Friday, 24 April 2026

कला, संस्कृति एवं धरोहर

सिवाना के 'कुमटाल दुर्ग' की तलहटी में बनेगा ऐतिहासिक पैनोरमा

धरोहर संरक्षण और कुमटाल दुर्ग का निरीक्षण

  • राजस्थान की गौरवशाली विरासत को संरक्षित करने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा नवगठित बालोतरा (Balotra) जिले के सिवाना में एक भव्य पैनोरमा (Panorama) का निर्माण किया जाएगा।
  • राजस्थान धरोहर प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री ओंकार सिंह लखावत ने सिवाना का दौरा कर ऐतिहासिक 'कुमटाल दुर्ग' (Kumtal Fort) की तलहटी में प्रस्तावित पैनोरमा स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया।
  • अधिकारियों को इस परियोजना को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण करने के सख्त दिशा-निर्देश दिए কাউ ताकि इसे जल्द ही धरातल पर उतारा जा सके।

पर्यटन को बढ़ावा और क्षेत्रीय विकास

  • इस पैनोरमा के निर्माण से सिवाना के समृद्ध और शौर्यपूर्ण इतिहास को एक नई पहचान मिलेगी और आने वाली पीढ़ियां अपने गौरवशाली अतीत से रू-ब-रू हो सकेंगी।
  • यह स्थल न केवल इतिहास को सहेजेगा, बल्कि क्षेत्र में पर्यटन (Tourism) की अपार संभावनाओं को भी खोलेगा।
  • पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, जिससे पूरे सिवाना क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
💡
DEOrbit Exam Note: सिवाना दुर्ग (कुमटाल / कुमथाना दुर्ग): सिवाना दुर्ग का निर्माण 10वीं शताब्दी में वीर नारायण पंवार द्वारा हल्देश्वर पहाड़ी (छप्पन की पहाड़ियां) पर करवाया गया था। यहाँ बहुतायत में पाए जाने वाले 'कुमट' (Kumut) झाड़ी/पेड़ों के कारण इसे 'कुमटाल दुर्ग' भी कहा जाता है। इतिहास में यह दुर्ग 'मारवाड़ के राजाओं की शरणस्थली' (संकटकालीन राजधानी) और 'जालौर दुर्ग की कुंजी' के रूप में विश्व-प्रसिद्ध है। वर्ष 1308 में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय यहाँ का वीर शासक सातलदेव था, जहाँ सिवाना का प्रथम साका (जौहर) हुआ था। नए जिलों के गठन (परिसीमन) के बाद अब यह ऐतिहासिक दुर्ग बाड़मेर की बजाय बालोतरा जिले में आता है।

कला, संस्कृति एवं धरोहर

सिवाना के 'कुमटाल दुर्ग' की तलहटी में बनेगा ऐतिहासिक पैनोरमा

धरोहर संरक्षण और कुमटाल दुर्ग का निरीक्षण

  • राजस्थान की गौरवशाली विरासत को संरक्षित करने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा नवगठित बालोतरा (Balotra) जिले के सिवाना में एक भव्य पैनोरमा (Panorama) का निर्माण किया जाएगा।
  • राजस्थान धरोहर प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री ओंकार सिंह लखावत ने सिवाना का दौरा कर ऐतिहासिक 'कुमटाल दुर्ग' (Kumtal Fort) की तलहटी में प्रस्तावित पैनोरमा स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया।
  • अधिकारियों को इस परियोजना को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण करने के सख्त दिशा-निर्देश दिए কাউ ताकि इसे जल्द ही धरातल पर उतारा जा सके।

पर्यटन को बढ़ावा और क्षेत्रीय विकास

  • इस पैनोरमा के निर्माण से सिवाना के समृद्ध और शौर्यपूर्ण इतिहास को एक नई पहचान मिलेगी और आने वाली पीढ़ियां अपने गौरवशाली अतीत से रू-ब-रू हो सकेंगी।
  • यह स्थल न केवल इतिहास को सहेजेगा, बल्कि क्षेत्र में पर्यटन (Tourism) की अपार संभावनाओं को भी खोलेगा।
  • पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, जिससे पूरे सिवाना क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
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DEOrbit Exam Note: सिवाना दुर्ग (कुमटाल / कुमथाना दुर्ग): सिवाना दुर्ग का निर्माण 10वीं शताब्दी में वीर नारायण पंवार द्वारा हल्देश्वर पहाड़ी (छप्पन की पहाड़ियां) पर करवाया गया था। यहाँ बहुतायत में पाए जाने वाले 'कुमट' (Kumut) झाड़ी/पेड़ों के कारण इसे 'कुमटाल दुर्ग' भी कहा जाता है। इतिहास में यह दुर्ग 'मारवाड़ के राजाओं की शरणस्थली' (संकटकालीन राजधानी) और 'जालौर दुर्ग की कुंजी' के रूप में विश्व-प्रसिद्ध है। वर्ष 1308 में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय यहाँ का वीर शासक सातलदेव था, जहाँ सिवाना का प्रथम साका (जौहर) हुआ था। नए जिलों के गठन (परिसीमन) के बाद अब यह ऐतिहासिक दुर्ग बाड़मेर की बजाय बालोतरा जिले में आता है।

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