सम्मेलन एवं विविध
नई दिल्ली में 'इंडिया फार्मा 2026' के 9वें संस्करण का आयोजन
"भारत में खोजें: जीवन विज्ञान नवाचार में अभूतपूर्व प्रगति" है इस वर्ष की थीम
- रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के 'औषध विभाग' द्वारा 13-14 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली के फेडरेशन हाउस में 'इंडिया फार्मा 2026' के 9वें संस्करण का आयोजन किया जा रहा है।
- यह आयोजन फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) और 'इंडियन फार्मास्युटिकल एलायंस' (IPA) के सहयोग से किया जा रहा है।
- कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा और राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल द्वारा किया जाएगा।
- इस वर्ष के आयोजन की मुख्य थीम "भारत में खोजें: जीवन विज्ञान नवाचार में अभूतपूर्व प्रगति" रखी गई है।
- इस सम्मेलन का मुख्य लक्ष्य भारतीय फार्मा क्षेत्र को 'मात्रा-आधारित' (Volume-based) मॉडल से निकालकर 'मूल्य-आधारित और नवाचार-आधारित' (Value and Innovation-driven) वैश्विक शक्ति में बदलना है।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स:
FICCI (फिक्की): 1927 में स्थापित, यह भारत का सबसे पुराना और सबसे बड़ा शीर्ष व्यापारिक संगठन है, जो गैर-सरकारी और गैर-लाभकारी संस्था के रूप में कार्य करता है। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में नीति निर्माताओं के साथ-साथ 'ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया' (DCGI) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी और कई प्रमुख दवा कंपनियों के प्रतिनिधि भी भाग ले रहे हैं, जो 'विकसित भारत 2047' के विजन के अनुरूप नवाचार को बढ़ावा देंगे।
📮 राष्ट्रीय परिदृश्य: डाक प्रशिक्षण केंद्र, सहारनपुर की प्लेटिनम जयंती पर स्मारक डाक टिकट जारी
समारोह एवं डाक टिकट विमोचन के मुख्य बिंदु
- केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने डाक विभाग में प्रशिक्षण और संस्थागत क्षमता निर्माण में उत्कृष्टता के 75 वर्ष (प्लेटिनम जयंती) पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सहारनपुर स्थित डाक प्रशिक्षण केंद्र (PTC) का एक स्मारक डाक टिकट जारी किया है।
- यह डाक टिकट विमोचन समारोह 2 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली स्थित आकाशवाणी भवन में आयोजित किया गया, जिसमें महानिदेशक डाक सेवाएं (श्री जितेंद्र गुप्ता) सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
- केंद्रीय मंत्री ने इस अवसर पर पीटीसी सहारनपुर को "महज एक संस्थान नहीं, बल्कि सेवा की एक जीवंत विरासत" बताया और राष्ट्र निर्माण में इसके अटूट योगदान की सराहना की।
- समारोह के दौरान भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए मंत्री महोदय ने वर्ष 2030 तक भारत को पूरे विश्व के लिए एक 'लॉजिस्टिक पावर हाउस' (Logistics Power House) बनाने का लक्ष्य रखा और इसमें डाक विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
- यह नया स्मारक डाक टिकट भारत भर के सभी फिलाटेलिक ब्यूरो (डाक टिकट संग्रह केंद्रों) और ई-पोस्ट ऑफिस पोर्टल (epostoffice.gov.in) पर ऑनलाइन बिक्री के लिए उपलब्ध करा दिया गया है।
डाक प्रशिक्षण केंद्र (PTC) सहारनपुर: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं क्षमता
- स्थापना: स्वतंत्र भारत के प्रशासनिक ढांचे को सुदृढ़ करने और डाक कर्मियों के लिए एक संरचित व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रणाली शुरू करने के उद्देश्य से इस केंद्र की स्थापना 2 अप्रैल 1951 को की गई थी।
- बुनियादी ढांचा: 56.71 एकड़ के विशाल परिसर में स्थापित यह केंद्र वर्तमान में उत्तरी भारत के 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के डाक कर्मियों को सेवा प्रदान करने वाला एक प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान बन गया है।
- आधुनिक तकनीक: यह पीटीसी अपनी तकनीकी क्षमता को बढ़ाते हुए आज 11 उन्नत कंप्यूटर प्रयोगशालाओं और एक विशेष ई-स्टूडियो (e-Studio) से पूर्णतः सुसज्जित है।
- प्रशिक्षण लक्ष्य: यह संस्थान प्रतिवर्ष लगभग 3,000 डाक कर्मचारियों को प्रशिक्षित करता है। उन्हें विशेष रूप से ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स, डिजिटल संचालन (Digital Operations) और वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) के आधुनिक कौशल प्रदान किए जाते हैं।
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DEOrbit Exam Note:
भारतीय डाक (India Post) विशेष तथ्य: भारतीय डाक प्रणाली विश्व का सबसे बड़ा डाक नेटवर्क है। भारत में 'पिन कोड' (PIN Code - Postal Index Number) प्रणाली की शुरुआत 15 अगस्त 1972 को हुई थी। डाक टिकटों के अध्ययन और संग्रह करने की कला या शौक को 'फिलाटेली' (Philately) कहा जाता है। वर्तमान में भारतीय डाक संचार मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
'डिक्रिमिनलाइजेशन' (Decriminalization) और जन विश्वास विधेयक
डिक्रिमिनलाइजेशन का अर्थ और वर्तमान संदर्भ
- अर्थ (Meaning): 'डिक्रिमिनलाइजेशन' (Decriminalization) का सीधा सा मतलब किसी छोटी गलती या कृत्य को 'अपराध की श्रेणी से बाहर करना' होता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि वह काम पूरी तरह वैध (Legal) हो गया है, बल्कि इसका मतलब है कि उस कृत्य के लिए व्यक्ति को 'अपराधी' मानकर जेल नहीं भेजा जाएगा।
- दंड का स्वरूप: ऐसे मामलों में व्यक्ति को जेल की कठोर सजा देने के बजाय, केवल जुर्माना या आर्थिक दंड (Financial Penalty) लगाकर ही मामले का निपटारा कर दिया जाता है।
- चर्चा में क्यों?: यह शब्द वर्तमान में इसलिए चर्चा में है क्योंकि केंद्र सरकार ने संसद में 'जन विश्वास विधेयक 2026' (Jan Vishwas Bill) पास किया है।
- विधेयक का प्रभाव: इस ऐतिहासिक विधेयक के तहत 42 मंत्रालयों के लगभग 79 पुराने कानूनों में संशोधन किया गया है और करीब 1000 छोटी गलतियों (Minor offenses) को 'गैर-आपराधिक' बना दिया गया है, जिनमें पहले जेल की सजा का प्रावधान हुआ करता था।
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DEOrbit Exam Note:
जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक: इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य देश में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (व्यापार करने में आसानी) और 'ईज ऑफ लिविंग' (जीवन यापन में आसानी) को बढ़ावा देना है। छोटे-मोटे व्यापारिक उल्लंघनों के लिए जेल जाने के डर (Fear of Imprisonment) को खत्म करके, सरकार व्यवसायों और नागरिकों का न्यायपालिका व सरकारी तंत्र पर 'विश्वास' बढ़ाना चाहती है। इसके साथ ही, इससे अदालतों पर लंबित मुकदमों (Pending Cases) का भारी बोझ भी कम होगा।
'रेलवन' (RailOne) सुपर ऐप पर सभी डिजिटल पेमेंट्स पर 3% छूट की घोषणा
अनारक्षित टिकटों पर 3% बोनस/छूट का नया प्रावधान
- भारतीय रेलवे ने 'रेलवन ऐप' (RailOne App) के माध्यम से अनारक्षित (Unreserved) रेल टिकट बुक करने वाले यात्रियों के लिए डिजिटल भुगतान पर 3% की छूट/बोनस कैशबैक की घोषणा की है।
- अब तक यह 3% का लाभ केवल रेलवे के 'आर-वॉलेट' (R-Wallet) के माध्यम से भुगतान करने पर ही मिलता था।
- नई व्यवस्था के तहत अब इसे यूपीआई (UPI), डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और नेट बैंकिंग सहित सभी स्वीकृत डिजिटल भुगतान माध्यमों पर लागू कर दिया गया है।
- यह सुविधा प्रायोगिक (Pilot) स्तर पर 14 जनवरी 2026 से 14 जुलाई 2026 तक लागू की गई है।
'रेलवन' (RailOne) सुपर ऐप क्या है?
