Thursday, 23 April 2026

उद्योग, व्यापार एवं कॉर्पोरेट

भारत बनेगा चिप हब: ₹1.20 लाख करोड़ निवेश

इंडियन सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 2.0

  • केंद्र सरकार ने सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए ₹1.20 लाख करोड़ का भारी निवेश योजना बनाई।
  • इस मिशन के तहत देश में चिप डिजाइन, रिसर्च और इनोवेशन पर जोर दिया जाएगा।

2 और 3 नैनोमीटर (एनएम) चिप विकास

  • सरकार 2 और 3 एनएम तक की एडवांस टेक्नोलॉजी के विकास पर विशेष ध्यान देगी।
  • आईएसएम के तहत 10 प्रोड्यूसर्स को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है।

टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम का विकास

  • भारत सरकार का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है।
  • सरकार की इस योजना से भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बन सकेगा।
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DEOrbit Exam Note: भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार का लगभग 5% हिस्सा है और 2030 तक इसे 10% तक बढ़ाने का लक्ष्य है।

आर्थिक परिदृश्य: भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में रिकॉर्ड बिक्री (FY 2025-26)

नया बिक्री रिकॉर्ड एवं कारण

  • वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान घरेलू बाजार में रिकॉर्ड करीब 47 लाख कारें बिकीं, जो वर्ष 2024-25 के रिकॉर्ड से भी 8.3% ज्यादा है।
  • इस भारी उछाल का मुख्य कारण 'जीएसटी-2.0' (GST-2.0) के तहत टैक्स में की गई कटौती को माना जा रहा है।
  • ईरान संकट जैसी वैश्विक चुनौतियों के बीच भी भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार ने यह नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

बाजार का बदलता रुझान (Market Trend)

  • मध्यम वर्ग के ग्राहकों का रुझान छोटी हैचबैक कारों के बजाय मिड-साइज एसयूवी (Mid-size SUV) और प्रीमियम फीचर्स वाली कारों की तरफ बढ़ा है।
  • आंकड़ों के अनुसार, हैचबैक के मुकाबले मिड-साइज एसयूवी की बिक्री 6 गुना ज्यादा रही है।

प्रमुख कंपनियों का प्रदर्शन

  • मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki): एक साल में रिकॉर्ड 24.2 लाख कारें बेचकर अब तक की सबसे बड़ी सालाना बिक्री दर्ज की है (मार्च में 16.7% की वृद्धि)।
  • हुंडई मोटर (Hyundai): भारत में अब तक की सबसे ज्यादा बिक्री दर्ज की गई है।
  • टाटा मोटर्स व महिंद्रा: टाटा मोटर्स की कारों की बिक्री में 29% और महिंद्रा में 21% की जबरदस्त ग्रोथ देखने को मिली है।
  • रेनो इंडिया (Renault India): मार्च महीने में सबसे ज्यादा उछाल (77% की वृद्धि) रेनो इंडिया की बिक्री में दर्ज किया गया।
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DEOrbit Exam Note: GST (वस्तु एवं सेवा कर): भारत में GST 1 जुलाई 2017 को 101वें संविधान संशोधन अधिनियम के तहत लागू किया गया था। यह एक अप्रत्यक्ष कर है। ऑटोमोबाइल सेक्टर भारत की जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान देता है और रोजगार सृजन का एक प्रमुख साधन है।

अर्थव्यवस्था: CBIC द्वारा SEZ इकाइयों के लिए सीमा शुल्क में बड़ी रियायत और राहत पैकेज

राहत योजना के मुख्य बिंदु और कट-ऑफ (Cut-off)

  • केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने केंद्रीय बजट 2026-27 की घोषणाओं के अनुरूप, 'विशेष आर्थिक क्षेत्रों' (SEZ) की पात्र इकाइयों के लिए एकमुश्त राहत उपाय लागू किया है।
  • यह योजना वैश्विक व्यापार व्यवधानों (Global trade disruptions) से निपटने के लिए लाई गई है, जिसके तहत SEZ इकाइयां अब 'घरेलू टैरिफ क्षेत्र' (DTA) में रियायती सीमा शुल्क (Concessional Customs Duty) पर अपना निर्मित माल बेच सकेंगी।
  • यह विशेष राहत अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक (यानी एक वर्ष के लिए) प्रभावी रहेगी।
  • इस योजना का लाभ उठाने के लिए केवल उन्हीं परिचालनशील SEZ इकाइयों को पात्र माना जाएगा, जिन्होंने 31 मार्च 2025 (कट-ऑफ तिथि) या उससे पहले माल का उत्पादन शुरू कर दिया था।

योजना की प्रमुख शर्तें, सीमाएं और कर-रियायत

  • मूल्यवर्धन (Value Addition): इस राहत योजना का दावा करने वाली इकाइयों द्वारा निर्मित वस्तुओं में इनपुट (कच्चे माल) की तुलना में न्यूनतम 20 प्रतिशत का मूल्यवर्धन होना अनिवार्य है।
  • बिक्री सीमा (Sales Cap): DTA (घरेलू बाजार) में रियायती दरों पर की जाने वाली यह बिक्री, पिछले तीन वित्तीय वर्षों में से किसी भी वर्ष के 'उच्चतम वार्षिक FOB (Free on Board) निर्यात मूल्य' के 30 प्रतिशत तक ही सीमित रहेगी।
  • सीमा शुल्क में भारी छूट: वस्तुओं पर लगने वाले शुल्क में बड़ी राहत दी गई है। उदाहरण के लिए— जिन वस्तुओं पर 20% सीमा शुल्क लगता था, उसे घटाकर 12.5% कर दिया गया है; और 30-40% वाले स्लैब को घटाकर 20% कर दिया गया है।
  • घरेलू उद्योग की सुरक्षा: इस योजना का मुख्य फोकस अभी भी निर्यात पर ही रहेगा। घरेलू उद्योगों को नुकसान से बचाने के लिए कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को इस योजना से बाहर रखा गया है। इसे CBIC की 'फेसलेस असेसमेंट' (Faceless Assessment) प्रणाली के माध्यम से लागू किया जाएगा।
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DEOrbit Exam Note: SEZ (विशेष आर्थिक क्षेत्र) और DTA: 'विशेष आर्थिक क्षेत्र' (Special Economic Zone) देश के भीतर ऐसे विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र होते हैं जहाँ के आर्थिक और व्यापारिक कानून देश के बाकी हिस्सों से अलग और अधिक उदार होते हैं। देश के बाकी हिस्से को 'घरेलू टैरिफ क्षेत्र' (Domestic Tariff Area - DTA) कहा जाता है। SEZ का मुख्य उद्देश्य विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित करना और निर्यात को बढ़ावा देना है। भारत में 'SEZ अधिनियम' वर्ष 2005 में पारित हुआ था और 2006 में लागू हुआ था। उल्लेखनीय है कि एशिया का पहला 'निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्र' (EPZ) 1965 में भारत के कांडला (गुजरात) में स्थापित किया गया था।

