Sunday, 29 March 2026

राजस्थान में पहली कक्षा में प्रवेश की आयु अब 5 साल

राजस्थान सरकार ने सरकारी स्कूलों में घटते नामांकन को रोकने के लिए शिक्षा विभाग ने एक बड़ा व्यावहारिक कदम उठाया है। अब पहली कक्षा में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 6 वर्ष के बजाय 5 वर्ष कर दी गई है। इस फैसले से उन हजारों अभिभावकों को बड़ी राहत मिलेंगी जिन्हें अपने बच्चों के दाखिले के लिए एक साल का लंबा इंतजार करना पड़ता था।

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत पहले 6 साल की आयु अनिवार्य थी।
  • पिछले सत्र में राज्य के 73,272 स्कूलों में करीब 3.5 लाख बच्चों का नामांकन कम हो गया था।
  • नई नीति से अभिभावकों को राहत मिलेगी, जिन्हें अब लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
💡 DEOrbit Note: हाल के वर्षों में शिक्षा नीति में कई सुधार किए गए हैं, जो स्कूल नामांकन में वृद्धि के कारक माने जा सकते हैं।

रावतभाटा परमाणु बिजलीघर यूनिट ने बनाया रिकॉर्ड

राजस्थान के रावतभाटा स्थित परमाणु बिजलीघर की एक यूनिट ने लगातार 226 दिनों तक संचालन कर रिकॉर्ड बनाया। इस यूनिट की क्षमता 200 मेगावाट है और इसने राज्य की बिजली आपूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस स्थिर उत्पादन से राज्य की ऊर्जा आवश्यकताओं का 50% हिस्सा पूरा किया गया।

  • उत्पादन का 50% बिजली राजस्थान को मिलता है।
  • लगातार 226 दिन तक संचालन किया गया।
  • 200 मेगावाट क्षमता वाली इकाई।
💡 DEOrbit Note: रावतभाटा राजस्थान में स्थित एक प्रमुख परमाणु ऊर्जा केंद्र है, जिसे देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए स्थापित किया गया है। यहां के परमाणु संयंत्रों का डिजाइन और संचालन अत्यंत उन्नत तकनीक के साथ किया जाता है, जिससे सुरक्षित और निरंतर बिजली उत्पादन सुनिश्चित होता है। यह केंद्र न केवल राजस्थान बल्कि आसपास के राज्यों को भी बिजली की आपूर्ति करता है, जिससे क्षेत्रीय विकास और ऊर्जा सुरक्षा में योगदान मिलता है।

बांसवाड़ा जिले के खड़गदा गांव की मोरन नदी को पुनर्जीवित करना

राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के खड़गदा गांव के ग्रामीणों ने लगभग मृत पड़ी मोरन नदी को पुनर्जीवित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। ग्रामीणों का यह प्रयास सरकार की योजनाओं और अपनी मेहनत के मेल से नदी को पुनर्जीवित करने की योजना पर काम कर रहा है। इस प्रयास के तहत, राज्य सरकार ने 300 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। नदी के किनारे रिसॉर्ट का निर्माण कर, पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है।

  • ग्राम मोरन में नदी के पुनरुद्धार का कार्य चल रहा है, जो अपने आप में एक बड़ा कदम है।
  • सरकार द्वारा 300 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की गई है।
  • पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए रिसॉर्ट एवं अन्य स्थलों का निर्माण हो रहा है।
  • नदी के किनारे नए विकास कार्यों से स्थाई रोजगार उत्पन्न होने की संभावना है।
💡 DEOrbit Note: कई स्थानों पर नदी पुनर्जीवन परियोजनाएं कृषि एवं जल प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बढ़त होती है।

श्रमिक परिवार की 2 बेटियों को ₹55-55 हजार की मदद

राजस्थान सरकार की शुभ शक्ति योजना के अंतर्गत श्रमिक परिवार की बेटियों को आर्थिक सहायता दी जाती है ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। योजना के तहत बेटियों की शिक्षा, कौशल विकास या विवाह के लिए सहायता दी जाती है जिसमें ₹55,000 तक की सहायता राशि दी जाती है। यह राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर होती है।

  • योजना में मिली राशि का उपयोग बेटियां उच्च शिक्षा, स्किल ट्रेनिंग, खुद का व्यवसाय शुरू करने में कर सकती हैं।
  • श्रमिक परिवार की बेटियों को सशक्त बनाना, उन्हें शादी या विवाह में मदद करना योजना का उद्देश्य है।
  • आवेदन के लिए, आवेदक का राजस्थान निवासी होना, श्रमिक पंजीकरण प्रमाण पत्र आवश्यक है।
💡 DEOrbit Note: शुभ शक्ति योजना का उद्देश्य आर्थिक सहायता प्रदान कर बेटियों को आत्मनिर्भर बनाना है जिससे समाज में उनकी सशक्त उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके।

ईवी को 'चार्ज' करेगा राजस्थान: 5000 नए स्टेशन लगेंगे, हर 300 से 500 मीटर पर चार्जिंग सुविधा

राजस्थान में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 5000 नए चार्जिंग स्टेशन खोले जाएंगे। इस पहल से 2.53 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों का समर्थन होगा। राज्य सरकार द्वारा 1531 चार्जिंग स्टेशन पहले ही संचालित किए जा चुके हैं, और यह योजना जनवरी 2026 तक 7000 कुल चार्जिंग स्टेशन तक विस्तार करने की है। नए चार्जिंग पॉइंट्स 300 से 500 मीटर के अत्यधिक नजदीक होंगे, जिससे ईवी चार्जिंग आसानी से उपलब्ध होगी।

  • लक्ष्य: जनवरी 2026 तक 7000 चार्जिंग स्टेशन।
  • स्थान: हर 300 से 500 मीटर पर चार्जिंग पॉइंट।
  • ईवी सपोर्ट: 2.53 लाख इलेक्ट्रिक वाहन।
  • वर्तमान स्थिति: 1531 चार्जिंग स्टेशन पहले से लागू।
💡 DEOrbit Note: इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में वृद्धि के चलते चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास आवश्यक हो गया है, जिससे ऊर्जा की बचत और पर्यावरण संतुलन में सुधार होगा।

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