- 'रेलवन' भारतीय रेलवे का एक एकीकृत 'सुपर ऐप' (Super App) है, जिसे क्रिस (CRIS) द्वारा विकसित किया गया है।
- इस सुपर ऐप का बीटा संस्करण जनवरी 2025 में लॉन्च किया गया था।
- इस ऐप ने रेलवे के पुराने और अलग-अलग काम करने वाले ऐप्स, जैसे- 'यूटीएस मोबाइल ऐप' (UTS Mobile) और 'रेल कनेक्ट' (Rail Connect) को प्रतिस्थापित कर दिया है।
- पुराने ऐप्स के उपयोगकर्ता अपनी मौजूदा पहचान (लॉगिन आईडी) के साथ सीधे इस नए सुपर ऐप में लॉग इन कर सकते हैं।
ऐप की प्रमुख मल्टी-फंक्शनल विशेषताएं
- टिकट बुकिंग: यह ऐप आरक्षित टिकट, अनारक्षित टिकट, प्लेटफॉर्म टिकट और मासिक पास (Season Ticket) बुक व रद्द करने की सिंगल-विंडो सुविधा देता है।
- लाइव ट्रैकिंग: इसमें 'रियल टाइम ट्रेन पूछताछ' (Live Status) और कोच पोजीशन/पीएनआर (PNR) नंबर की सटीक जानकारी उपलब्ध है।
- अन्य सेवाएं: इसके माध्यम से यात्री ई-कैटरिंग द्वारा ऑनलाइन भोजन मंगवा सकते हैं और 'रेल मदद' की तर्ज पर अपनी शिकायतें या सुझाव भी दर्ज करा सकते हैं।
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DEOrbit Exam Note:
CRIS (क्रिस): इसका पूर्ण रूप 'Centre for Railway Information Systems' (रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र) है। यह रेल मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था है जो भारतीय रेलवे के लिए प्रमुख आईटी (IT) और सॉफ्टवेयर प्रणालियों का डिज़ाइन और विकास करती है। 'सुपर ऐप' (Super App) उस मोबाइल एप्लिकेशन को कहा जाता है जो एक ही प्लेटफॉर्म पर कई तरह की सेवाएं (जैसे- टिकटिंग, ट्रैकिंग, ई-कॉमर्स, पेमेंट) एक साथ प्रदान करता है।
CAQM द्वारा 6 थर्मल पावर प्लांट्स पर 61.85 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना
'बायोमास पेलेट्स' के अनिवार्य नियम का उल्लंघन
- वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली के 300 किमी दायरे में आने वाले 6 थर्मल पावर प्लांट पर 61.85 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।
- जुर्माना लगाने का मुख्य कारण: इन पावर प्लांट्स ने कोयले के साथ पराली से बने 5% 'बायोमास पेलेट्स' (Biomass Pellets) मिलाने के अनिवार्य नियम का पालन नहीं किया।
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DEOrbit Exam Note:
CAQM (Commission for Air Quality Management): राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सूचकांक को प्रबंधित करने के लिए भारत सरकार द्वारा इस वैधानिक निकाय का गठन किया गया है। कोयले के साथ 5-10% बायोमास पेलेट्स मिलाने की प्रक्रिया को 'बायोमास को-फायरिंग' (Biomass Co-firing) कहा जाता है, जो कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करता है।
नेशनल हाईवे के किनारे विकसित होंगे 'आरोग्य वन'
36 प्रकार के औषधीय पेड़ों का थीमैटिक प्लांटेशन
- सरकार ने नेशनल हाईवे के किनारे खाली पड़ी जमीन पर 'आरोग्य वन' विकसित करने का निर्णय लिया है।
- इसमें औषधीय पेड़ों का 'थीमैटिक प्लांटेशन' (Thematic Plantation) किया जाएगा, जिससे जैव विविधता बढ़ेगी और पक्षियों व अन्य जीवों को सहारा मिलेगा।
- संबंधित क्षेत्रों की जलवायु के अनुसार करीब 36 प्रकार के औषधीय पेड़ चुने गए हैं।
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DEOrbit Exam Note:
भारत सरकार का 'सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय' (MoRTH) देश भर में हाईवे के किनारे वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के लिए 'ग्रीन हाईवे पॉलिसी' (Green Highways Policy) संचालित करता है।
गुजरात हाईकोर्ट ने न्यायिक निर्णयों में 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) के उपयोग पर लगाई रोक
मानवीय समझ और तर्क को ही अंतिम निर्णय मानने का निर्देश
- गुजरात हाईकोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया के संबंध में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है।
- कोर्ट ने न्यायिक निर्णय और आदेश (Judgments and Orders) लिखने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग पर पूर्णतः रोक लगा दी है।
- कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यद्यपि तकनीक से काम तेज हो सकता है, लेकिन न्याय प्रक्रिया में अंतिम निर्णय 'इंसानी समझ और तर्क' पर ही आधारित होना चाहिए।
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DEOrbit Exam Note:
हाल ही में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक जमानत याचिका पर फैसला सुनाते समय 'ChatGPT' (AI टूल) का उपयोग किया था, जो भारतीय न्यायपालिका में अपनी तरह का पहला मामला था।
प्लास्टिक प्रबंधन नियमों में बड़ा संशोधन, रिसाइकिल प्लास्टिक का उपयोग अनिवार्य
कंपनियों के लिए 30% रिसाइकिल प्लास्टिक का नियम
- भारत सरकार ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्लास्टिक प्रबंधन नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किया है।
- नए नियम के तहत, अब कंपनियों को अपनी पैकेजिंग सामग्री में कम से कम 30% 'रिसाइकिल प्लास्टिक' (Recycled Plastic) का इस्तेमाल करना अनिवार्य होगा।
- इस सीमा को धीरे-धीरे बढ़ाकर वर्ष 2028-29 तक 60% करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
- इस कदम से प्लास्टिक कचरे (Plastic Waste) में भारी कमी आएगी और सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) को बढ़ावा मिलेगा।
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DEOrbit Exam Note:
भारत में 'प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम' (Plastic Waste Management Rules) के तहत EPR (Extended Producer Responsibility - विस्तारित निर्माता उत्तरदायित्व) लागू है। इसका मतलब है कि जो कंपनी प्लास्टिक का उत्पादन या उपयोग कर रही है, वही उसके कचरे के प्रबंधन और पुनर्चक्रण (Recycling) के लिए भी जिम्मेदार होगी।
दिल्ली सरकार ने नवजात शिशुओं के लिए शुरू की 'ANMOL' योजना
खून की एक बूंद से 56 बीमारियों की जांच
- दिल्ली सरकार ने राज्य में नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य को सुरक्षित करने के लिए 'ANMOL' योजना की शुरुआत की है।
- इस योजना के तहत नवजात शिशु के खून की सिर्फ एक बूंद (Single drop of blood) से 56 प्रकार की गंभीर बीमारियों की जांच की जाएगी।
