Thursday, 23 April 2026

कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र

मत्स्य पालन क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि, भारत बना दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक

मत्स्य उत्पादन के ऐतिहासिक आंकड़े और वैश्विक रैंकिंग

  • मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वार्षिक मत्स्य उत्पादन (Annual Fish Production) ने एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड कायम किया है।
  • देश का कुल मत्स्य उत्पादन शानदार वृद्धि दर्ज करते हुए लगभग 175.45 लाख टन के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जो इस क्षेत्र की अभूतपूर्व प्रगति को दर्शाता है।
  • वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करते हुए, भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश (3rd Largest Fish Producer) बन गया है।
  • इसके अतिरिक्त, जलीय जीवों के संवर्धन यानी एक्वाकल्चर (Aquaculture) उत्पादन के मामले में भारत ने विश्व में दूसरा स्थान हासिल कर लिया है।
  • निर्यात के मोर्चे पर भी देश ने बड़ी सफलता हासिल की है और वर्तमान में भारत वैश्विक बाजार में झींगा (Shrimp) का शीर्ष निर्यातक बन कर उभरा है।

'नीली क्रांति' और प्रमुख फ्लैगशिप योजनाओं का प्रभाव

  • मत्स्य पालन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और मछुआरों की आय दोगुनी करने के लिए भारत सरकार 'नीली क्रांति' (Blue Revolution) के विजन पर मिशन मोड में काम कर रही है।
  • इस विजन को साकार करने के लिए सबसे बड़ी फ्लैगशिप योजना 'प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना' (PMMSY) को 20,050 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट के साथ सफलतापूर्वक लागू किया गया है।
  • तटीय और अंतर्देशीय बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 7,522 करोड़ रुपये के समर्पित कोष के साथ 'मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड' (FIDF) की स्थापना की गई है।
  • मछुआरों और मत्स्य किसानों को साहूकारों के चंगुल से बचाने और उन्हें संस्थागत ऋण (Institutional Credit) तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की सुविधा का विस्तार मत्स्य क्षेत्र तक कर दिया गया है।
  • जमीनी स्तर पर मछुआरों की समस्याओं को समझने और सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचाने के लिए एक अनूठी तटीय आउटरीच यात्रा 'सागर परिक्रमा' (Sagar Parikrama) का आयोजन भी किया जा रहा है।

रोजगार सृजन, अवसंरचना विकास और तकनीकी आधुनिकीकरण

  • मत्स्य पालन क्षेत्र के इस तीव्र विकास से देश में लाखों युवाओं और विशेषकर तटीय समुदायों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार (Direct & Indirect Employment) के लाखों नए अवसर सृजित हो रहे हैं।
  • सरकार द्वारा पीएमएमएसवाई (PMMSY) और एफआईडीएफ (FIDF) के तहत आधुनिक 'फिशिंग हार्बर' (Fishing Harbours) और 'फिश लैंडिंग सेंटर' (FLCs) के निर्माण तथा आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
  • योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन और लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे आर्थिक सहायता (DBT - Direct Benefit Transfer) भेजने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और डेटाबेस (National Fisheries Database) का बड़े पैमाने पर एकीकरण किया गया है।
  • समुद्री मत्स्य पालन (Marine Fisheries) के साथ-साथ देश के भीतर 'अंतर्देशीय मत्स्य पालन' (Inland Fisheries) और खारे पानी (Brackish water) के एक्वाकल्चर को भी उन्नत तकनीकों (जैसे Biofloc और RAS) के माध्यम से प्रोत्साहित किया जा रहा है।
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DEOrbit Exam Note: प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और नीली क्रांति: PMMSY को भारत सरकार द्वारा 'आत्मनिर्भर भारत' पैकेज के हिस्से के रूप में 10 सितंबर 2020 को लॉन्च किया गया था, जिसका उद्देश्य मत्स्य पालन क्षेत्र का सतत और जिम्मेदार विकास करना है। भारत में 'नीली क्रांति' (Blue Revolution) के जनक डॉ. हीरालाल चौधरी और डॉ. अरुण कृष्णन को माना जाता है। डॉ. हीरालाल चौधरी ने मछलियों में 'प्रेरित प्रजनन' (Induced Breeding/Hypophysation) की तकनीक विकसित की थी, इसी ऐतिहासिक खोज के सम्मान में भारत में प्रतिवर्ष 10 जुलाई को 'राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस' (National Fish Farmers Day) मनाया जाता है।