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) ने 18.4 लाख करोड़ रुपये के जीएमवी (GMV) का ऐतिहासिक आंकड़ा किया पार

GeM की अभूतपूर्व वृद्धि और FY 2025-26 के शानदार आंकड़े

  • भारत सरकार के प्रमुख डिजिटल सार्वजनिक खरीद मंच 'गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस' (GeM) ने कुल मिलाकर 18.4 लाख करोड़ रुपये का सकल व्यापार मूल्य (Gross Merchandise Value - GMV) हासिल कर एक नया ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है।
  • इस शानदार उपलब्धि में अकेले वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 5 लाख करोड़ रुपये के जीएमवी का आंकड़ा पार करना भी शामिल है, जो इसे भारत की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बनाता है।
  • GeM के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) श्री मिहिर कुमार ने मीडिया को संबोधित करते हुए इसे एक पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-संचालित खरीद प्रणाली के रूप में रेखांकित किया है, जिस पर खरीदारों और विक्रेताओं का गहरा विश्वास है।
  • इस प्लेटफॉर्म को केंद्रीय मंत्रालयों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) के अलावा राज्यों द्वारा भी व्यापक रूप से अपनाया जा रहा है; जिसके परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 2025-26 में राज्यों द्वारा की गई खरीद में 38.3 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।

MSME, महिला उद्यमी और स्टार्टअप्स की ऐतिहासिक भागीदारी

  • समावेशी विकास को बढ़ावा देते हुए, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान GeM पर कुल ऑर्डरों में से 68 प्रतिशत ऑर्डर सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (MSMEs) द्वारा निष्पादित किए गए, जो कुल जीएमवी का 47.1 प्रतिशत है।
  • वर्तमान में इस प्लेटफॉर्म पर 11 लाख से अधिक MSME पंजीकृत हैं, जिन्हें पिछले वित्त वर्ष में 2.36 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 51 लाख से अधिक ऑर्डर प्राप्त हुए (जो 20% की शानदार वृद्धि दर्शाता है)।
  • महिला नेतृत्व वाले 2.1 लाख से अधिक MSMEs ने इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से 28,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर प्राप्त कर 28% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है।
  • हाशिए पर मौजूद वर्गों को सशक्त बनाते हुए, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (SC/ST) के MSMEs को 6,000 करोड़ रुपये (28% वृद्धि) और स्टार्टअप (Startup) उद्यमों को 19,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर प्राप्त हुए हैं (36% की असाधारण वृद्धि)।

AI और मशीन लर्निंग (ML) से सुनिश्चित होती पारदर्शिता और सुरक्षा

  • GeM के सुचारू और पारदर्शी संचालन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग (ML) और उन्नत विश्लेषण (Advanced Analytics) की सबसे महत्वपूर्ण और केंद्रीय भूमिका है।
  • मानवीय त्रुटियों को कम करने के लिए 'एमएल-आधारित कैटलॉग सत्यापन' और लेनदेन व अनियमितताओं की निगरानी के लिए 'वास्तविक समय विश्लेषण' (Real-time analytics) का उपयोग किया जा रहा है।
  • सिस्टम को सुरक्षित बनाने के लिए उन्नत विश्लेषणात्मक उपकरणों द्वारा असामान्य मूल्य निर्धारण, संदिग्ध मिलीभगत वाली बोली (Cartelization/Collusion) और तकनीकी विसंगतियों के पैटर्न की सटीक पहचान की जाती है।
  • इसके साथ ही, खरीद प्रणाली में विश्वास को मजबूत करने और बेहतर निर्णय लेने में सहायता के लिए 'बिड हेल्थ स्कोर' (Bid Health Score) जैसी नवीन सिस्टम-आधारित प्रणालियों का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है।
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DEOrbit Exam Note: गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM): यह भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) द्वारा आवश्यक सामान्य उपयोग की वस्तुओं और सेवाओं की ऑनलाइन खरीद की सुविधा के लिए एक वन-स्टॉप 'राष्ट्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल' है। इसे 9 अगस्त 2016 को वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry) के तत्वावधान में लॉन्च किया गया था। 'सामान्य वित्तीय नियम' (GFR - General Financial Rules) 2017 के नियम 149 के तहत सरकारी खरीदारों के लिए GeM पोर्टल के माध्यम से वस्तुओं और सेवाओं की खरीद करना अनिवार्य कर दिया गया है।

वस्त्र मंत्रालय ने जारी की 'टेक्सटाइल्स एंड क्लोथिंग मार्केट: नेशनल हाउसहोल्ड सर्वे 2024' रिपोर्ट