- इससे जन्मजात रोगों (Congenital diseases) का जल्दी पता लगाने और उनका समय पर इलाज करने में आसानी होगी, जिससे शिशु मृत्यु दर (IMR) को कम करने में मदद मिलेगी।
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DEOrbit Exam Note:
चिकित्सा विज्ञान में नवजात शिशुओं की इस प्रकार की जांच को 'नियोनेटल स्क्रीनिंग' (Neonatal Screening) कहा जाता है। यह जेनेटिक, एंडोक्राइन और मेटाबोलिक विकारों को पहचानने की एक उन्नत तकनीक है।
NCERT को मिला 'डीम्ड यूनिवर्सिटी' (Deemed University) का आधिकारिक दर्जा
स्वयं के स्नातक (UG) और डॉक्टरेट (PhD) कोर्स शुरू करने की स्वायत्तता
- शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) को आधिकारिक रूप से 'डीम्ड यूनिवर्सिटी' का दर्जा प्रदान कर दिया है।
- इस नए दर्जे के बाद, अब NCERT स्वतंत्र रूप से अपने स्वयं के स्नातक (UG) और डॉक्टरेट (PhD) कोर्स शुरू कर सकेगा।
- संस्था द्वारा टीचर ट्रेनिंग (Teacher Training) जैसे नए कार्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे, जिससे इसकी शैक्षणिक स्वायत्तता (Academic Autonomy) में भारी वृद्धि होगी।
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DEOrbit Exam Note:
NCERT: इसकी स्थापना 1 सितंबर 1961 को सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत की गई थी। 'डीम्ड यूनिवर्सिटी' का दर्जा उच्च शिक्षा संस्थानों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) अधिनियम, 1956 की धारा 3 के तहत शिक्षा मंत्रालय की सलाह पर केंद्र सरकार द्वारा दिया जाता है।
तेलंगाना सरकार ने भूमि रिकॉर्ड के लिए लॉन्च किया 'भू भारती' पोर्टल
एकीकृत भूमि सूचना प्रबंधन प्रणाली
- तेलंगाना सरकार ने राज्य में भूमि रिकॉर्ड्स को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए 'भू भारती' (Bhoo Bharati) पोर्टल लॉन्च करने की घोषणा की है।
- इसे अगले 45 दिनों के भीतर पूरे राज्य में लागू कर दिया जाएगा।
- यह एक 'एकीकृत भूमि सूचना प्रबंधन प्रणाली' (Integrated Land Information Management System) होगी, जो जमीनी विवादों को कम करने और रिकॉर्ड मैनेजमेंट को आसान बनाने में मदद करेगी।
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DEOrbit Exam Note:
केंद्र सरकार द्वारा पूरे देश में भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण के लिए DILRMP (Digital India Land Records Modernization Programme) चलाया जा रहा है। तेलंगाना का यह पोर्टल इसी राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप राज्य-स्तरीय पहल है।
देश में नक्सल प्रभावित (LWE) जिलों की संख्या घटकर 38 हुई
गृह मंत्रालय की रिपोर्ट: केवल बीजापुर और पश्चिमी सिंहभूम अति-प्रभावित
- केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज़्म (LWE) प्रभावित जिलों के वर्गीकरण में बदलाव किया है।
- नई रिपोर्ट के अनुसार, देश में कुल नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या घटकर 38 रह गई है और नक्सली हिंसा में भारी कमी दर्ज की गई है।
- अब पूरे देश में केवल छत्तीसगढ़ का बीजापुर और झारखंड का पश्चिमी सिंहभूम ही सर्वाधिक 'नक्सल प्रभावित श्रेणी' में बचे हैं।
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DEOrbit Exam Note:
LWE का पूर्ण रूप 'Left Wing Extremism' (वामपंथी उग्रवाद) है। वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों को सहायता प्रदान करने के लिए गृह मंत्रालय द्वारा 'सुरक्षा संबंधी व्यय' (Security Related Expenditure - SRE) योजना चलाई जाती है।
दिल्ली में 1 नवंबर से केवल इलेक्ट्रिक और CNG कमर्शियल वाहनों को एंट्री
वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए BS-VI मानकों का पालन अनिवार्य
- दिल्ली सरकार ने राजधानी में वायु प्रदूषण (Air Pollution) को नियंत्रित करने के लिए एक सख्त नियम की घोषणा की है।
- 1 नवंबर से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक (EV), CNG और BS-VI मानकों वाले कमर्शियल (व्यावसायिक) वाहनों को ही प्रवेश की अनुमति मिलेगी।
- पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले व्यावसायिक वाहनों की एंट्री पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी।
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DEOrbit Exam Note:
BS-VI (Bharat Stage VI): यह भारत सरकार द्वारा मोटर वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषकों के उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए स्थापित उत्सर्जन मानक हैं। भारत ने अप्रैल 2020 में BS-IV से सीधे BS-VI मानकों में छलांग लगाई थी। दिल्ली में सर्दियों के दौरान प्रदूषण से निपटने के लिए GRAP (Graded Response Action Plan) भी लागू किया जाता है।
DRI ने 'ऑपरेशन दहाबू ब्लिट्ज़' के तहत सोने की तस्करी का किया भंडाफोड़
29.37 किलोग्राम सोना जब्त, नैरोबी से आईं 24 महिला तस्कर गिरफ्तार
- राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) मुंबई ने संगठित सोने की तस्करी पर बड़ी कार्रवाई करते हुए एक विदेशी गिरोह का पर्दाफाश किया है।
- इस विशेष अभियान को 'ऑपरेशन दहाबू ब्लिट्ज़' नाम दिया गया था।
- खुफिया जानकारी के आधार पर, नैरोबी से मुंबई के 'छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे' (CSMI) पर पहुंची 24 विदेशी महिला तस्करों को गिरफ्तार किया गया।
- इन यात्रियों के पास से कुल 29.37 किलोग्राम सोना बरामद हुआ है, जिसकी अनुमानित कीमत 37.74 करोड़ रुपये आंकी गई है।
- जब्त किए गए सोने में 25.10 किलोग्राम सोने की छड़ें (Gold bars) और 4.27 किलोग्राम सोने के आभूषण शामिल हैं।
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DEOrbit Exam Note:
DRI (Directorate of Revenue Intelligence): यह भारत की प्रमुख तस्करी-विरोधी खुफिया एजेंसी है, जो 'केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड' (CBIC), वित्त मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करती है। ऑपरेशन का नाम: 'दहाबू' (Dhahabu) अफ्रीकी भाषा स्वाहिली (Swahili) का शब्द है, जिसका अर्थ 'सोना' (Gold) होता है। चूंकि तस्कर नैरोबी (केन्या) से आए थे जहाँ स्वाहिली बोली जाती है, इसलिए इस अभियान का नाम 'दहाबू ब्लिट्ज़' रखा गया।