ICAR द्वारा 'कृषि लचीलेपन' (Agricultural Resilience) के लिए विशेष कार्य बल का गठन

STF का गठन और 'मेरा गाँव मेरा गौरव' (MGMG) का सुदृढ़ीकरण

  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने वैश्विक भूराजनीतिक परिवर्तनों के बीच कृषि क्षेत्र के लिए उभरती चुनौतियों का समाधान करने हेतु एक उच्च स्तरीय 'विशेष कार्य बल' (STF - Special Task Force) का गठन किया है।
  • इस नवगठित एसटीएफ की पहली बैठक कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और ICAR के महानिदेशक की अध्यक्षता में आयोजित की गई।
  • रणनीति के तहत 'मेरा गाँव मेरा गौरव' (MGMG) अभियान को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।
  • इस अभियान के दायरे को व्यापक बनाने के लिए देश के 100 'आकांक्षी जिलों' (Aspirational Districts) को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।

फसल विविधीकरण, DSR तकनीक और मृदा स्वास्थ्य

  • मृदा स्वास्थ्य और उर्वरक: गेहूं और चावल जैसी प्रमुख फसलों में उर्वरक खपत को युक्तिसंगत बनाने के लिए 'जिलावार मूल्यांकन' (District-wise evaluation) किया जाएगा तथा जैव-उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • क्षेत्र मानचित्रण (Area Mapping): भूमि उपयोग दक्षता बढ़ाने के लिए बाजरा (Millets) उत्पादक क्षेत्रों का विस्तृत मानचित्रण किया जाएगा।
  • कम उत्पादकता वाले चावल क्षेत्रों में किसानों की आय बढ़ाने के लिए 'पर्यावरण-अनुकूल मत्स्य पालन' जैसे उच्च मूल्य वाले विकल्पों का एकीकरण किया जाएगा।
  • तकनीकी हस्तक्षेप: धान की 'सीधी बुवाई' (DSR - Direct Seeded Rice) सहित अन्य यांत्रिक समाधानों पर विशेष जोर दिया जाएगा।
  • अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (AICRP) द्वारा समर्थित एक मजबूत नेटवर्क के माध्यम से किसानों को वास्तविक समय (Real-time) में मौसम विज्ञान सलाह प्रदान की जाएगी।
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DEOrbit Exam Note: ICAR और MGMG योजना: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की स्थापना 16 जुलाई 1929 को हुई थी। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है और केंद्रीय कृषि मंत्री इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं। 'मेरा गाँव मेरा गौरव' (MGMG) योजना 2015 में शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य कृषि वैज्ञानिकों को गांवों को गोद लेने (Adopt villages) और किसानों को नवीन तकनीकी जानकारी प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करना है। DSR (Direct Seeded Rice) धान बोने की एक ऐसी तकनीक है जिसमें नर्सरी तैयार करने और पौध रोपण (Transplanting) की आवश्यकता नहीं होती, जिससे पानी (लगभग 30%) और श्रम दोनों की भारी बचत होती है।

मध्य प्रदेश के रायसेन में 'कृषि महाकुंभ' का आयोजन, वैल्यू-चेन पर विशेष जोर

कृषि महाकुंभ: आयोजन, उद्देश्य और 'पूरी वैल्यू-चेन' एक मंच पर

  • केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, मध्य प्रदेश के रायसेन में 11 से 13 अप्रैल तक तीन दिवसीय 'कृषि का महाकुंभ' आयोजित किया जाएगा।
  • इस महाकुंभ का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय के अनेक मजबूत स्तंभ तैयार करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की 'पूरी वैल्यू-चेन' (बीज से बाजार और मछली से मोती तक) को एक ही मंच पर जोड़ना है।
  • रायसेन का दशहरा मैदान लाइव डेमो, तकनीकी सत्र, प्रशिक्षण और बिजनेस-मीटिंग्स (B2B) का केंद्र बनेगा, जहाँ वैज्ञानिक, स्टार्टअप, FPO और SHG एक साथ आएंगे।