रिपोर्ट का विमोचन और घरेलू बाजार के ऐतिहासिक आंकड़े

  • केंद्रीय कपड़ा मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने 'टेक्सटाइल्स एंड क्लोथिंग मार्केट: नेशनल हाउसहोल्ड सर्वे 2024' नामक एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की है, जो भारत में कपड़ों (T&A) की घरेलू मांग का विस्तृत आकलन करती है।
  • वस्त्र समिति (Textiles Committee) द्वारा किए गए इस अध्ययन के अनुसार, पिछले 15 वर्षों में भारतीय कपड़ा बाजार के आकार में भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जो वर्ष 2010 के 4.89 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2024 में 14.95 लाख करोड़ रुपये (8.3% CAGR) हो गया है।
  • अध्ययन से पता चलता है कि देश में कपड़ों की 'प्रति व्यक्ति मांग' (Per Capita Demand) वर्ष 2010 के 2,119 रुपये से बढ़कर वर्ष 2024 में 6,066 रुपये हो गई है, जो 7.8% की मजबूत वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) को दर्शाती है।
  • कुल 14.95 लाख करोड़ रुपये के बाजार आकार में से, घरेलू मांग का योगदान 2024 में 8.77 लाख करोड़ रुपये आंका गया है, जो देश की अर्थव्यवस्था में कपड़ा क्षेत्र की अत्यंत मजबूत भूमिका को प्रमाणित करता है।

फाइबर प्राथमिकताएं: MMF का दबदबा और कपास की वृद्धि

  • बाजार की प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव देखा गया है, जहाँ अब 'मैनमेड फाइबर' (MMF) और ब्लेंडेड फाइबर आधारित उत्पादों का दबदबा 52.2% हो गया है, जबकि कपास (Cotton) आधारित उत्पादों का योगदान 41.2% है।
  • आंकड़ों के अनुसार, एमएमएफ (MMF) और ब्लेंडेड कपड़ों की मांग सबसे अधिक रही, जो 1.47 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 4.47 लाख करोड़ रुपये हो गई है (8.26% CAGR)।
  • कपास (Cotton) दूसरा सबसे महत्वपूर्ण फाइबर बना हुआ है, जिसकी कुल मांग 0.87 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 3.53 लाख करोड़ रुपये (10.53% CAGR) हो गई है।
  • प्राकृतिक रेशों में, रेशम (Silk) और ऊन (Wool) आधारित उत्पादों की मांग में भी इसी अवधि के दौरान क्रमशः 8.93% और 7.02% की मजबूत वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की गई है।

उपभोक्ता रुझान: महिला खरीदार आगे और तकनीकी वस्त्रों की मांग

  • अध्ययन स्पष्ट रूप से दिखाता है कि कपड़ा उत्पादों की प्रमुख खरीदार महिलाएं हैं, जिन्होंने कुल कपड़ा खरीद में 55.5% का योगदान दिया है, जबकि पुरुषों का योगदान 44.5% रहा है।
  • भारतीय उपभोक्ताओं के बीच 'टिकाऊ और रीसाइकिल' (Sustainable/Recycled) कपड़ों को अपनाने की बढ़ती मांग देखी गई है; वर्ष 2024 में टिकाऊ कपड़ों की कुल मांग 37,000 करोड़ रुपये अनुमानित है।
  • रिपोर्ट ने घरेलू उपयोग में 'तकनीकी वस्त्रों' (Technical Textiles) जैसे मास्क, सैनिटरी नैपकिन, डायपर, कार सीट कवर और सर्जिकल डिस्पोजेबल के बढ़ते उपयोग को भी प्रमुखता से रेखांकित किया है।
  • ध्यान देने योग्य रोचक तथ्य यह है कि तकनीकी कपड़ों के घरेलू उपयोग में ग्रामीण इकाइयों की हिस्सेदारी लगभग 58% है, जो शहरी क्षेत्रों (लगभग 42%) के मुकाबले काफी अधिक है।
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DEOrbit Exam Note: वस्त्र समिति और राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन: वस्त्र समिति (Textiles Committee) कपड़ा मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) है, जिसकी स्थापना 'वस्त्र समिति अधिनियम, 1963' के तहत की गई थी। इसका मुख्य कार्य वस्त्रों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। रिपोर्ट में उल्लिखित 'मैनमेड फाइबर' (MMF) कृत्रिम रेशे होते हैं, जैसे पॉलिएस्टर, विस्कोस और नायलॉन। प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है कि भारत सरकार ने देश को तकनीकी वस्त्रों में वैश्विक लीडर बनाने के लिए 'राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन' (NTTM) की शुरुआत की है, जिसके तहत मेडिकल टेक्सटाइल (मेडिटेक), एग्रो टेक्सटाइल (एग्रोटेक) आदि को बढ़ावा दिया जा रहा है।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए 'उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना' (PLISFPI) की शानदार सफलता

योजना की रूपरेखा, वित्तीय परिव्यय और मुख्य घटक

  • खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) द्वारा भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को मजबूत करने और वैश्विक बाजारों में भारतीय ब्रांडों को बढ़ावा देने के लिए 'पीएलआईएसएफपीआई' (PLISFPI) योजना शुरू की गई है।
  • यह महत्वाकांक्षी योजना वित्तीय वर्ष 2021-22 से वर्ष 2026-27 तक (छह वर्षों की अवधि के लिए) लागू की जा रही है।
  • इस योजना के लिए कुल वित्तीय परिव्यय (Budget Outlay) 10,900 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है।
  • योजना के तीन मुख्य घटक हैं: पहला- चार प्रमुख खाद्य उत्पाद श्रेणियों (रेडी-टू-कुक/रेडी-टू-ईट (RTC/RTE), प्रसंस्कृत फल और सब्जियां, समुद्री उत्पाद और मोज़ेरेला चीज़) के उत्पादन को प्रोत्साहन देना; दूसरा- SME के जैविक उत्पादों का समर्थन करना; और तीसरा- विदेशों में ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए अनुदान देना।