राष्ट्रीय सुरक्षा एवं अर्थव्यवस्था: FIU-India और I4C के बीच ऐतिहासिक समझौता
साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए MoU
- भारत की वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-India) और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
- इस समझौते पर FIU-India के निदेशक श्री अमित मोहन गोविल और I4C के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) श्री राजेश कुमार ने हस्ताक्षर किए।
- इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों एजेंसियों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने और समन्वय को बढ़ाना है।
- यह डिजिटल लेनदेन को सुरक्षित करने, वित्तीय अपराधों को रोकने और परिसंपत्ति की वसूली (Asset Recovery) करने में जांच एजेंसियों की सहायता करेगा।
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DEOrbit Exam Note:
FIU-India (वित्तीय खुफिया इकाई-भारत): यह भारत सरकार की एक केंद्रीय राष्ट्रीय एजेंसी है जो संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से संबंधित जानकारी प्राप्त करने, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ प्रयासों के समन्वय के लिए उत्तरदायी है। I4C (भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र): यह गृह मंत्रालय (MHA) का एक संबद्ध कार्यालय है जो कानून प्रवर्तन एजेंसियों (LEAs) को साइबर अपराध से निपटने के लिए ढांचा प्रदान करता है। I4C ने ही 'राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल' (NCRP) और 'सस्पेक्ट रजिस्ट्री' जैसे प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं।
'योजना' और 'कुरुक्षेत्र' जैसी पत्रिकाएं अब 'वेव्स' (WAVES) OTT पर निशुल्क
प्रकाशन विभाग ने इंडिया ईयर बुक सहित 227 ई-पुस्तकें कीं उपलब्ध
- सूचना और प्रसारण मंत्रालय के 'प्रकाशन विभाग' ने अपनी प्रमुख पत्रिकाओं— योजना, कुरुक्षेत्र, आजकल, बाल भारती और साप्ताहिक 'रोजगार समाचार'— को प्रसार भारती के 'वेव्स' (WAVES) ओटीटी प्लेटफॉर्म पर निशुल्क उपलब्ध करा दिया है।
- इन पत्रिकाओं के अलावा, वेव्स प्लेटफॉर्म पर 227 ई-पुस्तकें भी निशुल्क उपलब्ध कराई गई हैं, जिनमें प्रतिष्ठित 'इंडिया ईयर बुक' (भारत वार्षिकी) भी शामिल है।
- प्रकाशन विभाग अप्रैल के अंत तक वेव्स प्लेटफॉर्म पर लगभग 300 अतिरिक्त ई-पुस्तकें उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है।
- पाठक अब वेव्स प्लेटफॉर्म से मुद्रित (Printed) पुस्तकें भी खरीद सकते हैं। यह सुविधा ONDC (ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स) ढांचे के तहत 'CSC ग्रामीण ई-स्टोर' के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है। वर्तमान में 524 मुद्रित पुस्तकें बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।
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DEOrbit Exam Note:
WAVES (वेव्स): यह प्रसार भारती (Prasar Bharati) द्वारा लॉन्च किया गया ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म है। प्रकाशन विभाग (Publications Division): यह सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर प्रामाणिक साहित्य प्रकाशित करने वाला भारत सरकार का प्रमुख प्रकाशन गृह है।
'पोषण पखवाड़ा 2026' के छठे संस्करण का शुभारंभ
9 से 23 अप्रैल 2026 तक आयोजन; 'पहले 1000 दिनों' पर विशेष ध्यान
- महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा 9 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 'पोषण पखवाड़ा' के 6वें संस्करण का शुभारंभ किया गया।
- केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने इस राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत की, जो 23 अप्रैल 2026 तक चलेगा।
- इस वर्ष की मुख्य थीम: "जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क के विकास को अधिकतम करना" रखी गई है।
- वैज्ञानिक प्रमाणों के अनुसार, व्यक्ति का लगभग 85% मस्तिष्क विकास छह वर्ष की आयु तक हो जाता है, जिसमें जीवन के 'पहले 1000 दिन' सबसे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।
- यह अभियान 'पोषण अभियान' के तहत एक 'जन आंदोलन' का हिस्सा है, जिसके तहत मातृ एवं शिशु पोषण, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल तथा आहार प्रथाओं पर देश भर में जागरूकता फैलाई जाएगी।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स:
पोषण अभियान: इसे वर्ष 2018 में लॉन्च किया गया था और वर्तमान में यह 'सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0' का हिस्सा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, किशोरियों और बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाना है। वर्तमान में देश भर में 14 लाख से अधिक आंगनवाड़ी केंद्र कार्यरत हैं, जो जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य और पोषण सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
कुनो राष्ट्रीय उद्यान में भारतीय मूल की मादा चीता ने 4 शावकों को दिया जन्म
'प्रोजेक्ट चीता' के तहत प्राकृतिक परिस्थितियों (Wild) में पहला जन्म
- केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने 11 अप्रैल 2026 को भारत के चीता संरक्षण अभियान में एक ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी दी।
- मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में भारतीय मूल की 25 महीने की एक मादा चीता (KGP12) ने प्राकृतिक परिस्थितियों (जंगल) में चार शावकों को जन्म दिया है।
- यह मादा चीता 'गामिनी' (Gamini) नामक चीते की संतान है और पिछले एक साल से अधिक समय से जंगल में रह रही है।
- वर्ष 2022 में चीतों के पुनर्वास की शुरुआत के बाद से वन्य (Wild) परिस्थितियों में दर्ज किया गया यह पहला जन्म है।
- यह भारतीय मूल की मादा चीते से जुड़ा पहला ऐसा मामला है, जो इस परियोजना के मूल उद्देश्य (प्राकृतिक परिस्थितियों में चीतों के अस्तित्व और प्रजनन को सुनिश्चित करना) की दिशा में एक बड़ी सफलता है।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स:
प्रोजेक्ट चीता (Project Cheetah): भारत में 1952 में चीतों को विलुप्त घोषित कर दिया गया था। इसके बाद 17 सितंबर 2022 को नामीबिया और बाद में दक्षिण अफ्रीका से चीतों को लाकर मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park) में बसाया गया था। यह नवीनतम घटना दर्शाती है कि चीते अब भारतीय पारिस्थितिकी तंत्र के प्रति अनुकूलन (Adaptation) विकसित कर रहे हैं।
भारत के संविधान का नवीनतम संस्करण 'सिंधी भाषा' में जारी
देवनागरी और फारसी दोनों लिपियों में उपलब्ध
- भारत के संविधान का नवीनतम संस्करण अब सिंधी भाषा में जारी कर दिया गया है।
- यह संस्करण सिंधी भाषा की दोनों प्रमुख लिपियों— देवनागरी और फारसी में जारी किया गया है।
- स्वतंत्रता के बाद यह पहला अवसर है जब भारत का संविधान देवनागरी लिपि का उपयोग करने वाले सिंधी भाषियों के लिए उपलब्ध हुआ है।
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DEOrbit Exam Note:
8वीं अनुसूची और सिंधी भाषा: मूल संविधान की 8वीं अनुसूची में 14 भाषाएं थीं। सिंधी भाषा को 21वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1967 के द्वारा 15वीं भाषा के रूप में 8वीं अनुसूची में शामिल किया गया था।
लद्दाख के आधार कार्ड में अब 'जम्मू-कश्मीर' की जगह दर्ज होगा 'लद्दाख'
7 साल बाद मिली अलग पहचान
- लद्दाख को लगभग सात साल बाद आधार रिकॉर्ड में अपनी अलग पहचान मिल गई है।
- अब लद्दाख के निवासियों के आधार कार्ड में 'जम्मू और कश्मीर' के स्थान पर 'लद्दाख' दर्ज होगा।
- उल्लेखनीय है कि 31 अक्टूबर 2019 को जम्मू-कश्मीर से अलग होकर लद्दाख को एक अलग केंद्र शासित प्रदेश (UT) बनाया गया था।
इसरो के सम्मान में स्मारक डाक टिकट जारी
कर्नाटक पोस्टल सर्कल ने बेंगलुरु में किया अनावरण
- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को सम्मानित करने के लिए कर्नाटक पोस्टल सर्कल ने बेंगलुरु में एक विशेष स्मारक डाक टिकट और सोवेनियर शीट जारी की है।
- इस डाक टिकट का डिजाइन भारत की 1975 में 'आर्यभट्ट' उपग्रह से लेकर आगामी 'गगनयान' मिशन तक की शानदार अंतरिक्ष यात्रा को दर्शाता है।
18वां सिविल सेवा दिवस 2026
मुख्य समारोह एवं विषय (थीम)
- प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग द्वारा 21 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 18वां सिविल सेवा दिवस मनाया जाएगा।
- इस कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे और सभा को संबोधित करेंगे।
- वर्ष 2026 के लिए इस दिवस की मुख्य थीम "विकसित भारत: नागरिक-केंद्रित शासन और अंतिम छोर तक विकास" निर्धारित की गई है, जो सरकार की समावेशी विकास प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
- कार्यक्रम के दौरान सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री श्री जीतन राम मांझी 'प्रधानमंत्री विश्वकर्मा के माध्यम से सतत आजीविका' विषय पर एक विशेष संवाद सत्र की अध्यक्षता करेंगे।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स:
* ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 21 अप्रैल 1947 को ही तत्कालीन उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा के पहले बैच के परिवीक्षाधीन (Probationary) अधिकारियों को संबोधित किया था।
* स्टील फ्रेम ऑफ इंडिया: इसी ऐतिहासिक संबोधन में सरदार पटेल ने सिविल सेवकों को भारत का 'इस्पाती ढांचा' (Steel Frame of India) कहकर पुकारा था, जिसका उद्देश्य लोक सेवकों को राष्ट्र निर्माण और नागरिक-केंद्रित प्रशासन के प्रति समर्पित करना है।
🦆 शेखा झील पक्षी अभयारण्य: भारत का 99वां रामसर स्थल
जैव विविधता एवं पारिस्थितिक संरक्षण
- केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ स्थित शेखा झील पक्षी अभयारण्य (Shekha Jheel Bird Sanctuary) को रामसर स्थल घोषित किया है।
- इस नई घोषणा के साथ ही भारत में अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों (रामसर स्थलों) की कुल संख्या 99 हो गई है।
- शेखा झील के शामिल होने से अकेले उत्तर प्रदेश राज्य में रामसर स्थलों की कुल संख्या बढ़कर 12 हो गई है।
- पारिस्थितिक दृष्टि से यह स्थल 'मध्य एशियाई फ्लाईवे' (Central Asian Flyway) पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
- सर्दियों के मौसम में यह झील हंस (Geese), पेंटेड स्टॉर्क और विभिन्न प्रकार की बत्तखों जैसे कई प्रवासी पक्षियों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्यावास (Habitat) प्रदान करती है।
- इस घोषणा का मुख्य उद्देश्य स्थानीय आजीविका और वैश्विक जैव विविधता के साथ-साथ जल और जलवायु सुरक्षा को बढ़ावा देना है।
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DEOrbit परीक्षा नोट्स:
* रामसर कन्वेंशन (Ramsar Convention): यह आर्द्रभूमियों (Wetlands) के संरक्षण और उनके सतत उपयोग के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिस पर 1971 में ईरान के रामसर शहर में हस्ताक्षर किए गए थे।
* मध्य एशियाई फ्लाईवे (Central Asian Flyway): यह यूरेशिया और दक्षिण एशिया के बीच प्रवासी पक्षियों का एक प्रमुख उड़ान मार्ग है। शेखा झील जैसे आर्द्रभूमि क्षेत्र इन लंबी दूरी के प्रवासी पक्षियों के लिए आराम करने और भोजन प्राप्त करने के लिए 'रिफ्यूलिंग स्टेशन' (Refueling Station) के रूप में कार्य करते हैं।
रक्षा मंत्री का जर्मनी दौरा: रक्षा उत्पादन और तकनीकी साझेदारी पर जोर
म्यूनिख में जर्मन उद्योगपतियों को संबोधन
- रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 23 अप्रैल 2026 को जर्मनी के म्यूनिख में जर्मन रक्षा उद्योग के प्रमुख सीईओ (CEOs) को संबोधित किया।
- उन्होंने जर्मन कंपनियों को भारत में विशेष प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सह-विकास (co-development) और सह-उत्पादन (co-production) के लिए आमंत्रित किया।
- रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत की 'आत्मनिर्भरता' की नीति अंतर्मुखी नहीं है, बल्कि यह अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी और 'विश्वसनीय साझेदार' बनने पर केंद्रित है।
- भारत सरकार ने रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा को स्वचालित मार्ग (automatic route) के तहत 74 प्रतिशत और सरकारी मार्ग के तहत 100 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है।