उन्नत पशुधन, मत्स्य पालन (Aquaculture) और तकनीकी नवाचार

  • पशुधन प्रदर्शन में गिर, साहीवाल, थारपारकर, मालवी जैसी उन्नत गाय की नस्लें तथा जमुनापारी, बरबरी, सिरोही, बीटल, सोजत जैसी दूध और मांस दोनों के लिए उपयुक्त बकरी की नस्लें प्रदर्शित की जाएंगी।
  • पोल्ट्री क्षेत्र में किसानों को उच्च मूल्य वाले बाजार से जोड़ने के लिए 'कड़कनाथ' (Kadaknath) जैसी विशिष्ट नस्ल की क्षमता को दिखाया जाएगा।
  • मत्स्य विभाग और राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) द्वारा बायोफ्लॉक (Biofloc), पुनरावर्ती एक्वाकल्चर प्रणाली (RAS), एक्वापोनिक्स (Aquaponics), सजावटी मछली पालन और मोती पालन (Pearl Culture) के लाइव मॉडल दिखाए जाएंगे।
  • किसानों को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और फिशरीज इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (FIDF) के तहत जल-आधारित उद्यम शुरू करने की जानकारी दी जाएगी।

50+ FPOs, GI-टैग उत्पाद और SHGs की 'ड्रोन दीदियां'

  • इस आयोजन में 50 से अधिक किसान उत्पादक संगठन (FPOs) भाग लेंगे, जो स्थानीय उत्पादों को ई-कॉमर्स और आधुनिक रिटेल चैनल के माध्यम से 'लोकल-टू-ग्लोबल' बनाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
  • प्रदर्शनी में GI-टैग प्राप्त 'चिन्नौर चावल' (Chinnor Rice), 'शरबती गेहूं' (Sharbati Wheat) और मिलेट आधारित उत्पाद (कोदो, कुटकी) जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों की ब्रांडिंग और बिक्री की जाएगी।
  • ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से कृषि-सखियां (Krishi Sakhis), आजीविका दीदियां (Ajeevika Didis) और ड्रोन दीदियां (Drone Didis) के नेतृत्व में स्वयं सहायता समूह (SHGs) ग्रामीण महिलाओं की आजीविका के सफल मॉडल पेश करेंगे।
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DEOrbit Exam Note: प्रमुख पशु नस्लें और GI टैग: RPSC/RSSB परीक्षाओं में पशुओं की नस्लें अक्सर पूछी जाती हैं। याद रखें: गिर, साहीवाल, थारपारकर और मालवी गाय (Cow) की नस्लें हैं। जमुनापारी, बरबरी, सिरोही, बीटल और सोजत बकरी (Goat) की नस्लें हैं। कड़कनाथ मुर्गे (Poultry) की एक प्रजाति है, जिसे मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले का GI टैग प्राप्त है। इसी तरह 'चिन्नौर चावल' मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले का और 'शरबती गेहूं' मध्य प्रदेश (सीहोर/विदिशा) का प्रसिद्ध GI टैग उत्पाद है। RAS और बायोफ्लॉक: ये मत्स्य पालन की आधुनिक तकनीकें हैं जहाँ कम पानी और कम जगह में अधिक मछली उत्पादन किया जाता है।

'राष्ट्रीय कृषि बाजार' (e-NAM) ने कृषि व्यापार के डिजिटल रूपांतरण में छुए नए आयाम

