के कुल कोयला उत्पादन में हमेशा की तरह सबसे बड़ा हिस्सा CIL का रहा है, जिसने अपनी उत्पादन क्षमता और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में जबरदस्त सुधार किया है।
कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानें कैप्टिव (Captive) और वाणिज्यिक (Commercial) खदानों के शानदार और रिकॉर्ड-तोड़ प्रदर्शन ने इस 1 बिलियन टन के लक्ष्य को हासिल करने में 'गेम-चेंजर' की भूमिका निभाई है।
लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचा 'पीएम गतिशक्ति' योजना के तहत रेलवे रेक की बेहतर उपलब्धता और फर्स्ट-माइल कनेक्टिविटी (FMC) परियोजनाओं के विस्तार से कोयले की निर्बाध निकासी सुनिश्चित हुई है।
DEOrbit परीक्षा नोट्स: भारत में कोयला वाणिज्यिक ऊर्जा खपत का सबसे बड़ा स्रोत है और इसे देश की अर्थव्यवस्था का 'ब्लैक गोल्ड' (Black Gold) भी कहा जाता है। 1 बिलियन टन (1000 मिलियन टन) उत्पादन का लक्ष्य हासिल करना न केवल थर्मल पावर प्लांट (ताप विद्युत संयंत्रों) को निर्बाध ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करेगा, बल्कि देश के विशाल विदेशी मुद्रा भंडार को भी बचाएगा, जिसे पहले मजबूरी में कोयला आयात पर खर्च किया जाता था।

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