निवेश, रोजगार सृजन और SME क्षेत्र की भागीदारी

  • इस योजना के तहत देश भर में 274 इकाइयों को शामिल करते हुए कुल 128 कंपनियों को मंजूरी दी गई है, जिसमें 68 MSME आवेदक भी शामिल हैं, जो योजना के समावेशी स्वरूप को दर्शाता है।
  • निवेश का प्रदर्शन अत्यंत उत्साहजनक रहा है; 7,722 करोड़ रुपये के निर्धारित निवेश के मुकाबले 22 राज्यों में कंपनियों ने अपनी प्रारंभिक प्रतिबद्धताओं से अधिक निवेश किया है।
  • इस योजना के परिणामस्वरूप प्रति वर्ष लगभग 34 लाख मीट्रिक टन प्रसंस्करण क्षमता में वृद्धि हुई है।
  • रोजगार के मोर्चे पर, इस योजना से अब तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 3.29 लाख लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है।
  • पीएलआई उत्पादों की बिक्री में 10.58% और निर्यात में 7.41% की मजबूत चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की गई है।

बाजरा (Millets) उत्पादों को अभूतपूर्व प्रोत्साहन

  • वर्ष 2023 को 'अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष' घोषित किए जाने के मद्देनजर, मंत्रालय ने RTC/RTE उत्पादों में बाजरा (Millets) के उपयोग को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया है।
  • पीएलआई योजना के प्रयासों के कारण बाजरा आधारित उत्पादों की बिक्री वित्त वर्ष 2022-23 के 345.73 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 1845.25 करोड़ रुपये हो गई है।
  • इसी अवधि में उद्योगों द्वारा बाजरा की खरीद 1103.18 मीट्रिक टन से बढ़कर 17089.16 मीट्रिक टन हो गई है, जो 15 गुना की भारी वृद्धि को दर्शाता है।
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DEOrbit Exam Note: PLI योजना और अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष: उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI - Production Linked Incentive) योजना भारत सरकार की एक पहल है, जिसका उद्देश्य घरेलू विनिर्माण क्षमता को बढ़ाना और आयात निर्भरता को कम करना है। इसे शुरुआत में मार्च 2020 में लॉन्च किया गया था और अब यह 14 प्रमुख क्षेत्रों (Sectors) में लागू है, जिनमें से एक 'खाद्य प्रसंस्करण' (Food Processing) है। इसके अलावा, परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि भारत के प्रस्ताव पर ही संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने वर्ष 2023 को 'अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष' (International Year of Millets - IYM 2023) घोषित किया था। भारत सरकार बाजरा (मोटे अनाज) को 'श्री अन्न' (Shree Anna) के नाम से प्रमोट कर रही है।

भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा इस्पात उत्पादक

वित्तीय वर्ष 2025-26 में 168.4 मिलियन टन उत्पादन

  • वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत ने 168.4 मिलियन टन कच्चे इस्पात (Crude Steel) का रिकॉर्ड उत्पादन किया है।
  • इस उत्पादन के साथ भारत ने इस्पात उत्पादन में दुनिया में अपना दूसरा स्थान बरकरार रखा है।
  • विशेष बात यह है कि भारत फिर से इस्पात का 'शुद्ध निर्यातक' (Net Exporter) बन गया है, जिसमें कुल निर्यात 6.6 मिलियन टन रहा (निर्यात में 35.9% की वृद्धि दर्ज की गई)।

इस्पात क्षेत्र में नवाचार के लिए 'SRTMI R&D कनेक्ट' कार्यशाला का आयोजन

कार्यशाला का उद्घाटन और SRTMI की भूमिका

  • केंद्रीय इस्पात और भारी उद्योग मंत्री श्री एच.डी. कुमारस्वामी ने 7 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में एक उच्च-स्तरीय कार्यशाला का उद्घाटन किया।
  • इस कार्यशाला का मुख्य विषय (Theme) "एसआरटीएमआई आर एंड डी कनेक्ट: विचारों से औद्योगिक प्रभाव तक" (SRTMI R&D Connect: Ideas to Industrial Impact) था।
  • यह आयोजन 'इस्पात अनुसंधान और प्रौद्योगिकी मिशन ऑफ इंडिया' (SRTMI) द्वारा आयोजित किया गया, जो भारत के इस्पात मंत्रालय और प्रमुख भारतीय इस्पात उत्पादकों की एक संयुक्त पहल है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य रणनीतिक नवाचार और अंतर-क्षेत्रीय सहयोग के माध्यम से भारतीय इस्पात क्षेत्र को मजबूत करना है।

मुख्य फोकस: डीकार्बोनाइजेशन, चक्रीय अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप्स

  • मंत्री महोदय ने 'विकसित भारत' की तर्ज पर इस्पात क्षेत्र को पारंपरिक विकास से हटाकर एक 'चक्रीय अर्थव्यवस्था' (Circular Economy) के रूप में विकसित करने और 'हरित कार्बन उत्सर्जन' (Decarbonization) को कम करने वाले भविष्य की ओर बढ़ने का आह्वान किया।
  • कार्यशाला में 'स्टार्टअप इकोसिस्टम' को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित पिच सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रक्रिया दक्षता, डिजिटलीकरण, अपशिष्ट उपयोग (Waste utilization) और उन्नत सामग्रियों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
  • इस मंच ने 'नवाचार प्रयोगशालाओं' (Research) के विचारों को सीधे 'कारखानों' (Industry) के परिणामों में परिवर्तित करने के लिए एक रणनीतिक सेतु (Bridge) के रूप में कार्य किया।

उद्योग-अकादमिक साझेदारी (Industry-Academia Partnership)