मार्च 2026 तक 1.80 करोड़ से अधिक किसान जुड़े, ₹4.84 लाख करोड़ का हुआ व्यापार

  • पीआईबी की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, 'राष्ट्रीय कृषि बाजार' (e-NAM) भारत में कृषि व्यापार के डिजिटल रूपांतरण का एक प्रमुख स्तंभ बन गया है।
  • मार्च 2026 तक देश के 23 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 1,656 मंडियों को इस प्लेटफॉर्म से सफलतापूर्वक एकीकृत किया जा चुका है।
  • इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अब तक 1.80 करोड़ से अधिक किसान, 2.73 लाख व्यापारी और 4,724 'किसान-उत्पादक संगठन' (FPOs) पंजीकृत हो चुके हैं।
  • किसानों की सुविधा के लिए मोबाइल आधारित मूल्य सूचना सेवाओं के तहत 'ई-एनएएम ऐप' (e-NAM App) पर अब तक 247 कृषि वस्तुओं (Commodities) को शामिल किया जा चुका है।

ई-एनएएम (e-NAM) की प्रमुख उपलब्धियां (मार्च 2026 तक के आंकड़े)

क्र.सं. प्रमुख संकेतक (Indicators) आंकड़े (मार्च 2026 तक)
1. एकीकृत मंडियों की संख्या 1,656 (23 राज्य और 4 केंद्र शासित प्रदेश)
2. पंजीकृत किसानों की संख्या 1.80 करोड़ से अधिक
3. पंजीकृत व्यापारी 2.73 लाख
4. पंजीकृत FPOs 4,724
5. कुल व्यापारित मात्रा (2016 से) 13.25 करोड़ मीट्रिक टन
6. कुल व्यापार मूल्य (2016 से) ₹4.84 लाख करोड़
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DEOrbit परीक्षा नोट्स: ई-एनएएम (e-NAM) क्या है? यह एक अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल है जो कृषि उपजों के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय बाजार बनाने हेतु मौजूदा एपीएमसी (APMC) मंडियों का एक नेटवर्क बनाता है। इसे वर्ष 2016 में लॉन्च किया गया था। आंकड़ों के अनुसार, ई-एनएएम पर व्यापार मूल्य वर्ष 2024 के ₹3.19 लाख करोड़ से बढ़कर वर्ष 2026 में ₹4.84 लाख करोड़ हो गया है, जो इसके बढ़ते पैमाने और बाजार जुड़ाव (Market Integration) को दर्शाता है। हाल ही में इस पर 204.76 लाख मीट्रिक टन कृषि उपज का व्यापार हुआ है।

उच्च मूल्य वाली फसलों का विविधीकरण (बजट 2026-27)

मुख्य बिंदु

  • केंद्रीय बजट 2026-27 में तटीय, उत्तर-पूर्वी और पर्वतीय क्षेत्रों में उच्च मूल्य वाली फसलों (बागवानी) के विविधीकरण पर विशेष बल दिया गया है।
  • इस नीति के तहत तटीय क्षेत्रों में नारियल, काजू, कोको और चंदन; उत्तर-पूर्वी राज्यों में अगरवुड; तथा हिमालयी और पर्वतीय क्षेत्रों में अखरोट, बादाम व चिलगोज़ा की खेती को लक्षित किया गया है।
  • पिछले एक दशक में भारत का बागवानी उत्पादन वर्ष 2013-14 के 277.35 मिलियन टन से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 370.74 मिलियन टन तक पहुंच गया है।
  • भारत नारियल उत्पादन में विश्व में दूसरे स्थान पर है (वैश्विक उत्पादन का लगभग 22.44%), जो लगभग 3 करोड़ लोगों (जिसमें 1 करोड़ किसान शामिल हैं) की आजीविका का मुख्य साधन है।
फसल (लक्षित क्षेत्र) निर्यात / उत्पादन (2024-25) संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य
काजू (तटीय क्षेत्र) निर्यात मूल्य: 369.17 मिलियन अमरीकी डॉलर अवनत और बंजर भूमि पर पनपने की क्षमता के कारण इसे "बंजर भूमि का स्वर्ण भंडार" कहा जाता है।
कोको (तटीय क्षेत्र) निर्यात मूल्य: 295.58 मिलियन अमरीकी डॉलर भारत में इसे स्वतंत्र रूप से उगाने के बजाय मुख्यतः नारियल और सुपारी के बागानों के साथ अंतः फसल के रूप में उगाया जाता है।
अगरवुड (उत्तर-पूर्व) लगभग 150 मिलियन वृक्ष (जनवरी 2026 तक) इनमें से 90% वृक्ष पूर्वोत्तर भारत में हैं; इस रालयुक्त लकड़ी का उपयोग इत्र (ऊद) और पारंपरिक चिकित्सा में होता है।
अखरोट (हिमालयी क्षेत्र) निर्यात मूल्य: 7.80 मिलियन अमरीकी डॉलर यह भारत की सबसे महत्वपूर्ण समशीतोष्ण मेवा फसल है, जिसके उत्पादन में जम्मू एवं कश्मीर का सर्वाधिक योगदान है।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स: बागवानी क्षेत्र, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के कृषि फसल उप-क्षेत्र के सकल मूल्य उत्पादन (GVO) में लगभग 37 प्रतिशत का महत्वपूर्ण योगदान देता है। भारत प्याज और शैलॉट (सूखे/निर्जलीकृत को छोड़कर) का विश्व में सबसे बड़ा उत्पादक है, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 22.42% हिस्सा कवर करता है। इसके अतिरिक्त, हिमालयी क्षेत्र (विशेषकर हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले) की महत्वपूर्ण मेवा फसल 'चिलगोज़ा पाइन' को "चैंपियन ऑफ़ द रॉकी माउंटेंस" के नाम से भी जाना जाता है।