रक्षा औद्योगिक गलियारे और पनडुब्बी परियोजना
- श्री राजनाथ सिंह ने जर्मन उद्योगपतियों को उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में स्थापित रक्षा औद्योगिक गलियारों (Defence Industrial Corridors) में निवेश करने का न्योता दिया।
- उन्होंने 22 अप्रैल 2026 को कील (Kiel) स्थित थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) शिपयार्ड का भी दौरा किया और वहां पनडुब्बियों के निर्माण का जायजा लिया।
- इससे पहले उन्होंने बर्लिन में जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी की थी।
DEOrbit परीक्षा नोट्स:
भारत 'प्रोजेक्ट-75I' (Project-75 India) के तहत 6 उन्नत पारंपरिक पनडुब्बियों के निर्माण के लिए जर्मन कंपनी TKMS के साथ सहयोग कर रहा है। यह 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत भारतीय नौसेना की मारक क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ाने की एक अहम रणनीतिक परियोजना है।
हरित अर्थव्यवस्था और सतत विकास: युवाओं की अहम भूमिका
जामिया मिलिया इस्लामिया में राष्ट्रीय सम्मेलन
- केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पृथ्वी दिवस के अवसर पर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली में आयोजित "21वीं सदी में पर्यावरण स्थिरता: विज्ञान, समाज और समाधान" विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित किया।
- उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत का विकास मॉडल 'हरित विकास' (Green Growth) की ओर एक महत्वपूर्ण परिवर्तन से गुजर रहा है।
- स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने से न केवल कार्बन उत्सर्जन कम होगा, बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, हरित हाइड्रोजन और चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) जैसे क्षेत्रों में 'हरित नौकरियों' (Green Jobs) और 'हरित उद्यमिता' (Green Entrepreneurship) के नए अवसर पैदा होंगे।
प्रमुख हरित पहल और ऊर्जा सुरक्षा
- डॉ. सिंह ने 19,000 करोड़ रुपये से अधिक के बजट वाले 'राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन' का उल्लेख किया, जो स्वच्छ औद्योगिक परिवर्तन की नींव रख रहा है और इस्पात व सीमेंट जैसे प्रमुख सेक्टरों में कार्बन उत्सर्जन कम कर रहा है।
- उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा के दीर्घकालिक लक्ष्यों के लिए परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने और 'समुद्री ऊर्जा' जैसे अछूते क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता बताई।
- नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा 1 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास और नवाचार (R&D) कोष की स्थापना की गई है, जो स्टार्टअप्स को बड़े पैमाने पर विकसित करने में सहायता करेगा।
- प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रतिपादित 'पर्यावरण के लिए जीवनशैली' (LiFE) की परिकल्पना के मार्गदर्शन में भारत वैश्विक जलवायु परिवर्तन को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
DEOrbit परीक्षा नोट्स:
सम्मेलन में चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) का एक बहुत ही व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत किया गया। डॉ. सिंह ने बताया कि 'प्रयुक्त खाना पकाने के तेल' (Used Cooking Oil) को जैव ईंधन (Biofuel) में परिवर्तित करना कचरा प्रबंधन के साथ-साथ रोजगार सृजन और स्थिरता लाने का एक बेहद आशाजनक क्षेत्र है।
नीति आयोग: दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए प्रभावी शासन रूपरेखा
रिपोर्ट का विमोचन और मुख्य उद्देश्य
- केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर ने 25 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में नीति आयोग की "प्रभावी शहरी शासन की ओर बढ़ते हुए- दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए एक रूपरेखा" रिपोर्ट जारी की।
- वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने और 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में भारत का शहरीकरण अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- यह रिपोर्ट मुख्य रूप से दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों (Million-Plus Cities) पर केंद्रित है, जिन्हें राष्ट्रीय विकास और आर्थिक प्रगति के प्रमुख चालक (Economic Engines) के रूप में प्राथमिकता दी गई है।
रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशें
- सशक्त शहरी नेतृत्व: एक निश्चित कार्यकाल वाले प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित मेयर (Mayor) की व्यवस्था और 'मेयर-इन-काउंसिल' प्रणाली के माध्यम से शहरी नेतृत्व को मजबूत बनाना।
- सेवाओं का एकीकरण: समन्वय और जवाबदेही को बेहतर बनाने के लिए जल आपूर्ति, स्वच्छता और सार्वजनिक परिवहन जैसी प्रमुख सेवाओं को सीधे शहरी सरकारों के अधिकार क्षेत्र में लाना।
- वित्तीय सुदृढ़ीकरण: नगरपालिकाओं को स्वयं के राजस्व स्रोत बढ़ाने, राज्य वित्त आयोगों के माध्यम से समयबद्ध वित्तीय हस्तांतरण सुनिश्चित करने और 'नगरपालिका बांड' (Municipal Bonds) जैसे बाजार-आधारित वित्तपोषण तंत्र तक पहुंच बनाने की सिफारिश की गई है।
- संस्थागत पुनर्गठन: सेवा वितरण में शामिल अर्ध-सरकारी (Para-statal) एजेंसियों को सीधे शहरी सरकार के अधीन लाकर संस्थागत पुनर्गठन करना।
DEOrbit परीक्षा नोट्स:
नीति आयोग के सदस्य श्री राजीव गौबा के अनुसार, भारत अपने शहरों की आर्थिक क्षमता का पूरी तरह से लाभ तब तक नहीं उठा सकता जब तक कि 'सशक्त शहरी सरकारों' की स्थापना नहीं हो जाती। यह रिपोर्ट इस बात पर ज़ोर देती है कि शहरी सरकारों को मजबूत बनाना केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए एक रणनीतिक अनिवार्यता है।
लघु पनबिजली विकास योजना: ऊर्जा सुरक्षा का सुदृढ़ीकरण
योजना की मंजूरी और प्रमुख लक्ष्य
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2,584.60 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 'लघु पनबिजली विकास योजना' को मंजूरी दी है, जो वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेगी।