  • इस मेगा इवेंट में SAIL, टाटा स्टील, JSW, AM/NS जैसी प्रमुख इस्पात उत्पादक कंपनियों ने हिस्सा लिया।
  • इसके साथ ही IIT बॉम्बे, IIT कानपुर, NIT त्रिची और CSIR-IMMT जैसे देश के शीर्ष तकनीकी और अनुसंधान संस्थानों के शिक्षाविदों ने भी अपनी प्रस्तुतियां दीं।
  • उद्योग जगत के दिग्गजों ने 'डीकार्बोनाइजेशन' और संसाधन दक्षता जैसी वास्तविक औद्योगिक चुनौतियों को शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स के सामने रखा ताकि उनके व्यावहारिक समाधान खोजे जा सकें।
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DEOrbit Exam Note: SRTMI (Steel Research and Technology Mission of India): SRTMI की स्थापना भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय द्वारा लौह और इस्पात क्षेत्र में राष्ट्रीय महत्व के अनुसंधान और विकास (R&D) को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। इसके अलावा, 'ग्रीन स्टील' (Green Steel) वर्तमान में एक अत्यंत महत्वपूर्ण टॉपिक है; यह एक ऐसी अवधारणा है जिसमें स्टील के निर्माण में जीवाश्म ईंधन (जैसे कोयला) के बजाय नवीकरणीय ऊर्जा या ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग किया जाता है ताकि कार्बन उत्सर्जन को शून्य किया जा सके।

वाणिज्य मंत्रालय ने 'वाणिज्य विभाग' के लिए नई एकीकृत वेबसाइट और ऐप किया लॉन्च

22 भाषाओं में सपोर्ट (भाषिणी API) और 'कारोबारी सुगमता' को बढ़ावा

  • वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने 15 अप्रैल 2026 को निर्यातकों, आयातकों और हितधारकों को व्यापार संबंधी जानकारी देने के लिए एक आधुनिक और एकीकृत वेबसाइट लॉन्च की है।
  • इस पहल के तहत एक नया द्विभाषी (Bilingual) मोबाइल एप्लिकेशन (एंड्रॉइड/आईओएस) भी पेश किया गया है, जिसमें ऑफ़लाइन एसएमएस (SMS) और जीपीएस (GPS) जैसी उन्नत सुविधाएं शामिल हैं।
  • यह नया प्लेटफॉर्म भारत सरकार की 'भारतीय सरकारी वेबसाइटों के लिए दिशानिर्देश' (GIGW) और 'डिजिटल ब्रांड आइडेंटिटी मैनुअल' (DBIM) 3.0 का पूर्णतया अनुपालन करता है।
  • इस वेबसाइट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें व्यापक पहुंच के लिए 'भाषिणी एपीआई' (Bhashini API) का उपयोग किया गया है, जिससे सामग्री 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होगी।
  • इस पूरी पहल का मुख्य उद्देश्य विदेशी व्यापार में पारदर्शिता, दक्षता और 'कारोबारी सुगमता' (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देना है।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स: प्रमुख एकीकरण (Major Integrations): इस नई वेबसाइट को कई अन्य महत्वपूर्ण सरकारी पोर्टलों के साथ जोड़ा गया है। प्रादेशिक और कमोडिटी व्यापार डेटा के लिए इसे 'ट्रेड इंटेलिजेंस एंड एनालिटिक्स (TIE)' पोर्टल से एकीकृत किया गया है। इसके अलावा, संसदीय प्रश्नों के स्वचालित अद्यतन के लिए 'संसद पोर्टल' से, और शिकायतों के निर्बाध निवारण के लिए इसे 'CPGRAMS' (केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली) के साथ भी जोड़ा गया है।

वस्त्र मंत्रालय की 'विश्व सूत्र' पहल का फेमिना मिस इंडिया के साथ ऐतिहासिक सहयोग

'विश्व के लिए भारत की बुनाई' थीम के तहत वैश्विक मंच पर भारतीय हथकरघा का होगा प्रदर्शन

  • केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के 'हथकरघा विकास आयुक्त कार्यालय' ने अपनी विशेष पहल "विश्व सूत्र - विश्व के लिए भारत की बुनाई" के लिए 'फेमिना मिस इंडिया' के साथ पहली बार ऐतिहासिक सहयोग किया है।
  • इस पहल के तहत फेमिना मिस इंडिया सौंदर्य प्रतियोगिता के ग्रैंड फिनाले में भारतीय बुनकरों की कलात्मकता को दर्शाने वाला एक विशेष हथकरघा संग्रह प्रस्तुत किया जाएगा।
  • इस सहयोग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विजेता प्रतिभागी अपने-अपने क्षेत्र की विशिष्ट बुनाई परंपरा से प्रेरित हथकरघा परिधानों का रचनात्मक प्रदर्शन करेंगी।
  • इस दौरान वाराणसी ब्रोकेड, कांचीपुरम, कोटा डोरिया, पटोला, इकत, पश्मीना और मूंगा सिल्क जैसी भारत की लोकप्रिय बुनाई पहनावे का प्रदर्शन किया जाएगा।
  • हथकरघा विकास आयुक्त डॉ. एम. बीना के अनुसार, इसका मुख्य उद्देश्य युवा वर्ग, फैशन जगत और अंतर्राष्ट्रीय उपभोक्ताओं के बीच भारतीय हथकरघा की पहुंच बढ़ाना है।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स: हथकरघा क्षेत्र का आर्थिक महत्व: कृषि के बाद यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता क्षेत्र है, जो 35 लाख से अधिक बुनकरों और श्रमिकों को आजीविका प्रदान करता है। यह पहल भारत सरकार के 'वोकल फॉर लोकल टू ग्लोबल' दृष्टिकोण और प्रधानमंत्री के '5F विजन' (Farm to Fibre to Factory to Fashion to Foreign) के पूर्णतया अनुरूप है, जो भारतीय सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक वस्त्र और फैशन बाजारों में स्थापित करने का प्रयास है।