2025-26 गेहूं उत्पादन परिदृश्य: मौसम के बदलाव के बावजूद फसल मजबूत

फसल की स्थिति और उत्पादन का अनुमान

  • कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, लगभग 33.4 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गई गेहूं की फसल में इस मौसम में कीटों और बीमारियों का कोई प्रकोप नहीं देखा गया है।
  • फरवरी महीने में उच्च तापमान और फसल पकने के समय असामयिक बारिश से नुकसान की आशंका थी, लेकिन जल्दी बुवाई और बेहतर किस्मों के उपयोग के कारण स्थिति मजबूत बनी हुई है।
  • बढ़ी हुई 'बीज प्रतिस्थापन दर' (SRR) ने उच्च उपज देने वाली, जलवायु-लचीली और रोग-प्रतिरोधी किस्मों को अपनाने में तेजी लाई है।
  • 2025-26 के दौरान बोए गए अतिरिक्त 0.6 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र से स्थानीय स्तर पर हुए किसी भी नुकसान की आर्थिक रूप से भरपाई होने की पूरी उम्मीद है।

प्रमुख राज्यों में गेहूं खरीद और आवक के रुझान

राज्य खरीद और उत्पादन की स्थिति
हरियाणा मण्डियों में 75 लाख मीट्रिक टन के खरीद लक्ष्य को पार कर लिया गया है, जिसमें 56.13 लाख मीट्रिक टन की खरीद हो चुकी है (पिछले वर्ष की तुलना में 9 लाख मीट्रिक टन की वृद्धि)।
मध्य प्रदेश उच्च उत्पादन अनुमानों के कारण राज्य सरकार के अनुरोध पर प्रारंभिक खरीद लक्ष्य को 78 LMT (लाख मीट्रिक टन) से बढ़ाकर 100 LMT कर दिया गया है।
महाराष्ट्र वर्ष 2025-26 के लिए उत्पादन लगभग 22.90 लाख टन रहने का अनुमान है, जो लगातार वृद्धि दर्शाता है (विशेषकर मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्रों में)।
DEOrbit परीक्षा नोट्स: कृषि क्षेत्र में 'बीज प्रतिस्थापन दर' (Seed Replacement Rate - SRR) का अर्थ है कि किसान अपने स्वयं के बचाए गए बीजों के बजाय बाजार से कितने प्रतिशत प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण नए बीज खरीदते हैं। उच्च SRR सीधे तौर पर बेहतर फसल उत्पादन और जलवायु-लचीलापन (Climate Resilience) से जुड़ा होता है।

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