- इस योजना का मुख्य लक्ष्य देश भर में लगभग 1,500 मेगावाट की नई लघु जल विद्युत (Small Hydro Power) क्षमता विकसित करना है।
- योजना के निर्माण चरण के दौरान लगभग 51 लाख मानव-दिवस (person-days) के रोज़गार सृजित होने की उम्मीद है, जो समावेशी विकास को गति देगा।
- भारत में लघु पनबिजली की कुल अनुमानित क्षमता 21,133.61 मेगावाट है, जिसमें से अब तक लगभग 5,171 मेगावाट (करीब 24.5%) का ही उपयोग किया गया है।
वित्तीय सहायता और क्षेत्रीय क्षमता
- पूर्वोत्तर राज्यों और अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती जिलों के लिए: 3.6 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट या परियोजना लागत का 30% (प्रति परियोजना अधिकतम 30 करोड़ रुपये) की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
- अन्य राज्यों के लिए: 2.4 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट या परियोजना लागत का 20% (प्रति परियोजना अधिकतम 20 करोड़ रुपये) की सहायता का प्रावधान है।
- भारत के उत्तरी क्षेत्र (Northern Region) में लघु जल विद्युत की क्षमता सर्वाधिक (7,978 मेगावाट) है, जो कुल क्षमता का लगभग 38% है।
- राज्यों के स्तर पर बात करें तो कर्नाटक (3,726 मेगावाट) क्षमता के साथ देश में सबसे आगे है, जिसके बाद हिमाचल प्रदेश (3,460 मेगावाट) और अरुणाचल प्रदेश (2,064 मेगावाट) का स्थान आता है।
DEOrbit परीक्षा नोट्स:
भारत में 25 मेगावाट तक की स्थापित क्षमता वाली पनबिजली परियोजनाओं को 'लघु पनबिजली परियोजना' (Small Hydro Power) माना जाता है और इनका प्रशासन नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा किया जाता है। दूसरी ओर, 25 मेगावाट से अधिक क्षमता वाली बड़ी पनबिजली परियोजनाएं विद्युत मंत्रालय (Ministry of Power) के अधिकार क्षेत्र में आती हैं।
ऑनलाइन गेमिंग नियम 2026: प्रशासन का एक नया युग
नियमों का क्रियान्वयन और मुख्य उद्देश्य
- ऑनलाइन गेमिंग के संवर्धन एवं विनियमन नियम, 2026 आधिकारिक तौर पर 1 मई 2026 से लागू हो रहे हैं।
- यह भारत के डिजिटल गेमिंग परिदृश्य को विनियमित करने के लिए एक स्पष्ट और व्यापक ढांचा प्रदान करता है।
- इन नियमों का मुख्य उद्देश्य नवाचार (Innovation) और संरक्षण (Protection) के बीच संतुलन बनाना, उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उद्योग का जिम्मेदार विकास करना है।
नए विनियामक ढांचे के प्रमुख प्रावधान
| प्रावधान का क्षेत्र | मुख्य विशेषताएं एवं प्रभाव |
|---|---|
| नियामक प्राधिकरण (Regulatory Body) | 'ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया' को एक एकीकृत और डिजिटल-प्रथम (Digital-first) नियामक के रूप में स्थापित किया गया है। |
| खेलों का वर्गीकरण (Classification) | प्रतिबंधित 'ऑनलाइन मनी गेम्स' को अनुमत गतिविधियों जैसे ई-स्पोर्ट्स (e-Sports) और ऑनलाइन सोशल गेम्स से अलग करने के लिए एक पारदर्शी प्रणाली शुरू की गई है। |
| पंजीकरण प्रणाली (Registration) | सभी अधिसूचित खेलों के लिए एक संरचित और अनिवार्य पंजीकरण प्रणाली लागू की गई है। |
| शिकायत निवारण (Grievance Redressal) | उपयोगकर्ताओं की शिकायतों के लिए समयबद्ध प्रवर्तन, उचित दंड और 'दो-स्तरीय अपीलीय तंत्र' (Two-tier Appellate Mechanism) को सक्षम बनाया गया है। |
DEOrbit परीक्षा नोट्स:
भारत में ऑनलाइन गेमिंग का क्षेत्र अब तक बिना किसी स्पष्ट एकीकृत ढांचे के तेज़ी से विकसित हो रहा था। 1 मई 2026 से लागू होने वाले ये नियम न केवल 'ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया' जैसी एक नोडल एजेंसी स्थापित करते हैं, बल्कि 'कौशल आधारित खेलों' (जैसे ई-स्पोर्ट्स) और 'धन-आधारित जोखिम वाले खेलों' के बीच एक बहुत ही स्पष्ट कानूनी विभाजन भी खींचते हैं, जो डिजिटल नीति में भारत की स्थिति को वैश्विक स्तर पर मजबूत करेगा।
5वां विश्व लघु मत्स्य पालन सम्मेलन: थाईलैंड में भारत की भागीदारी
सम्मेलन के मुख्य बिंदु और भारतीय प्रतिनिधित्व
- मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने 27 से 30 अप्रैल 2026 तक च्यांग माई, थाईलैंड में आयोजित '5वें विश्व लघु मत्स्य पालन सम्मेलन' (WSFC) में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।
- इस सम्मेलन का आयोजन खाद्य और कृषि संगठन (FAO) और टीबीटीआई (TBTI) ग्लोबल द्वारा किया गया था, जिसमें 50 देशों के 300 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
- इस वर्ष सम्मेलन का विषय "न्यायपूर्ण भविष्य, सुखद भविष्य और मूल्यवान जीवन को बढ़ावा देना है: लघु मत्स्य पालन" था।
- भारत ने लघु मत्स्य पालन में 'समावेशी और इकोसिस्टम-आधारित शासन' (Ecosystem-based governance) पर विशेष बल दिया है।
लघु मत्स्य पालन (SSF): वैश्विक और भारतीय सांख्यिकी
| मापदंड | आंकड़े और स्थिति |
|---|---|
| वैश्विक उत्पादन में SSF का योगदान | लघु मत्स्य पालन (SSF) दुनिया के लगभग 50 प्रतिशत जलीय भोजन का उत्पादन करता है और कुल कैच (Catch) में लगभग 40 प्रतिशत का योगदान देता है। |
| भारत की वैश्विक रैंकिंग | भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक, तीसरा सबसे बड़ा एक्वाकल्चर उत्पादक, अंतर्देशीय (Inland) कैप्चर मत्स्य पालन में पहला और चौथा सबसे बड़ा निर्यातक देश है। |
| वैश्विक उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी | वैश्विक मछली उत्पादन में भारत का योगदान 8 प्रतिशत है। |
| रोजगार और आजीविका | भारत में यह क्षेत्र लगभग 30 मिलियन (3 करोड़) से अधिक लोगों को आजीविका प्रदान करता है। |
भारत सरकार की प्रमुख पहलें और निवेश
- भारत सरकार ने मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए अब तक का सबसे अधिक 38,272 करोड़ रुपये का निवेश स्वीकृत किया है।
- यह निवेश मुख्य रूप से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY), मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (FIDF) और प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) के माध्यम से किया जा रहा है।
- भारत का ध्यान 'ब्लू ट्रांसफॉर्मेशन' (Blue Transformation) पर है, जिसमें डिजिटल ट्रैसेबिलिटी, मरीन स्पैटियल प्लानिंग और इस क्षेत्र के डीकार्बोनाइजेशन (कार्बन उत्सर्जन कम करना) को बढ़ावा दिया जा रहा है।