'भारत-यूएसए ट्रेड फैसिलिटेशन पोर्टल' लॉन्च

'मिशन 500' के तहत 500 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य

  • भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को सुगम बनाने के लिए 'भारत-यूएसए ट्रेड फैसिलिटेशन पोर्टल' लॉन्च किया गया है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय निर्यातकों और अमेरिकी आयातकों के बीच सीधा संपर्क स्थापित करना है।
  • यह महत्वपूर्ण पहल 'मिशन 500' (यानी 500 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार) के लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगी और निर्यातकों को नए अवसर प्रदान करेगी।

चीन बना भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार

द्विपक्षीय व्यापार अपडेट

  • वित्त वर्ष 2025-26 में चीन, अमेरिका को पछाड़कर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है।
  • भारत और चीन के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 151.1 अरब डॉलर दर्ज किया गया।
  • इससे पहले लगातार 4 वर्षों तक अमेरिका भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर बना हुआ था।
  • जापान के हानेडा एयरपोर्ट को लगातार 10वीं बार दुनिया के सबसे साफ एयरपोर्ट का खिताब मिला है।

नई दिल्ली में 'समुद्री खाद्य निर्यातकों की बैठक 2026' का आयोजन

समुद्री खाद्य निर्यात 68,000 करोड़ रुपये के पार, '1 लाख करोड़' का नया लक्ष्य

  • मत्स्य पालन विभाग द्वारा नई दिल्ली के अंबेडकर भवन में 'सीफूड एक्सपोर्टर्स मीट 2026' का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने की।
  • बैठक में जानकारी दी गई कि भारत का समुद्री खाद्य (Seafood) निर्यात पिछले साल के 62,000 करोड़ रुपये से बढ़कर इस वर्ष लगभग 68,000 करोड़ रुपये के नए मील के पत्थर तक पहुंच गया है।
  • केंद्रीय मंत्री ने निर्यातकों को 1 लाख करोड़ रुपये के निर्यात लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
  • निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मूल्य-वर्धित (Value-added) उत्पादों, ट्रैसेबिलिटी प्रणाली को मजबूत करने और गहरे समुद्र (Deep-sea) में मत्स्य पालन पर विशेष जोर दिया गया।
  • पिछले 11 वर्षों के दौरान भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में औसतन 7% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स: प्रमुख निर्यात बाजार: भारत दुनिया भर के 130 से अधिक देशों में समुद्री उत्पादों का निर्यात करता है। इसमें अमेरिका (USA) सबसे बड़ा आयातक (कुल निर्यात का 35.42% हिस्सा) है, जिसके बाद चीन, यूरोपीय संघ, दक्षिण-पूर्व एशिया और जापान का स्थान आता है। इस महत्वपूर्ण बैठक में MPEDA (समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) और NFDB (राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड) जैसी प्रमुख एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

बेसिल (BECIL) और सी-डैक (C-DAC) के मध्य समझौता

तकनीकी सहयोग

  • ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (BECIL) और सी-डैक (C-DAC) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), 5G और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग हेतु MoU पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • इस साझेदारी का उद्देश्य डिजिटल परिवर्तन, कौशल विकास और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए संयुक्त परियोजनाओं का कार्यान्वयन करना है।
  • क्वांटम अपडेट: आंध्र प्रदेश के अमरावती में देश का पहला क्वांटम कंप्यूटर प्रोजेक्ट लॉन्च किया गया है।

बीएसएनएल (BSNL): वित्त वर्ष 2025-26 के वार्षिक परिणामों की समीक्षा

स्वदेशी दूरसंचार प्रणाली और परिवर्तनकारी प्रदर्शन

  • नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित 'सामरिक समीक्षा एवं योजना बैठक' (SRPM) में केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने बीएसएनएल के प्रदर्शन को "परिवर्तनकारी" बताया।
  • बीएसएनएल ने सफलतापूर्वक 3G प्रदाता से एक प्रतिस्पर्धी 4G कंपनी के रूप में खुद को स्थापित किया है।
  • इस उपलब्धि के साथ भारत दुनिया के उन चुनिंदा पांच देशों के विशिष्ट समूह में शामिल हो गया है जिन्होंने अपनी स्वदेशी दूरसंचार क्षमताएं विकसित की हैं, जो 'आत्मनिर्भर भारत' की परिकल्पना को साकार करता है।
  • वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी के प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व (ARPU) में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष के 71 रुपये से 42 प्रतिशत बढ़कर 101 रुपये हो गया है।

शीर्ष प्रदर्शन करने वाले टेलीकॉम सर्किल

  • सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला सर्किल: ओडिशा सर्किल को सेवाओं से राजस्व में लगभग 21 प्रतिशत की वृद्धि हासिल करने के लिए सम्मानित किया गया।
  • एंटरप्राइज बिजनेस (EB) लीडर्स: ओडिशा सर्किल को एंटरप्राइज बिजनेस सेगमेंट में 68 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के लिए मान्यता प्राप्त हुई। राष्ट्रीय स्तर पर 'एंटरप्राइज बिजनेस वर्टिकल' को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला वर्टिकल घोषित किया गया (राजस्व में 15 प्रतिशत की वृद्धि)।
  • EBITDA और ARPU में सुधार: कर्नाटक सर्किल को EBITDA वृद्धि के लिए, असम और झारखंड को तीनों बिजनेस सेगमेंट में सकारात्मक वृद्धि के लिए, तथा उत्तर प्रदेश (पूर्वी) और झारखंड को ARPU में सुधार के लिए सराहा गया।
DEOrbit परीक्षा नोट्स: 'ARPU' (Average Revenue Per User) दूरसंचार क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण वित्तीय पैमाना है जो यह दर्शाता है कि कोई कंपनी अपने प्रत्येक सक्रिय ग्राहक से औसतन कितना राजस्व कमा रही है। बीएसएनएल के ARPU में 42 प्रतिशत की वृद्धि इसके वित्तीय कायाकल्प का एक बेहद मजबूत संकेत है।

बीएसएनएल (BSNL): वित्त वर्ष 2025-26 के वार्षिक परिणामों की समीक्षा

स्वदेशी दूरसंचार प्रणाली और परिवर्तनकारी प्रदर्शन

  • नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित 'सामरिक समीक्षा एवं योजना बैठक' (SRPM) में केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने बीएसएनएल के प्रदर्शन को "परिवर्तनकारी" बताया।
  • बीएसएनएल ने सफलतापूर्वक 3G प्रदाता से एक प्रतिस्पर्धी 4G कंपनी के रूप में खुद को स्थापित किया है।
  • इस उपलब्धि के साथ भारत दुनिया के उन चुनिंदा पांच देशों के विशिष्ट समूह में शामिल हो गया है जिन्होंने अपनी स्वदेशी दूरसंचार क्षमताएं विकसित की हैं, जो 'आत्मनिर्भर भारत' की परिकल्पना को साकार करता है।
  • वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी के प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व (ARPU) में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष के 71 रुपये से 42 प्रतिशत बढ़कर 101 रुपये हो गया है।

शीर्ष प्रदर्शन करने वाले टेलीकॉम सर्किल

  • सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला सर्किल: ओडिशा सर्किल को सेवाओं से राजस्व में लगभग 21 प्रतिशत की वृद्धि हासिल करने के लिए सम्मानित किया गया।
  • एंटरप्राइज बिजनेस (EB) लीडर्स: ओडिशा सर्किल को एंटरप्राइज बिजनेस सेगमेंट में 68 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के लिए मान्यता प्राप्त हुई। राष्ट्रीय स्तर पर 'एंटरप्राइज बिजनेस वर्टिकल' को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला वर्टिकल घोषित किया गया (राजस्व में 15 प्रतिशत की वृद्धि)।
  • EBITDA और ARPU में सुधार: कर्नाटक सर्किल को EBITDA वृद्धि के लिए, असम और झारखंड को तीनों बिजनेस सेगमेंट में सकारात्मक वृद्धि के लिए, तथा उत्तर प्रदेश (पूर्वी) और झारखंड को ARPU में सुधार के लिए सराहा गया।
DEOrbit परीक्षा नोट्स: 'ARPU' (Average Revenue Per User) दूरसंचार क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण वित्तीय पैमाना है जो यह दर्शाता है कि कोई कंपनी अपने प्रत्येक सक्रिय ग्राहक से औसतन कितना राजस्व कमा रही है। बीएसएनएल के ARPU में 42 प्रतिशत की वृद्धि इसके वित्तीय कायाकल्प का एक बेहद मजबूत संकेत है।

भारत-न्यूजीलैंड ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) हस्ताक्षरित

समझौते के मुख्य बिंदु और व्यापारिक लाभ

  • केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने 27 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड द्वारा भारत के 100 प्रतिशत निर्यातों पर शून्य-शुल्क (Zero-Duty) बाजार पहुंच प्रदान की जाएगी, जिससे कपड़ा, परिधान, चमड़ा, जूते और इंजीनियरिंग सामान जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को अभूतपूर्व लाभ मिलेगा।
  • भारत में कृषि, विनिर्माण उद्योग, ढांचागत विकास, स्टार्ट-अप और उभरती टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए न्यूजीलैंड द्वारा 20 अरब अमरीकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है।

कृषि संरक्षण, सेवा क्षेत्र और पेशेवर अवसर

  • भारत के घरेलू किसानों और डेरी उद्योग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दूध, पनीर, प्याज, चीनी, सेब और खाद्य तेल जैसे उत्पादों को शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच से बाहर (संरक्षित) रखा गया है।
  • कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए 5,000 'अस्थायी रोजगार प्रवेश' (TEE) वीजा का एक विशेष कोटा निर्धारित किया गया है, जो आईटी, इंजीनियरिंग और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में अवसर खोलेगा।
  • भारतीय छात्रों के लिए 'अध्ययन के बाद कार्य वीजा' के तहत विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) स्नातकों को 3 साल तक और डॉक्टरेट (PhD) शोधकर्ताओं को 4 साल तक काम करने का अधिकार मिलेगा।
  • यह समझौता भारतीय 'आयुष' प्रणालियों (आयुर्वेद, योग आदि) की वैश्विक मान्यता को भी बढ़ावा देता है और स्वास्थ्य व पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं के लिए विशेष प्रावधान करता है।
DEOrbit परीक्षा नोट्स: भारत और न्यूजीलैंड के बीच यह व्यापार समझौता भारत द्वारा किसी विकसित देश के साथ किए गए सबसे तेज मुक्त व्यापार समझौतों में से एक है, जो मात्र नौ महीने की बातचीत के बाद संपन्न हुआ है। इसके अलावा, इस समझौते के तहत पारस्परिक मान्यता व्यवस्था (MRA) लागू की जाएगी, जिससे भारत के बासमती चावल और सोयाबीन जैसी जैविक उपज (Organic Products) के निर्यात को प्रशांत क्षेत्र में बड़ी गति मिलेगी।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP): मार्च 2026 के त्वरित अनुमान

औद्योगिक वृद्धि और क्षेत्रीय प्रदर्शन

  • सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में भारत के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) ने वार्षिक आधार पर 4.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है।
  • इससे पिछले महीने यानी फरवरी 2026 में यह वृद्धि दर 5.2 प्रतिशत रही थी।
  • विनिर्माण क्षेत्र के 23 उद्योग समूहों में से 14 ने सकारात्मक वृद्धि दर्ज की है, जिनमें मोटर वाहनों (18.1 प्रतिशत), मशीनरी और उपकरण (11.2 प्रतिशत) तथा बुनियादी धातु (8.6 प्रतिशत) का निर्माण शीर्ष पर है।

क्षेत्रवार औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (मार्च 2026)