DEOrbit परीक्षा नोट्स:
सम्मेलन में इस बात पर विशेष प्रकाश डाला गया कि लघु मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला (Value Chain) में महिलाओं की भागीदारी लगभग 40 प्रतिशत है, जो इसे महिला सशक्तिकरण का एक प्रमुख क्षेत्र बनाता है। भारत ने अपनी नीतियों में खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा और आजीविका सुरक्षा के साथ-साथ तटीय और अंतर्देशीय दोनों क्षेत्रों में 'मत्स्य संपदा' के टिकाऊ उपयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
नीति आयोग: DPI@2047 - भारत के डिजिटल परिवर्तन का नया प्रारूप
प्रारूप का अनावरण और मुख्य उद्देश्य
- नीति आयोग ने 27 अप्रैल 2026 को 'विकसित भारत के लिए DPI@2047' (डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर) नामक एक रणनीतिक प्रारूप (Roadmap) प्रस्तुत किया।
- इस प्रारूप का अनावरण नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री सुमन बेरी और भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद द्वारा किया गया।
- इसे 'एक्सटेप फाउंडेशन' (EkStep Foundation) और 'ओमिडयार नेटवर्क इंडिया' (ON) के साथ साझेदारी में विकसित किया गया है।
- इस दस्तावेज़ का मुख्य उद्देश्य डिजिटल समावेश से आगे बढ़कर, बड़े पैमाने पर क्षमता, उत्पादकता और अवसरों को सक्षम करना है, जो भारत को 2047 तक 'विकसित भारत' बनाने की दिशा में एक 'गैर-रेखीय' (Non-linear) और समावेशी विकास की ओर ले जाएगा।
डिजिटल परिवर्तन के दो प्रमुख चरण (DPI 2.0 और DPI 3.0)
| चरण (Phase) | अवधि और मुख्य फोकस क्षेत्र |
|---|---|
| DPI 2.0 (डीपीआई 2.0) | अवधि (2025-2035): यह चरण मुख्य रूप से एमएसएमई (MSME), कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य सहित विभिन्न क्षेत्रों में संरचनात्मक बाधाओं को दूर करने और उत्पादकता-आधारित विकास को गति देने पर केंद्रित है। |
| DPI 3.0 (डीपीआई 3.0) | अवधि (2035-2047): यह चरण 'व्यापक समृद्धि' (Broad-based Prosperity) को सक्षम बनाने और एक उन्नत डिजिटल अर्थव्यवस्था के निर्माण पर केंद्रित होगा। |
| कार्यान्वयन रणनीतियां | डीपीआई 2.0 के तहत जिला-आधारित मांग एकत्रीकरण (Demand Aggregation), प्रौद्योगिकी उद्यमिता को बढ़ावा देना, एआई (AI) का लाभ उठाना और बेहतर डेटा उपयोग जैसी रणनीतियों की रूपरेखा दी गई है। |
एआई (AI) का एकीकरण और 'नीति फ्रंटियर टेक हब'
- प्रारूप इस बात पर ज़ोर देता है कि डीपीआई (DPI), एआई (AI) और उद्यमिता को मिलाकर, भारत एआई को अपनाने का एक समावेशी, स्थानीय भाषा में और व्यापक जनमानस वाला मॉडल विकसित कर सकता है।
- यह मॉडल जीवन को बेहतर बनाने, आजीविका को मजबूत करने और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- इस दस्तावेज़ को 'नीति फ्रंटियर टेक हब' (NITI Frontier Tech Hub) द्वारा विकसित किया गया है।
- यह हब सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत के 100 से अधिक विशेषज्ञों के सहयोग से, आर्थिक विकास और सामाजिक परिणामों के लिए अग्रणी प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाने के लिए 20 से अधिक क्षेत्रों में 10 वर्षीय प्रारूप तैयार कर रहा है।
DEOrbit परीक्षा नोट्स:
भारत की डिजिटल यात्रा में DPI 1.0 (जैसे- आधार, यूपीआई, कोविन) ने मुख्य रूप से पहचान (Identity), भुगतान (Payments) और कल्याणकारी लाभों (Welfare) तक सीधी पहुंच सुनिश्चित करके 'डिजिटल समावेशन' हासिल किया। अब, DPI 2.0 का लक्ष्य इस नेटवर्क प्रभाव का उपयोग करके आजीविका, उत्पादकता और बाज़ार पहुंच के नए अवसर पैदा करना है। यह 'गैर-रेखीय' (Non-linear) विकास का अर्थ है कि विकास की गति सीधे निवेश या समय के अनुपात में नहीं, बल्कि तकनीक और नेटवर्क प्रभाव के कारण कई गुना तेज़ी से बढ़ेगी।
भारत निर्वाचन आयोग: मतगणना केंद्रों के लिए क्यूआर-आधारित आईडी प्रणाली
नई प्रणाली की शुरुआत और इसके मुख्य उद्देश्य
- भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मतगणना केंद्रों में अनाधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश को रोकने के लिए 'ईसीआई-ईएनईटी' (ECI-ENET) पर एक नया क्यूआर-आधारित फोटो पहचान पत्र मॉड्यूल शुरू किया है।
- यह व्यवस्था 4 मई, 2026 को होने वाली मतगणना (असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी विधानसभाओं और अन्य उपचुनावों) से लागू होगी और भविष्य के सभी चुनावों में इसका विस्तार किया जाएगा।
- यह पहल आयोग द्वारा पिछले एक वर्ष में की गई 30 से अधिक तकनीकी और प्रशासनिक सुधारों की श्रृंखला का हिस्सा है, जिसमें बीएलओ (BLO) के लिए मानकीकृत क्यूआर-आधारित आईडी कार्ड की शुरुआत भी शामिल है।
त्रि-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था और प्रवेश के नियम
| सुरक्षा स्तर / श्रेणी | संबंधित नियम और प्रक्रियाएं |
|---|---|
| प्रथम और द्वितीय सुरक्षा स्तर | पहले और दूसरे स्तर पर मतगणना अधिकारियों द्वारा पहचान पत्रों की भौतिक (मैनुअल) रूप से जांच की जाएगी। |
| तृतीय स्तर (सबसे भीतरी घेरा) | मतगणना हॉल के पास स्थित तीसरे और सबसे भीतरी सुरक्षा घेरे में क्यूआर कोड की सफल स्कैनिंग के बाद ही प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। |
| अधिकृत व्यक्ति (क्यूआर आईडी धारक) | यह प्रणाली रिटर्निंग ऑफिसर, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर, मतगणना कर्मचारी, तकनीकी कर्मचारी, उम्मीदवार, चुनाव एजेंट और मतगणना एजेंट पर लागू होगी। |
| मीडिया कर्मियों के लिए नियम | मीडिया की सुविधा के लिए मतगणना कक्षों के पास एक अलग 'मीडिया केंद्र' स्थापित किया जाएगा। मीडिया कर्मियों का प्रवेश निर्वाचन आयोग द्वारा जारी 'प्राधिकार पत्रों' के आधार पर ही होगा। |
DEOrbit परीक्षा नोट्स:
चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, सुरक्षा और दक्षता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा यह क्यूआर-आधारित आईडी प्रणाली एक बड़ा तकनीकी सुधार है। जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) और रिटर्निंग अधिकारियों को इस त्रि-स्तरीय व्यवस्था के सख्त अनुपालन और सुरक्षा चौकियों पर प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
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