क्षेत्र (Sector) सूचकांक (Index) वृद्धि दर (Growth %)
खनन (Mining) 166.8 5.5
विनिर्माण (Manufacturing) 169.4 4.3
बिजली (Electricity) 221.3 0.8
सामान्य सूचकांक (General) 173.2 4.1

उपयोग-आधारित वर्गीकरण

  • उपयोग-आधारित वर्गीकरण के अनुसार मार्च 2026 में सर्वाधिक वृद्धि पूंजीगत वस्तुओं (Capital Goods) में 14.6 प्रतिशत दर्ज की गई।
  • अन्य श्रेणियों की वृद्धि दर: अवसंरचना/निर्माण वस्तुएं (6.7 प्रतिशत), उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं (5.3 प्रतिशत), मध्यवर्ती वस्तुएं (3.3 प्रतिशत), प्राथमिक वस्तुएं (2.2 प्रतिशत) और उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुएं (1.1 प्रतिशत)।
DEOrbit परीक्षा नोट्स: औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) अर्थव्यवस्था में विभिन्न उद्योग समूहों की विकास दर का एक प्रमुख संकेतक है। भारत में IIP की गणना के लिए आधार वर्ष 2011-12 (Base Year 2011-12=100) का उपयोग किया जाता है। यह सूचकांक प्रत्येक माह की 28 तारीख को 'त्वरित अनुमान' के रूप में जारी किया जाता है।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP): मार्च 2026 के त्वरित अनुमान

औद्योगिक वृद्धि और क्षेत्रीय प्रदर्शन

  • सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में भारत के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) ने वार्षिक आधार पर 4.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है।
  • इससे पिछले महीने यानी फरवरी 2026 में यह वृद्धि दर 5.2 प्रतिशत रही थी।
  • विनिर्माण क्षेत्र के 23 उद्योग समूहों में से 14 ने सकारात्मक वृद्धि दर्ज की है, जिनमें मोटर वाहनों (18.1 प्रतिशत), मशीनरी और उपकरण (11.2 प्रतिशत) तथा बुनियादी धातु (8.6 प्रतिशत) का निर्माण शीर्ष पर है।

क्षेत्रवार औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (मार्च 2026)

क्षेत्र (Sector) सूचकांक (Index) वृद्धि दर (Growth %)
खनन (Mining) 166.8 5.5
विनिर्माण (Manufacturing) 169.4 4.3
बिजली (Electricity) 221.3 0.8
सामान्य सूचकांक (General) 173.2 4.1

उपयोग-आधारित वर्गीकरण

  • उपयोग-आधारित वर्गीकरण के अनुसार मार्च 2026 में सर्वाधिक वृद्धि पूंजीगत वस्तुओं (Capital Goods) में 14.6 प्रतिशत दर्ज की गई।
  • अन्य श्रेणियों की वृद्धि दर: अवसंरचना/निर्माण वस्तुएं (6.7 प्रतिशत), उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं (5.3 प्रतिशत), मध्यवर्ती वस्तुएं (3.3 प्रतिशत), प्राथमिक वस्तुएं (2.2 प्रतिशत) और उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुएं (1.1 प्रतिशत)।
DEOrbit परीक्षा नोट्स: औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) अर्थव्यवस्था में विभिन्न उद्योग समूहों की विकास दर का एक प्रमुख संकेतक है। भारत में IIP की गणना के लिए आधार वर्ष 2011-12 (Base Year 2011-12=100) का उपयोग किया जाता है। यह सूचकांक प्रत्येक माह की 28 तारीख को 'त्वरित अनुमान' के रूप में जारी किया जाता है।

भारत-न्यूज़ीलैंड एफटीए (FTA): आगरा में उद्योग जगत के साथ संवाद

ऐतिहासिक संवाद और आगरा का महत्व

  • भारत-न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर की पूर्व संध्या पर, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और न्यूज़ीलैंड के व्यापार मंत्री श्री टॉड मैक्ले ने आगरा में उद्योग सहभागिता कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
  • आगरा, भारत के चमड़े के जूतों के उत्पादन में लगभग 75 प्रतिशत की भागीदारी रखता है।
  • आगरा के चमड़े के जूतों के पास 'भौगोलिक संकेत' (GI Tag) होने के साथ-साथ यह 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) योजना के अंतर्गत एक प्रमुख उत्पाद भी है।
  • इस समझौते से चमड़े और जूतों पर लगने वाला टैरिफ 5 प्रतिशत से घटकर शून्य (Zero) हो जाएगा, जिससे भारतीय निर्यातकों को न्यूज़ीलैंड के बाजार में बड़ी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी।

फार्मा, चिकित्सा उपकरण और आयुष (AYUSH) क्षेत्र को लाभ

  • उद्योग प्रतिनिधियों ने फार्मा और चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में त्वरित विनियामक (Regulatory) पहुंच के लिए एफटीए के प्रावधानों का स्वागत किया।
  • इसमें तुलनीय अंतरराष्ट्रीय नियामकों से 'गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस' (GMP) और 'गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस' (GCP) निरीक्षण रिपोर्टों की मंजूरी शामिल है, जिससे अनुपालन (Compliance) का बोझ कम होगा।
  • यह समझौता आयुष (AYUSH) को मान्यता देने वाला दोनों देशों के लिए पहला समझौता है, जिसके लिए एफटीए में एक समर्पित अध्याय शामिल किया गया है।
DEOrbit परीक्षा नोट्स: भारत का चमड़ा क्षेत्र (Leather Sector) मूल्य संवर्धित विनिर्माण (Value-added manufacturing) में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव कर रहा है। इस बदलाव के चलते भारत का लक्ष्य 2030 तक चमड़ा क्षेत्र के उद्योग को 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है। भारत-न्यूज़ीलैंड एफटीए जैसे समझौते एमएसएमई (MSME) और लघु उद्यमों को वैश्विक स्तर पर पहुँचाने में मुख्य उत्प्रेरक साबित होंगे।

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